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Bihar Chunav 2025: नीतीश की ‘पलटी’ चर्चा में, क्या होगा खेला!, नीतीश-लालू की सियासी दोस्ती और दुश्मनी की कहानी

Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण का प्रचार आज (रविवार, 9 नवंबर) शाम थम जाएगा। इस चरण में 20 जिलों की 122 सीटों पर 11 नवंबर को मतदान होगा। प्रचार के आखिरी दिन एनडीए और महागठबंधन दोनों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में लगातार रैलियां कर रहे हैं, वहीं महागठबंधन खेमे से राजद नेता तेजस्वी यादव, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और कई अन्य बड़े चेहरे जनता के बीच पहुंचकर माहौल बनाने में जुटे हैं। आइए समझते हैं सियासी समीकरण।

Bihar Chunav

मतदान से पहले सियासी हलचल तेज
दूसरे चरण में कुल 3 करोड़ 70 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें करीब 1 करोड़ 95 लाख पुरुष, 1 करोड़ 74 लाख महिलाएं और 943 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। इस चरण में 1302 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 1165 पुरुष, 136 महिलाएं और एक थर्ड जेंडर प्रत्याशी हैं। 45 हजार से अधिक मतदान केंद्रों पर चुनाव आयोग ने व्यापक तैयारियां की हैं। पहले चरण की तरह इस चरण में भी बंपर वोटिंग की उम्मीद जताई जा रही है।

नीतीश-लालू की सियासी दोस्ती और दुश्मनी की कहानी
पिछले 35 वर्षों में बिहार की राजनीति का केंद्रबिंदु लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार रहे हैं। कभी दोनों कट्टर प्रतिद्वंद्वी बने, तो कभी एक-दूसरे के सहारा। 2015 और 2022 में नीतीश ने आरजेडी से हाथ मिलाकर न सिर्फ सत्ता में वापसी की, बल्कि लालू परिवार की सियासी प्रासंगिकता भी बनाए रखी। दोनों बार तेजस्वी यादव को उपमुख्यमंत्री बनाया गया, जबकि लालू यादव ने मुख्यमंत्री पद का दावा छोड़कर नीतीश को खुला रास्ता दिया। यह गठबंधन बिहार की राजनीति में एक असामान्य लेकिन प्रभावी साझेदारी का उदाहरण बन गया।

नीतीश की सियासत का गणित और पलटी का इतिहास
नीतीश कुमार की राजनीति हमेशा समीकरणों पर टिकी रही है। उन्होंने 2005 में लालू से अलग होकर कुर्मी-कोइरी, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और महादलितों का मजबूत गठबंधन तैयार किया। भले ही कुर्मी समाज की आबादी राज्य में महज 2.8 प्रतिशत है, लेकिन नीतीश ने भाजपा के ऊपरी जाति वोट बैंक को जोड़कर सत्ता का नया फॉर्मूला तैयार किया।

इसी सामाजिक संतुलन ने उन्हें लंबे समय तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बनाए रखा। लेकिन यही नीतीश बार-बार राजनीतिक पलटी के लिए भी मशहूर रहे हैं। कभी महागठबंधन में तो कभी एनडीए में, उनकी दिशा बदलने की कला ने विरोधियों को भी चकित किया है। सियासी गलियारों में नीतीश कुमार की पलटी को लेकर चर्चाएं तेज़ हो चुकी हैं।

क्या फिर बदलेगा बिहार का राजनीतिक समीकरण?
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का हर कदम एक संकेत बन जाता है। 2025 के इस चुनाव में सवाल सिर्फ जीत या हार का नहीं, बल्कि इस बात का भी है कि क्या नीतीश एक बार फिर किसी नए गठबंधन की ओर बढ़ेंगे या इस बार एनडीए के साथ स्थायी रहेंगे।

पिछले अनुभव बताते हैं कि नीतीश कभी किसी एक खेमे में लंबे समय तक नहीं टिकते। उनकी राजनीति 'संतुलन की कला' और 'विकल्प को जिंदा रखने की रणनीति' पर आधारित है। अब देखना होगा कि इस बार नीतीश की दिशा किस ओर मुड़ती है, सत्ता की ओर या फिर एक नई सियासी कहानी की ओर यह देखने वाली बात होगी।

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