Bihar Chunav 2025: अभी हुए विधानसभा चुनाव तो किस पार्टी की बनेगी सरकार? इस सर्वे ने मतदाताओं को चौंकाया
Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की तारीख़ों का ऐलान भले ही अभी बाकी हो, मगर राजनीतिक माहौल गर्म है। ताज़ा वोट वाइब (Vote Vibe) सर्वे के नतीजे सूबे की सियासत में नया मोड़ ला सकते हैं। 3 से 10 सितंबर के बीच कराए गए, इस सर्वे में कुल 5,635 मतदाताओं की राय ली गई।
करीब आधे यानी 48 प्रतिशत लोगों ने मौजूदा एनडीए सरकार के खिलाफ खुला असंतोष जताया। केवल 27.1% लोगों ने कहा कि वे नीतीश कुमार की सरकार के समर्थन में हैं, जबकि 20.6% मतदाताओं ने तटस्थ रहने का विकल्प चुना और 4.3% ने अपनी राय देने से इनकार कर दिया।

सर्वे का दायरा और प्रतिनिधित्व
यह सर्वे तब हुआ जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 'वोटर अधिकार यात्रा' राज्य में समाप्त हुई थी। इसमें पुरुषों की भागीदारी 52% और महिलाओं की 48% रही। जातिगत आधार पर 44% ओबीसी, 20% अनुसूचित जाति, 18% मुस्लिम, 16% सवर्ण और 2% अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं से बात की गई।
इसके अलावा 1% अन्य वर्ग के लोग भी शामिल थे। भूगोल के लिहाज़ से 70% ग्रामीण और 30% शहरी मतदाताओं की राय ली गई, जिससे पूरे राज्य का संतुलित प्रतिनिधित्व दिखता है।
सत्ता विरोध की स्पष्ट तस्वीर
सर्वे में सबसे अहम सवाल था-क्या आप मौजूदा एनडीए सरकार से संतुष्ट हैं या बदलाव चाहते हैं? शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में 48% मतदाताओं ने सरकार-विरोधी रुझान दिखाया।
शहरी मतदाता: 31% सरकार के पक्ष में, 17% तटस्थ।
ग्रामीण मतदाता: 25% सरकार के समर्थन में, 22% तटस्थ।
यह आंकड़ा साफ करता है कि असंतोष केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं, बल्कि शहरों में भी बराबर दिख रहा है।
पुरुष और महिलाएं एक राय
लिंग आधारित विश्लेषण में भी तस्वीर लगभग समान रही। पुरुषों और महिलाओं, दोनों में 48% ने मौजूदा सरकार को लेकर नाख़ुशी जताई। सरकार के पक्ष में 29% पुरुष और 25% महिलाएं रहीं, जबकि तटस्थता में पुरुष 20% और महिलाएं 22% रहीं। यह बताता है कि बदलाव की चाह किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है।
राजनीतिक अर्थ
सर्वे का समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यह राहुल गांधी की हालिया 'वोटर अधिकार यात्रा' के ठीक बाद किया गया, जिसमें उन्होंने और तेजस्वी यादव ने बिहार के 22 से अधिक जिलों का दौरा किया था। हालांकि सर्वे यह स्पष्ट नहीं करता कि कांग्रेस या आरजेडी को सीधा लाभ मिलेगा, लेकिन इतना साफ है कि नीतीश कुमार का "विकास पुरुष" वाला फैक्टर अब कमजोर पड़ रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि युवा, महिलाएं और ग्रामीण मतदाता अब बदलाव की ओर देख रहे हैं, और यह विपक्ष के लिए बड़ा अवसर हो सकता है। दूसरी ओर एनडीए के लिए यह संकेत है कि उन्हें चुनाव से पहले अपनी रणनीति और उम्मीदवारों पर दोबारा विचार करना होगा।
नतीजों का असर
यह सर्वे इस बात का इशारा करता है कि आगामी विधानसभा चुनाव में मुकाबला बेहद कड़ा और त्रिकोणीय हो सकता है। बीजेपी-नीतीश गठबंधन को सत्ता विरोधी लहर से निपटना होगा, जबकि महागठबंधन और नई पार्टियों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है।
कुल मिलाकर, वोट वाइब के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि बिहार की जनता इस बार बदलाव के मूड में है और चुनावी नतीजे लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक समीकरणों को उलट सकते हैं।












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