PM Modi New government: नई सरकार में बिहार से किस जाति के मंत्रियों का दबदबा, किनकी टूटी उम्मीद?
PM Modi New Cabinet Ministers from Bihar: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी नई सरकार में यूपी के बाद सबसे ज्यादा बिहार के सांसदों को मंत्री बनने का मौका दिया है। राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, इस लिहाज से यह देखना दिलचस्प है कि इसमें एनडीए की ओर से किस तरह से जातीय समीकरण को संतुलित करने की कोशिश की गई है।
पीएम मोदी की नई सरकार में इन जातियों को मिला प्रतिनिधित्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी नई सरकार में बिहार के 2 दलित नेताओं को मौका दिया है तो इतनी ही तादाद में दो अति-पिछड़े (EBC) भी मंत्री बनाए गए हैं। सबसे बड़ी बाजी भूमिहार जाति ने मारी है, जिसके 2 नेताओं को नई मंत्रिपरिषद में जगह दी गई है।

इसके अलावा एक यादव (ओबीसी) और एक ब्राह्मण चेहरे को भी शामिल किया गया है। इस तरह से साफ है बिहार से एनडीए सरकार में अगले चुनावों को देखते हुए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की गई है।
अति-पिछड़ों और दलितों पर ज्यादा ध्यान
बिहार में सामाजिक न्याय की राजनीति पिछले करीब साढ़े तीन दशकों से हावी है। इसमें ओबीसी से भी आगे निकलकर अति-पिछड़ों की राजनीति अब बहुत ही ज्यादा मायने रखने लगी है। भाजपा और जेडीयू दोनों की ओर से ही इस बात का ध्यान रखा गया है।
जैसे बीजेपी कोटे से मुजफ्फरपुर के सांसद राज भूषण चौधरी निषाद को शामिल किया गया है तो जेडीयू ने पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश के सबसे बड़े अति-पिछड़े चेहरे कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर को जगह दिलाई है, जो कि राज्यसभा के सांसद हैं।
एनडीए ने पलट दिया इंडिया ब्लॉक का गेम!
निषाद की एंट्री बहुत ही दूर की रणनीति मानी जा रही है। क्योंकि वे जिस मल्लाह समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं, उस वोट बैंक की उम्मीद में मुकेश सहनी विकासशील इंसान पार्टी (VIP) चला रहे हैं। राज भूषण पिछली बार इसी सीट से वीआईपी के प्रत्याशी थे। तब इस सीट से भाजपा के टिकट पर अजय निषाद लोकसभा पहुंचे थे।
इस बार जब बीजेपी ने अजय निषाद का टिकट काट लिया तो वे कांग्रेस में चले गए, जो आरजेडी गठबंधन में वीआईपी की सहयोगी है। सहनी के दम पर राजद और कांग्रेस ने भी केवट और मल्लाह जातियों के वोट जुटाने की कोशिश की थी। लेकिन, फिर भी भाजपा उम्मीदवार की जीत ने एनडीए का हौसला बुलंद करने का काम किया है।
भूमिहारों का दबदबा कायम
इसी तरह से बिहार की राजनीति में सवर्णों में भूमिहार जाति का काफी दबदबा रहा है। जेडीयू से नीतीश कुमार के करीबी राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को कैबिनेट में जगह मिली है तो बिहार में भाजपा के बड़े भूमिहार चेहरे और देश में कट्टर हिंदुत्व के अगुवा गिरिराज सिंह को फिर से मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है।
भाजपा के यादव चेहरे को फिर से मिला मौका
बिहार में आरजेडी की पूरी राजनीति यादव और मुस्लिम वोट पर टिकी रहती है। लेकिन, भाजपा सरकार में जिस एक ओबीसी चेहरे को मौका मिला है, उसमें उजियारपुर से सांसद नित्यानंद राय शामिल हैं, जो यादव हैं। पिछली सरकार में भी वे गृहराज्य मंत्री थे और उनके लिए वोट मांगने खुद तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह ने उनके चुनाव क्षेत्र में सभा की थी।
राजपूत समाज से कोई मंत्री नहीं, एक ब्राह्मण चेहरा शामिल
भाजपा के राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र दुबे को भी मौका दिया गया है, जो उत्तर बिहार के प्रभावी ब्राह्मण चेहरे माने जाते हैं। लेकिन, बिहार के मंत्रियों की लिस्ट में किसी राजपूत नेता का नाम शामिल नहीं है। माना जा रहा है कि इस बार के चुनाव में राजपूतों ने देश के कई हिस्सों में बीजेपी से नाराजगी दिखाई है। वैसे बिहार में सारण सीट से लालू यादव की बेटी को हराने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी भी इसी समाज से आते हैं।












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