PM मोदी ने यूं ठुकराया पटना यूनिवर्सिटी को सेंट्रल बनाए जाने की मांग
पटना। शनिवार को प्रधानमंत्री पटना यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में हिस्सा लेने बिहार पहुंचे थे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मोदी से पटना यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देने की मांग की थी। साल 1917 में स्थापित पटना यूनिवर्सिटी का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। देश की कई जानी मानी हस्तियां इस यूनिवर्सिटी से निकली है। शनिवार को जब प्रधानमंत्री मोदी इस यूनिवर्सिटी में पहुंचे तो लोगों को उम्मीद जगी कि वो इसे सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी तो बीते जमाने की बात है। मैं पटना यूनिवर्सिटी को उससे भी आगे ले जाना चाहता हूं। इसके साथ ही पीएम मोदी ने देश की दस सरकारी और दस प्राइवेट यूनिवर्सिटी को 10 हजार करोड़ की सहायता देने का ऐलान किया। पीएम मोदी ने इसके लिए देश की सभी यूनिवर्सिटी के बीच एक प्रतिस्पर्धा होगी और उनके बीच से दस सरकारी और दस प्राइवेट यूनिवर्सिटी का चयन किया जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि पटना यूनिवर्सिटी इसमें जरूर जगह बनाएगी।
यूनिवर्सिटी की हालत नहीं है ठीक
बता दें कि पटना विश्वविद्यालय की हालात इस वक्त बहुत अच्छी नहीं है। राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों की तरह यहां भी पर अध्यापकों की बेहद कमी है। इस विश्वविद्यालय का इतिहास भले ही गौरवशाली हो पर वर्तमान स्थिति संतोषजनक नहीं दिखती है। पटना विश्वविद्यालय से 52 साल तक छात्र और शिक्षक के रूप में जुड़े रहे पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य नवल किशोर चौधरी का कहना है कि पटना विश्वविद्यालय को अब केंद्रीय विश्वविद्यालय देने की जरूरत है। क्योंकि इस विश्वविद्यालय का इतिहास गौरवशाली रहा है लेकिन पैसे की कमी के कारण इसके संचालन में अब काफी परेशानियां आ रही है अगर इस विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिल गया तो काफी पैसा भी मिलेगा और विश्वविद्यालय पुराने इतिहास को दोबारा दोहराने लगेगी।












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