Munni Rajak: लालू ने कपड़े धोने वाली महिला को MLC के लिए क्यों चुना ? इनकी संपत्ति भी जानिए
पटना, 15 जून: बिहार विधान परिषद के लिए सोमवार को सभी सात उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए। इनमें आरजेडी की मुन्नी देवी रजक भी शामिल हैं। मुन्नी देवी दलित हैं और वह कपड़े धोने का काम करती हैं। इनके अलावा राजद के दो और सदस्य अशोक कुमार पांडे और कारी सुहैल, जेडीयू के रवींद्र प्रसाद सिंह और अफाक अहमद खान. बीजेपी के हरि सहनी और अनिल शर्मा भी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं। इन सभी विधान पार्षदों ने अपने दलों में निचले पायदान से राजनीति शुरू की है और उच्च सदन तक पहुंचे हैं। लेकिन, मुन्नी देवी का एमएलसी बनना चर्चा का विषय बना हुआ है। आइए जानते हैं कि लालू यादव ने उन्हें विधान परिषद में भेजने का फैसला क्यों किया और आरजेडी की इस 'गरीब' नेता के पास कुल कितनी संपत्ति है।

मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा- मुन्नी देवी रजक
सोमवार को 40 वर्ष से कुछ ज्यादा उम्र की दलित महिला मुन्नी देवी रजक बिहार विधान परिषद की सदस्य घोषित की गईं हैं। वो जाति और पेश से धोबी (कपड़े धोने का काम करने वाली) हैं। अब वो 75 सदस्यीय विधान परिषद में मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल की ओर से जनता की आवाज बनेंगी। खुद मुन्नी देवी की मानें तो उन्हें अभी भी यकीन नहीं हो पा रहा है कि वह अब विधायक बन चुकी हैं। उन्होंने दिप्रिंट से बातचीत में कहा है, 'मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि मैं विधायक बन गई हूं। मई के अंतिम हफ्ते में हमारी पार्टी के नेता मुझे खोजते हुए बख्तियारपुर में मेरे घर तक आए थे कि साहब (राजद सुप्रीमो लालू यादव) मुझे खोज रहे थे।'

लालू-राबड़ी मेरे माता-पिता जैसे- मुन्नी रजक
मुन्नी देवी ने बिहार के ऊपरी सदन तक पहुंचने की अपनी यात्रा के बारे में आगे बताया, 'जब मैं गई तो मुझे एक रूम में ले जाया गया जहां राबड़ी देवी, तेजु भैया (लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव) और परिवार के बाकी सदस्य मौजूद थे।' उन्होंने आगे कहा कि 'जब लालू जी ने मुझसे कहा कि उन्होंने मुझे एमएलसी बनाने का फैसला किया है, तो कुछ देर तक तो मैं कुछ बोल ही नहीं पा रही थी। लालू जी और राबड़ी देवी तो मेरे माता-पिता के जैसे हैं।' उनके मुताबिक, 'मैं पिछले 30 साल से धोबन का काम करती हूं। मैंने बाल मजदूरी की थी और मेरे माता-पिता भी धोबी थे।'

बीजेपी की नकारात्मक सोच साफ करूंगी- राजद एमएलसी
लेकिन, विधान परिषद में पहुंचने के साथ ही मुन्नी देवी अब पहले वाली धोबन नहीं रह गई हैं, वह अब माननीया बन चुकी हैं और उन्हें इस बात का पूरा अंदाजा है। तीन बच्चों की मां और राजद की नवनिर्वाचित एमएलसी का कहना है कि वह सदन में बेरोजगारी और महंगाई जैसे जनता से जुड़े मुद्दों पर सवाल करेंगी। उन्होंने कहा, 'मैं जाति और पेशे से धोबी हूं। मैं सदन के अंदर बीजेपी की नकारात्मक सोच को साफ करूंगी।' (पहली तीनों तस्वीर सौजन्य ट्विटर: @Womencell_RJD)

16 फीसदी दलित वोट पर नजर
बिहार में धोबी अनुसूचित जाति में आते हैं। राज्य में करीब 22 जातियां एससी में शामिल हैं और चुनावी गणित की बात करें तो इनके मतदाताओं की संख्या लगभग 16% है। मुन्नी देवी एक दशक से ज्यादा वक्त से लालू यादव की पार्टी की सक्रिय सदस्य हैं। आरजेडी के एक और एमएलसी सुनील सिंह के मुताबिक मुन्नी देवी को विधान परिषद में भेजकर लालू ने यह संदेश दिया है कि वह अभी भी आम जनता के साथ हैं। उनके मुताबिक, 'पिछले 15 वर्षों से पार्टी के सभी धरना और प्रदर्शन में वह शामिल रही हैं। 20 मई को जब सीबीआई ने लालूजी के आवास पर छापा मारा तो वह 10 सर्कुलर रोड (राबड़ी देवी के सरकारी आवास) के बाहर धरने पर थीं।'

लालू ने कपड़े धोने वाली महिला को एमएलसी के लिए क्यों चुना ?
पार्टी सूत्रों का कहना है कि मुन्नी देवी पहली बार तब लालू की नजर में आईं, जब वो बख्तियारपुर में राजद के समर्थन और एनडीए सरकार के विरोध में मंच से एक गाना गा रही थीं। एक आरजेडी नेता ने बताया कि 'लेकिन, झारखंड के लोकल चैनलों ने मुन्नी को जिस रूप में दिखाया, उसने निश्चित तौर पर लालू को यह फैसला लेने को प्रेरित किया है। जब लालू रांची में न्यायिक हिरासत में थे और राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में इलाज करा रहे थे तो वह लालूजी से मिलने रांची पहुंच गई थीं। वह लालू से मिलना चाहती थीं, लेकिन अधिकारियों ने उनकी एंट्री रोक दी। वह हल्ला कर रही थीं और अपनी छाती पीट रही थीं और चिल्ला कर कह रही थीं की लालूजी को फंसाया गया है।'

मुन्नी देवी के पास कितनी संपत्ति है ?
वैसे भाजपा ने मुन्नी देवी के चुनाव का तो स्वागत किया है, लेकिन दावा किया है कि एमएलसी के रूप में उन्हें जो फंड मिलेगा उसका इस्तेमाल 'परिवार' करेगा। बीजेपी एमएलसी नवल किशोर यादव ने कहा है, 'हम उनके चुनाव का स्वागत करते हैं। लेकिन, सच्चाई यही है कि मुन्नी रजक सिर्फ एक चेहरा होंगी। उन्हें एमएलसी के तौर पर जो फंड आवंटित होगा, उसका इस्तेमाल परिवार की ओर से किया जाएगा।' भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि ऐसा करके राजद ने श्याम रजक को किनारे कर दिया, जो कि धोबी समाज के सबसे बड़े चेहरे हैं। वैसे चुनावी हलफनामे में मुन्नी रजक ने अपनी चल और अचल संपत्ति का जो ब्योरा दिया है, उसके मुताबिक वह भले ही कपड़े धोकर जीवन चलाती रही हों, लेकिन उनके पास 28 लाख रुपये की संपत्ति है। (ऊपर की दो तस्वीरें- यूट्यूब वीडियो से)












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