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10 साल बाद सोशल मीडिया के जरिए बेटे से मिली मां, स्टेशन पर रहकर मांगती थी भीख

पटना। मानसिक रूप से बीमार होने के कारण अपने परिवार से बिछड़कर तमिलनाडु से एक बुजुर्ग महिला बिहार के भागलपुर में पहुंची। जिसके बाद पिछले 10 साल से वह भागलपुर से सुल्तानगंज स्टेशन पर बैठकर हर आने-जाने वाली ट्रेन से अपने बेटे के आने का इंतजार करती रही। बेटे के इंतजार में देखते-देखते महीने साल गुजर गए लेकिन अचानक कल अपने 22 वर्षीय बेटे इरफान को स्टेशन पर देख मां की आंख में खुशी के आंसू आ गए। दोनों की जुबान से आवाज नहीं निकल रही थी पर आंखें बता रहा था कि वे कितनी बेसब्री से एक-दूसरे का इंतजार कर रहे थे। 10 मिनट तक एक दूसरे के गले लगने के बाद बेटे ने तमिल में अपनी मां से कुछ कहा जिसके बाद मां ने भी उसे तमिल में ही कुछ जवाब दिया और फिर दोनों काफी खुश होते हुए एक दूसरे को खाना खिलाने लगे।

मानसिक स्थिति नहीं थी ठीक

मानसिक स्थिति नहीं थी ठीक

बुजुर्ग महिला हुसैन बेगम के 22 वर्षीय बेटा इरफान ने बताया कि हमारी मां की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। घर से निकलने के बाद पहले वह मुंबई के बोरीवली अंधेरी जैसे इलाके में रहीं फिर ट्रेन पर सवार होकर बिहार के भागलपुर चली आई। बात आज से 10 साल पहले की है जब हमारी मां ने गांव वालों पर पत्थर फेंक दिया था जिससे कुछ लोग गंभीर रुप से घायल हो गए थे जिसके बाद गांव वालों ने काफी भला बुरा कहा और इसी को लेकर हमारी मां घर छोड़ कर निकल गईं। इसके बाद हम लोगों ने काफी खोजा पर उसका कहीं कोई पता नहीं चला।

 जब छोड़कर गई थी मां तब 12 साल का था इरफान

जब छोड़कर गई थी मां तब 12 साल का था इरफान

इरफान के मुताबिक पिछले हफ्ते एक पुलिस वाले ने हमारे मां के बारे में बताया और हम उनसे मिलने भागलपुर से सुल्तानगंज स्टेशन पहुंचे। जब मां घर छोड़कर गई थी तभी हम 12 वर्ष के थे तो हमारी बहन 14 साल की थी। किसी तरह आसपास के लोगों की मदद से हम लोगों का भोजन पानी चला और अब हमारी बहन की शादी भी हो चुकी है। बहन की शादी के बाद एक होटल में वेटर का काम कर रहे इरफान ने बताया कि गांव में हमारा एक झोपड़ी वाला घर भी है लेकिन अब हमारी मां हमें मिल गई है तो ऐसा लगता है कि एक बार फिर वही पुरानी दिन लौट आए हैं। बेटे के मिलने पर मां हुसैन बेगम ने अपने हाथों से उसे खाना खिलाया।

NGO वालों वीडियो बनाकर डाला था सोशल मीडिया पर

NGO वालों वीडियो बनाकर डाला था सोशल मीडिया पर

वहीं इरफान का कहना है कि हमारी अधूरी जिंदगी में संकल्प ह्यूमन वेलफेयर सोसाइटी वालों का काफी योगदान रहा क्योंकि जब वो लोग सुल्तानगंज स्टेशन पर गरीबों को कंबल बांट रहे थे उसी समय उन्हें हुसैन बेगम के बारे में पता चला। क्योंकि कंबल बांटने के दौरान उन लोगों ने वीडियो रिकॉर्डिंग की ओर से सोशल मीडिया पर डाला था जिसे एक पुलिस वाले ने देखा और हमें अपनी मां के बारे में बताया। फिर हम लोग सुल्तानगंज स्टेशन पहुंचे और अपनी मां को आज ले जा रहे हैं।

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