लालू यादव की वजह से PM नहीं बन पाए थे ‘नेता जी’, फिर रिश्ते में तब्दील हुई सियासी कड़वाहट
RIP Mulayam Singh: मुलायम सिंह यादव पहली बार 1996 में लालू प्रसाद यादव की वजह से प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए थे। 1996 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई थी। भाजपा ने 161 सीटों पर क़ब्ज़ा जमया था। वहीं अटल बिहारी...
RIP Mulayam Singh: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने आज (सोमवार) को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। मेदांता अस्पताल (दिल्ली) में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने आखिरी सांसें ली। पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। वहीं अब उनकी पुरानी सियासी कहानिया भी देखने को मिल रही हैं। इसी कड़ी में हम आपको राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के सियासी कड़वाहट से समधी बनने तक के सफर के बारे में बताने जा रा रहे हैं। दो बार ऐसा हुआ कि लालू प्रसाद यादव की वजह से मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए। एक दिन ऐसा आया कि दोनों की सियासी कड़वाहट रिश्ते में तब्दील हो गई।
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बिहार सरकार ने घोषित किया एक दिन का शोक
मुलायम सिंह यादव के निधन पर बिहार सरकार ने एक दिन का शोक घोषित किया है। वहीं लालू यादव मीडिया से मुखातिब होते हुए शोक संवेदना भी व्यक्त की। इसके साथ वह मुलायम सिंह यादव के अंतिम संस्कार में शामिल होने सैफई भी जाएंगे। आइए आपको लालू प्रसाद यादव और मुलायम सिंह यादव के सियासी मतभेद के किस्से बताते हैं। उसके बाद बताएंगे कि किस तरह दोनो समधी बने। 2004 लोकसभा चुनाव की तैयारी ज़ोरों पर चल रही थी। इस दौरान लालू प्रसाद यादव ने मुलायम सिंह यादव के खिलाफ बयानबाज़ी करते हुए कहा था कि मुलायम सिंह यादव भाजपा के एजेंट हैं। अगर भाजपा को बहुमत नहीं आएगी तो वह मुलायम सिंह को प्रधानमंत्री पद का लालच दिया है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के इस बयान के बाद सियासी पारा चढ़ गया था।

1996 में पीएम पद के लिए आगे आया था नाम
मुलायम सिंह यादव पहली बार 1996 में लालू प्रसाद यादव की वजह से प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए थे। 1996 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई थी। भाजपा ने 161 सीटों पर क़ब्ज़ा जमया था। वहीं अटल बिहारी वाजपेयी ने पीएम पद की शपथ ली। अल्पमत में होने की वजह से 13 दिन बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था। वहीं कांग्रेस के पास 141 सीटें थी लेकिन कांग्रेस गठबंधन कर सरकार नहीं बनाना चाहती थी। इसके बाद मिली जुली विपक्ष ने मिली जुली सरकार बनाने का फ़ैसला लिया।

एच डी देवगौड़ा बने देश के प्रधानमंत्री
वीपी सिंह और ज्योती बसु (बंगाल के तत्कालीन सीएम) का नाम पीएम पद के लिए सामने आया। लेकिन वीपी सिंह ने प्रधानमंत्री बनने से इनकार कर दिया। वहीं, ज्योति बसु के नाम पर सभी नेताओं ने सहमति दर्ज नहीं की। फिर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के नाम की चर्चा हुई। चूंकी लालू प्रसाद यादव का नाम चारा घोटाले में थे इसलिए वह पीएम की रेस से पहले ही बाहर हो चुके थे। अब मुलायाम सिंह का नाम बचा था। सियासी गलियारों में यह तय माना जा रहा था कि मुलायम सिंह यादव ही देश के प्रधानमंत्री होंगे। लालू प्रसाद यादव और शरद यादव उस फैसले के खिलाफ हो गए। इसके बाद मुलायम सिंह यादव के बजाए एच डी देवगौड़ा देश के प्रधानमंत्री बने।

1999 में भी पूर नहीं हो सकी ख्वाहिश
1999 के लोकसभा चुनाव में संभल और कन्नौज सीट से मुलायम सिंह यादव ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद फिर मुलायम सिंह का नाम पीएम उम्मीदवार के तौर पर सामने आया लेकिन कई नेता उनके नाम के खिलाफ हो गए जिसमें लालू प्रसाद यादव, चंद्र बाबू नायडू, शरद यादव और वीपी सिंह का नाम सबसे उपर था। इनकी वजह से मुलायम सिंह यादव प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए।

लालू और मुलायम बने समधी
लालु प्रसाद यादव और मुलायम सिंह यादव की सियासी कड़वाहट तो आप ने पढ़ ली अब आपको उनके समधी बनने का किससा सुनाते हैं, जिसके बाद दो सियासी दुश्मन दोस्त बन गए। लालू यादव के परिवार से मुलायम सिंह यादव का गहरा रिश्ता रहा है। सियासी मतभेद के बावजूद दोनों परिवार में प्यार का रिश्ता बना और वह लोग एक हो गए। दरअसल लालू प्रसाद यादव की सबसे छोटी बेटी राजलक्ष्मी की शादी मुलायम सिंह यादव के पोते तेज प्रताप सिंह से हुई है।
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