Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Bihar Politics: PK और RCP सिंह की जोड़ी क्या बदलेगी प्रदेश की सियासी फ़िज़ा, संभावनाओं की सियासत पर चर्चा तेज़

Bihar Politics: बिहार में चुनाव नज़दीक आते ही सियासी फिज़ा बदलने लगी है। वहीं नए समीकरण भी बनने लगे हैं। इसी क्रम में, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने अपनी पार्टी 'आप सबकी आवाज़' का प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी में विलय कर दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी ज़ोरों पर है।

बिहार में होगा दिलचस्प मुकाबला: भाजपा-जद(यू) के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन का राजद-कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन से मुकाबला है। भारत भर में प्रमुख नेताओं और पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति बनाने के लिए मशहूर प्रशांत किशोर बिहार विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत से उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

Bihar Politics

पीके ने बिहार के लगभग सभी जिलों और तहसीलों का दौरा किया है और सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने का लक्ष्य रखा है। किशोर समाज के सभी वर्गों तक पहुंच बना रहे हैं और अपनी रैलियों में बिहार के नेताओं पर राज्य का शोषण करने का आरोप लगा रहे हैं।

राजनीतिक गतिशीलता और चुनाव रणनीति: सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ है कि जन सुराज पार्टी, एआईएमआईएम और अन्य राजनीतिक दलों के साथ मिलकर बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी ताकत दिखाने की योजना बना रही है। इस ओर क़दम बढ़ाते हुए आरसीपी सिंह और प्रशांत किशोर की पार्टी का भी विलय हो चुका है।

आरसीपी सिंह का राजनीतिक सफर: एक समय नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी रहे सिंह जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और भारत सरकार में मंत्री भी रहे। हालांकि, समय के साथ उनके रिश्ते खराब होते गए। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मतभेद के बाद अक्टूबर 2024 में आरसीपी सिंह ने 'आप सबकी आवाज़' नाम की पार्टी बनाई।

मूल रूप से कुर्मी जाति से आने वाले नौकरशाह आरसीपी सिंह राजनीति में आए। उनकी पहली मुलाकात नीतीश कुमार से तब हुई जब नीतीश कुमार रेल मंत्री थे और आरसीपी सिंह नालंदा जिले में उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी थे। 2005 में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने सिंह को प्रधान सचिव नियुक्त किया।

2010 में आरसीपी सिंह सिविल सेवा से रिटायर होकर जेडीयू में शामिल हो गए थे। पार्टी ने उन्हें दो बार राज्यसभा भेजा, लेकिन कथित तौर पर 2021 में जब वे नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल हुए, तो पार्टी ने उन्हें अस्वीकार कर दिया। इससे नीतीश कुमार के साथ उनके रिश्ते खराब हो गए। नीतीश कुमार से मतभेद के बाद आरसीपी सिंह ने भारत सरकार में अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और अंततः जेडीयू भी छोड़ दी।

बिहार 243 विधानसभा सीटों पर इसका कितना प्रभाव पड़ा यह तो चुनावी परिणाम ही से पता लगेगा, फिलहाल इस पर संभावनाओं की सियासत जारी है। अपनी जन सुराज यात्रा के दौरान प्रशांत किशोर ने बिहार की दुर्दशा को एक प्रमुख मुद्दे के रूप में उजागर किया है।

किशोर द्वारा पिछले नेतृत्व की आलोचना: पीके ने स्थानीय राजनीतिक दलों और नेताओं पर जन कल्याण की बजाय अपने परिवारों को प्राथमिकता देने और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का आरोप लगाया। प्रशांत किशोर का दावा है कि उनकी पार्टी का लक्ष्य पलायन, बेरोजगारी, पिछड़ापन और राज्य की अन्य समस्याओं जैसे मुद्दों का हल निकालना है।

प्रशांत किशोर ने अपनी रैलियों में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के शासन की आलोचना की है। उनका तर्क है कि अगर इन नेताओं ने बिहार के विकास पर ध्यान दिया होता, तो आज राज्य की हालत इतनी खराब नहीं होती। हालांकि, यह अनिश्चित है कि मतदाता स्थापित पार्टियों के बजाय किशोर की बातों पर भरोसा करेंगे या नहीं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+