सीएम पद की कुर्बानी से नीतीश को होंगे ये चार फायदे

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पटना (बिहार)। नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्‍यमंत्री पद से बुधवार को इस्‍तीफा दे दिया। पिछले कई हफ्तों से बिहार की राजनीति में महागठबंधन टूटने की अटकलें लगाई जा रही थीं। बेटे तेजस्‍वी, बेटी मीसा समेत लालू यादव के परिवार के सभी सदस्‍यों पर भ्रष्‍टाचार के आरोप लगे।

नीतीश कुमार ने दिया सीएम पद से इस्तीफा

इसके बाद से नीतीश कुमार आरजेडी पर दबाव बना रहे थे कि वह आरोपों पर सफाई दें। नीतीश कुमार काफी समय से फूंक-फूंककर कदम रख रहे थे और बड़ी राजनीतिक सूझ-बूझ के साथ नीतीश ने इस्‍तीफे की स्क्रिप्‍ट तैयार की थी। आइए बताते हैं आपको नीतीश कुमार की इस कुर्बानी के राजनीतिक मायने आखिर हैं क्‍या...

1. सिद्धांतों से समझौता नहीं

1. सिद्धांतों से समझौता नहीं

नीतीश की छवि एक ईमानदार और सिद्धांतों पर चलने वाले नेता की रही है। पूरे करियर में भ्रष्टाचार का उन पर एक भी व्यक्तिगत दाग नहीं है। ये कुर्बानी कर वे अपनी इस छवि को राजनीतिक तौर पर और भुना पाएंगे।

2. मिस्टर क्लीन की छवि में निखार

2. मिस्टर क्लीन की छवि में निखार

नीतीश आने वाले अपने मिशन पीएम के प्लान में इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाएंगे कि उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ समझौता करने के बजाय सीएम पद की कुर्बानी देना बेहतर समझा।

3. लालू के कुनबे को कड़ा संदेश

3. लालू के कुनबे को कड़ा संदेश

नीतीश ने इस बहाने लालू यादव को भी एक कड़ा संदेश दिया है कि उनकी तरह वो सत्ता के लालची नहीं है। अगर तेजस्वी से वो इस्तीफा नहीं ले पाए तो उन्होंने खुद ही त्यागपत्र दे दिया।

4. सीएम पर की कुर्बानी देकर पीएम मैटेरियल बने

4. सीएम पर की कुर्बानी देकर पीएम मैटेरियल बने

ये सर्वमान्य है कि नीतीश कुमार ही एक ऐसे नेता हैं जो नरेंद्र मोदी का आगामी लोकसभा चुनाव में मुकाबला कर सकते हैं। ऐसे में वो इस राजनीतिक त्याग का फायदा, बहुत से ऐसे दलों को अपने पक्ष में जुटाकर करेंगे जो उनसे अब तक दूरी बनाए हुए थे।

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English summary
Nitish Kumar may get four benifits by quits as cm
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