विपक्ष की बैठक से पहले 'अपनों' ने ही क्यों उठाया नीतीश कुमार के नेतृत्व पर सवाल?
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 23 जून को पटना में अपनी अगुवाई में होने वाली विपक्षी दलों की बैठक की तैयारियों में जुटे हैं। लेकिन, ठीक उसी दौरान खुद उनके गठबंधन में ही उथल-पुथल मच गई है।
पहले हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा नेता ने नीतीश सरकार से किनारा किया और अब प्रदेश में उनकी सरकार में प्रमुख सहयोगी कांग्रेस के एक मुखर प्रवक्ता ने उनपर गंभीर आरोप लगाते हुए उस पार्टी को बाय-बाय कह दिया, जिसके लिए वह 18 साल की उम्र से ही संघर्ष कर रहे थे।

सहयोगियों ने उठाए नीतीश के नेतृत्व पर सवाल
बीजेपी और पीएम मोदी की सरकार के खिलाफ 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए रणनीतियां बनाने के लिए विपक्षी दलों के नेताओं को पटना बुलाने वाले नीतीश के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक प्रश्नचिन्ह यह खड़ा हुआ है कि 'हम' के नेता जीतनराम मांझी और कांग्रेस छोड़ने वाले प्रवक्ता कुंतल कृष्णा दोनों ने उन्हीं के नेतृत्व को चुनौती दी है।
23 जून को विपक्ष की बैठक की अध्यक्षता को लेकर सवाल
कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले उसके तेज-तर्रार प्रवक्ता ने तो नीतीश के विपक्षी दलों की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करने पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। कुंतल कृष्णा ने टीओआई से कहा है, 'नीतीश कांग्रेस के कट्टर विरोधी हुआ करते थे और अब वह खुद को विपक्षी दलों के नेता के तौर पर थोप रहे हैं। एक व्यक्ति जिसका मुश्किल से संसद में कोई सामर्थ्य है, वह 23 जून को होने वाली गैर-बीजेपी दलों की बैठक की अध्यक्षता करने वाला है।'
कांग्रेस के खिलाफ बड़ी साजिश- कुंतल कृष्णा
उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखे पत्र में कांग्रेस में नीतीश के दखल को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 'देश में राजनीति की सिर्फ दो धुरी है। एक धुरी सत्ता के साथ है। दूसरी धुरी के केंद्र में कांग्रेस है। कांग्रेस के इस केंद्र के लिए कोई षड़यंत्र करके खुद को नेता स्थापित करने की कोशिश करता है; और वैसा व्यक्ति जिसने जिंदगी भर कांग्रेस का विरोध किया तो मेरे जैसा कार्यकर्ता इसपर भरोसा नहीं कर सकता।"
उनका दावा है कि दरअसल कांग्रेस के खिलाफ पूरे देश में षड़यंत्र किया जा रहा है। उन्होंने सीएम नीतीश पर आरोप लगाया है कि उन्होंने हमेशा कांग्रेस का विरोध किया है और आज जब खुद हाशिए पर चले गए हैं तो बिहार में 'अपनी जिम्मेदारी छोड़कर अपनी महत्वाकांक्षा निभाने में लगे हैं और सहयोगियों की पीठ में छुरा घोंप रहे हैं।' उनका आरोप है कि कांग्रेस एक पैन-इंडिया पार्टी है, लेकिन उसके खिलाफ बड़ी साजिश की जा रही है।
कांग्रेस ने नीतीश के सामने किया सरेंडर- कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता
इसी बात के लिए उन्होंने कांग्रेस पर भी नाराजगी जताई है कि 'नीतीश बिहार में हमारे नेता बन गए हैं, क्योंकि कांग्रेस ने उनके समक्ष राजनीतिक रूप से सरेंडर कर दिया है।' कुंतल कृष्णा जैसे कट्टर कांग्रेसी रहे नेता की इस भड़ास के पीछे कांग्रेस की अंदुरूनी राजनीति भी मानी जा रही है।
कांग्रेस में बढ़ा है नीतीश का दखल?
दरअसल, प्रदेश कांग्रेस का एक वर्ग मान रहा है कि आज पार्टी की आंतरिक गतिविधि में भी नीतीश कुमार की दखल बढ़ गई है। यह सवाल तब से ज्यादा उठ रहे हैं, जब से अखिलेश सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। यही बात पार्टी विधायक दल के नेता पद पर भी अजीत शर्मा की जगह शकील अहमद खान को बिठाए जाने को लेकर हो रही है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के इन फैसलों में परोक्ष तौर पर मुख्यमंत्री का प्रभाव रहा है। खासकर खान और नीतीश की मित्रता से इन दलीलों को और हवा मिल रही है।
विपक्ष की बैठक से पहले नीतीश के लिए बढ़ी चुनौती
नीतीश कुमार बिहार में महागठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। जबसे उन्होंने भाजपा का साथ छोड़ा है, तब से उनका मुख्य फोकस बिहार से ज्यादा देशभर के विपक्षी दलों को एकजुट करने पर ही रहा है। 10 महीनों की कोशिश के बाद जब उन्होंने करीब 16 विपक्षी दलों को एक मंच पर जुटाने की तैयारी कल ली है तो अपने ही राज्य में सहयोगी दलों और उसके नेताओं से ही सवाल उठने से उनके सामने बड़ी चुनौती खड़ी हुई है। खुद को विपक्ष का चेहरा के तौर पर पेश करने की उनकी कोशिशों को इससे धक्का जरूर लग रहा है।












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