Patna NEET Student: '2 घंटे तक नोंचते रहे दरिंदे, गर्दन-छाती समेत बदन पर 12 जगह घाव', पोस्टमॉर्टम में खुलासे
Patna NEET Student Gangrape Case : पटना में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा के साथ रेप और उसकी मौत के मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। मौत को पहले सुसाइड बताने वाली पुलिस अब रेप की बात मान चुकी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि छात्रा ने करीब डेढ़ से दो घंटे तक हमलावरों से संघर्ष किया। उसके शरीर पर गर्दन, कंधे, छाती और अन्य हिस्सों पर नाखूनों से नोंचे जाने के गहरे घाव मिले हैं।
प्राइवेट पार्ट में गंभीर चोटें और ब्लीडिंग से आशंका है कि हमलावर एक से ज्यादा हो सकते हैं। परिवार शुरुआत से रेप का आरोप लगा रहा था, लेकिन पुलिस ने मौत के चार दिन बाद रिपोर्ट आने पर ही इसे स्वीकार किया। इस मामले में अब हाई-लेवल SIT जांच कर रही है, लेकिन लापरवाही के आरोपों से पुलिस घिरी हुई है।

Patna NEET Student Gangrape Case: सुसाइड से रेप तक
11 जनवरी 2026 को पटना के एक हॉस्टल में रहने वाली NEET छात्रा की संदिग्ध मौत हुई। शुरुआत में पुलिस ने इसे सुसाइड करार दिया और यौन शोषण से इनकार किया। छात्रा 5 जनवरी को हॉस्टल आई थी और मौत से पहले उसकी तबीयत बिगड़ी बताई गई। परिवार ने तुरंत रेप का आरोप लगाया, लेकिन पुलिस नहीं मानी।
13 जनवरी को परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग में प्रदर्शन किया, जहां पुलिस ने डंडे चलाकर उन्हें भगाया। मौत के चार दिन बाद पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) के मेडिकल बोर्ड की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आई, जिसमें यौन हिंसा की पुष्टि हुई। रिपोर्ट को आगे की जांच के लिए AIIMS दिल्ली भेजा गया है। परिवार का कहना है कि छात्रा को न्याय मिलना चाहिए और पुलिस की लापरवाही पर कार्रवाई हो।
Patna NEET Student Postmortem Report: संघर्ष और हिंसा की दर्दनाक कहानी
PMCH में गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट ने घटना की भयावह तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, छात्रा के शरीर पर मौत से पहले लगीं ताजा चोटें हैं, जो रेप के दौरान संघर्ष का सबूत हैं। गर्दन और कंधे पर Crescentic Nail Abrasions यानी नाखून से गहरे घाव मिले, जो हमलावर की पकड़ से बचने की कोशिश में लगे।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे निशान पीड़िता के विरोध का संकेत हैं। छाती और कंधे के नीचे Multiple Scratch Marks यानी कई खरोंच के निशान हैं, जो फैले हुए हैं। ये चोटें बताती हैं कि छात्रा को लंबे समय तक दबाया या रगड़ा गया। पीठ पर bruises यानी नीले निशान मिले, जो कठोर सतह से रगड़ने से लगे।
रिपोर्ट का सबसे अहम हिस्सा जननांग की जांच है। प्राइवेट पार्ट में ताजा चोटें, गहरी निशान और ब्लीडिंग पाई गई। मेडिकल ओपिनियन में साफ कहा गया है कि ये जबरदस्ती के कारण हैं, न कि सहमति से बने संबंध के। शरीर पर कुल 12 जगह खरोंच और नोंचने के घाव हैं, जो डेढ़ से दो घंटे तक चले संघर्ष की गवाही देते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि छात्रा बेहोश नहीं थी, बल्कि लगातार विरोध कर रही थी। मौत का अंतिम कारण अभी स्पष्ट नहीं है, इसके लिए विसरा सुरक्षित रखा गया है। रिपोर्ट में यौन हिंसा की पुष्टि की गई है, जो पुलिस की शुरुआती थ्योरी को झुठलाती है।
Patna NEET Student Rape Police Theory Vs Postmortem Facts: पुलिस की थ्योरी बनाम पोस्टमॉर्टम फैक्ट: सच्चाई की दो तस्वीरें
पुलिस की शुरुआती जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में साफ विरोधाभास है। पुलिस ने कहा कि छात्रा डिप्रेशन में थी, मोबाइल सर्च हिस्ट्री और नींद की दवाओं के आधार पर। लेकिन रिपोर्ट में संघर्ष के दर्जनों निशान हैं, जो यौन हिंसा की ओर इशारा करते हैं। पुलिस ने यौन शोषण से इनकार किया, लेकिन रिपोर्ट में प्राइवेट पार्ट में चोट और ब्लीडिंग की पुष्टि हुई।
पुलिस ने कहा कि छात्रा बेहोश मिली और बाहरी हिंसा नहीं थी, जबकि रिपोर्ट बताती है कि चोटें मौत से पहले लगीं और छात्रा विरोध कर रही थी। पुलिस की थ्योरी अचानक बिगड़ी हालत की थी, लेकिन रिपोर्ट में लंबे समय की हिंसा और रेप के सबूत हैं। ये अंतर पुलिस की जांच पर सवाल खड़े करते हैं।
उठते सवाल: पुलिस किसे बचाने के चक्कर में है?
इस मामले में पुलिस की भूमिका पर कई सवाल हैं। परिवार का आरोप है कि हॉस्टल संचालक ने FIR के बाद पैसे देकर डील की पेशकश की। अगर मामला साफ था तो समझौते की जरूरत क्यों? क्या यह किसी बड़े खुलासे को रोकने की कोशिश थी? परिवार का दावा है कि तीन संदिग्धों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। क्या यह सबूतों के अभाव में हुआ या किसी दबाव से?
अगर शुरुआती मेडिकल संकेत गंभीर थे तो क्लीन चिट देने का आधार क्या? परिवार आशंका जता रहा है कि घटना में छात्रा का कोई जानने वाला शामिल हो सकता है। क्या पुलिस ने कॉल डिटेल, हॉस्टल एंट्री-एग्जिट और जान-पहचान की जांच की? तीन दिन तक घटनास्थल पर पुलिस नहीं पहुंची, जो लापरवाही दिखाती है।
जांच की स्थिति: SIT गठित, FSL और मोबाइल जांच जारी
पटना SSP कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर जांच चल रही है। FSL टीम ने सैंपल लिए हैं, उनकी जांच बाकी है। छात्रा का मोबाइल फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि डिलीट वीडियो रिकवर हो सकें। 5 जनवरी से मौत तक का CCTV फुटेज लिया गया है। ASP सदर अभिनव की अगुवाई में SIT गठित की गई है। DGP विनय कुमार ने जोनल IG जितेंद्र राणा के नेतृत्व में हाई-लेवल SIT बनाई है, जिसमें ASP अभिनव, SDPO डॉक्टर अनु, SDPO साकेत कुमार, थानेदार ऋतुराज सिंह, जनमेजय राय और एक महिला अधिकारी समेत सात सदस्य हैं। SHO पत्रकारनगर रौशनी कुमारी को जांच से दूर रखा गया है।












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