Bihar Chunav 2025: परबत्ता सीट पर JDU विधायक का RJD में जाना NDA के लिए संकट, BJP-LJPR आमने-सामने
Bihar Chunav 2025: परबत्ता के जदयू विधायक डॉ. संजीव कुमार का राजद में शामिल होना सिर्फ एक दल-बदल नहीं, बल्कि खगड़िया की राजनीति में गहरे प्रभाव वाला घटनाक्रम है। डॉ. संजीव कुमार न सिर्फ अपने क्षेत्र में विकास कार्यों और सवर्ण समाज के बड़े चेहरे के रूप में पहचान रखते हैं, बल्कि उनके परिवार की राजनीतिक विरासत भी परबत्ता और आसपास की राजनीति को प्रभावित करती रही है।
डॉ. संजीव कुमार के पिता आरएन सिंह पांच बार विधायक और मंत्री रहे, जबकि भाई राजीव कुमार विधान परिषद में सक्रिय हैं। ऐसे में उनका राजद में जाना एनडीए के लिए झटका है।

जदयू को सीधा नुकसान
जदयू ने लंबे समय से परबत्ता को अपने मजबूत गढ़ के रूप में देखा था। डॉ. संजीव कुमार की नाराज़गी और अंततः प्रस्थान पार्टी नेतृत्व की समन्वय विफलता का संकेत है। एक ऐसे समय में जब जदयू को अपने पारंपरिक वोटरों को बचाए रखने की चुनौती है, सवर्ण वोट बैंक पर चोट और भी खतरनाक साबित हो सकती है।
भाजपा की संभावनाएं
डॉ. संजीव के राजद में जाने से एनडीए खेमे में सीट शेयरिंग को लेकर असमंजस है। खगड़िया में भाजपा के पास कोई सीट नहीं है, इसलिए परबत्ता उसके खाते में जाने की संभावना प्रबल है। सम्राट चौधरी की दावेदारी की चर्चाएं हों या मनोज सिन्हा के पुत्र अभिनव सिन्हा का नाम-भाजपा अब इस सीट पर नई रणनीति बना सकती है। परंतु यह भी सच है कि यहां भाजपा का आधार कमजोर रहा है, जिसे जदयू की मदद से ही साधा जाता था।
लोजपा-आर का दावा
चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोजपा (रा) भी इस सीट पर नजर गड़ाए है। खगड़िया सांसद राजेश वर्मा और उनके प्रतिनिधियों की सक्रियता बताती है कि परबत्ता को लेकर अंदरखाने खींचतान बढ़ेगी। अगर भाजपा यह सीट लोजपा को देती है तो स्थानीय समीकरण बदल सकते हैं।
राजद को बड़ा फायदा
डॉ. संजीव कुमार के आने से राजद न केवल परबत्ता में मजबूत होगी, बल्कि खगड़िया, भागलपुर और बेगूसराय में भी सवर्ण वोटरों को साधने का प्रयास करेगी। राजद के लिए यह अवसर है कि वह सामाजिक समीकरण का दायरा बढ़ाकर यह संदेश दे कि अब वह सिर्फ पिछड़े-दलितों की पार्टी नहीं, बल्कि सवर्णों को भी प्रतिनिधित्व देने को तैयार है।
खगड़िया में राजद मजबूत!
डॉ. संजीव कुमार का राजद में जाना जदयू के लिए नुकसानदेह और राजद के लिए लाभकारी है। भाजपा और लोजपा-रा के लिए यह मौका भी है और चुनौती भी। यदि एनडीए ने इस सीट पर सही चेहरे और ठोस रणनीति नहीं उतारी तो परबत्ता से लेकर पूरे खगड़िया में राजद को मजबूत होने से रोकना मुश्किल होगा।












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