Bihar Politics: NDA में तय हो गया ‘टिकट कॉर्मूला’, LJPR इन 20 सीटों पर दावेदारी!, अन्य घटक दलों का क्या होगा?
Bihar NDA Seat Sharing Formula: बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कमर कसते हुए सभी सीटों पर जीत दर्ज करने का लक्ष्य बना रही है। मिशन-25 में परचम लहराने के लिए एनडीए के घटक दलों के बीच एकजुटता बहुत जरूरी है।
सीट बंटवारे को लेकर चर्चा शुरू हो गई है और इस मुद्दे पर चर्चा के लिए 25 मार्च को दिल्ली में बिहार एनडीए के सांसदों की बैठक होनी है। सूत्रों की मानें तो एनडीए में सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय कर लिया है। लोकसभा चुनाव की तरह ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल (यूनाइटेड) (जेडीयू) बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगे।

एनडीए सीट बंटवारे की रणनीति: चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (र) को 15 से 20 सीटें मिलने की उम्मीद है। एलजेपी (र) ने पहले ही उन संभावित निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान कर ली है जहां वह चुनाव लड़ना चाहती है। इनमें महनार, रघुनाथपुर, गोविंदगंज, गायघाट, खगड़िया, ओबरा, चेनारी, जमालपुर, ब्रह्मपुर, जगदीशपुर, महुआ, साहेबपुर कमाल, समस्तीपुर, हसनपुर, विभूतिपुर, मीनापुर, अलौली, लालगंज, दिनारा और बेलसंड शामिल हैं।
अन्य दलों का क्या होगा: एलजेपी (र) की मांगों को पूरा करने के बाद जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) के लिए भी समायोजन किया जाएगा। मांझी ने पहले ही 20 सीटों के लिए अपना दावा पेश कर दिया है और अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे अपने मंत्री पद से इस्तीफा देने की धमकी भी दे चुके हैं।
एनडीए के भीतर चुनौतियाँ: एनडीए में फिलहाल पांच पार्टियां शामिल हैं, बीजेपी, जेडीयू, जीतन राम मांझी की पार्टी हम, चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (र) और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी। पशुपति पारस की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (आरएलजेपी) अनौपचारिक रूप से गठबंधन में बनी हुई है क्योंकि वे औपचारिक रूप से बाहर नहीं निकली हैं और न ही उन्हें एनडीए ने बाहर रखा है।
VIP भी बन सकती है NDA का हिस्सा: मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के एनडीए में फिर से शामिल होने की भी चर्चा है। गठबंधन का लक्ष्य 2015 के सीट बंटवारे के फॉर्मूले को संदर्भ बिंदु के रूप में इस्तेमाल करके लोकसभा चुनावों के दौरान की गई पिछली गलतियों से बचना है।
दिल्ली में तय होगी रणनीति: दिल्ली में होने वाली आगामी बैठक में संभवत, इन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी और गठबंधन के भीतर एकता को मजबूत करने का लक्ष्य रखा जाएगा। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सभी दलों के बीच एकजुटता बनाए रखना उनके महत्वाकांक्षी चुनावी लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी होगा।












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