Pappu Yadav लालू की बेटी से शादी करना चाहते थे, फिर सिख कुड़ी को दे बैठे दिल, महिला नेताओं पर दिया गंदा बयान
Pappu Yadav Love Story: बिहार के बाहुबली सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर चर्चा में हैं। "नेताओं के बेड से 90 फासदी महिलाओं का राजनीतिक करियर शुरू होता है", ये बयान देकर पूर्णिया से निर्दलीय विधायक पप्पू यादव ने अपने लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर ली है। बिहार महिला आयोग ने पप्पू यादव को नोटिस भेजा है जिसके बाद उनकी सांसदी पर तलवार लटक रही है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि महिला नेताओं के लिए इतनी ओछी बात करने वाले पप्पू यादव वो ही बाहुबली नेता हैं, जो कभी बिहार के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार की बेटी से शादी करना चाहते थे। इतना ही नहीं पप्पू यादव ने जिस महिला के प्यार को पाने के लिए कभी अपनी जान की बाजी लगा दी और जीवनसंगिनी बनाया वो महिला भी दिग्गज राजनेता ही है। आइए जानते हैं पप्पू यादव की अनूठी लव स्टोरी की पूरी कहानी...

लालू यादव की बेटी से शादी करना चाहते थे पप्पू यादव
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नब्बे के दशक के पप्पू यादव सीमांचल में एक दबंग और बाहुबली नेता के तौर पर अपनी पहचान बना रहे थे। 1990 में वह सिंघेश्वर से विधायक बने और 1991 में पूर्णिया से सांसद चुने गए। इस समय लालू प्रसाद यादव से उनके बेहद करीबी रिश्ते थे और घर आना जाना था।इस दौरान पप्पू यादव लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा यादव को पसंद करने लगे और बेबाकी से सीधे लालू यादव से उनकी बेटी का हाथ मांग लिया।

लेकिन लाल यादव ने इनकार कर दिया और उनके साथ सारे रिश्ते भी खत्म कर दिए। बाद में मीसा भारती की शादी इंजीनियर शैलेश कुमार से हुई। याद रहे मीसा भारती राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की नेता हैं और राज्यसभा सांसद भी रहीं।
Pappu Yadav Love Story: फिर सिख कुड़ी को दिल दे बैठे पप्पू यादव
1991 में आरक्षण विरोधी आंदोलन के दौरान पप्पू यादव जेल पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात विक्की नाम के एक युवक से हुई। विक्की के जरिए ही उन्होंने पहली बार उसकी बहन रंजीत की तस्वीर देखी और उसी पल उन्हें पसंद कर बैठे। जेल में रहते हुए पप्पू फोन के जरिए रंजीत से जुड़ने की कोशिश करने लगे-शुरुआत ब्लैंक कॉल से हुई, जो धीरे-धीरे बातचीत में बदल गई। करीब साढ़े तीन महीने तक यह सिलसिला चला, लेकिन रंजीत का दिल नहीं पिघला।

पप्पू यादव ने खा ली थी ढेर सारी नींंद की गोलियां
जेल से बाहर आने के बाद पप्पू यादव ने रंजीत को पहली बार टेनिस खेलते देखा और पूरी तरह उनसे प्रभावित हो गए। वहीं रंजीत उन्हें सिर्फ एक दबंग नेता के रूप में जानती थीं और उनके प्रति कोई आकर्षण नहीं रखती थीं। पप्पू अक्सर उन्हें देखने जाते, फोन करने के बहाने ढूंढते और लगातार कोशिश करते रहे, जबकि रंजीत इस सबसे असहज थीं। जब उन्होंने साफ मना कर दिया, तब भी पप्पू पीछे नहीं हटे-यहां तक कि भावावेश में उन्होंने नींद की गोलियां खा लीं, जिसके बाद रंजीत का नजरिया थोड़ा बदला।

धर्म, परिवार बना पप्पू यादव के प्यार में दीवार
रंजीत के मान जाने के बाद भी सबसे बड़ी बाधा दोनों के अलग-अलग धर्म और परिवार की असहमति थी। रंजीत के पिता ने शर्त रखी कि शादी के लिए पप्पू को सिख धर्म अपनाना होगा, और उनकी मां चाहती थीं कि बेटी बिहार से दूर रहे। पप्पू ने सभी शर्तें मान लीं, लेकिन फिर भी परिवार नहीं माना। अंततः कई प्रयासों और एक प्रभावशाली हस्ती की मध्यस्थता के बाद दोनों परिवार तैयार हुए। रंजीत ने खुद पप्पू को धर्म बदलने से रोका और तय हुआ कि दोनों अपने-अपने धर्म का सम्मान करेंगे।
फिल्मी अंदाज में हुई शादी
6 फरवरी 1994 को दोनों की शादी पूरे धूमधाम से पूर्णिया में हुई, जिसमें बड़े राजनीतिक चेहरे भी शामिल हुए। शादी के बाद रंजीत ने भी राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे एक मजबूत नेता के रूप में उभरीं। पप्पू यादव भी अपने राजनीतिक सफर में उतार-चढ़ाव से गुजरते रहे, यहां तक कि जेल भी गए और बाद में बरी हुए। तीन दशक से ज्यादा लंबे इस रिश्ते के बाद दोनों बीते दो साल से अलग रह रहे हैं लेकिन उनकी यह प्रेम कहानी आज भी अपने अनोखे और फिल्मी अंदाज के लिए याद की जाती है।












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