Mokama Chunav 2025: मोकामा से JDU का उम्मीदवार कौन होगा? अनंत सिंह और नीरज कुमार आमने-सामने, किसका पलड़ा भारी?

Mokama Chunav 2025 (Anant Singh vs Neeraj Kumar): बिहार की राजनीति में मोकामा विधानसभा सीट एक बार फिर सुर्खियों में है। बाहुबली छवि वाले पूर्व विधायक अनंत सिंह जेल से बाहर आने के बाद दोबारा चुनावी अखाड़े में उतरने की तैयारी कर चुके हैं। उनके इस ऐलान के बाद जदयू के भीतर खींचतान तेज हो गई है। जदयू के वरिष्ठ नेता और एमएलसी नीरज कुमार भी इस सीट से अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं।

15 सितंबर को मोकामा के मोर इलाके में होने वाले एनडीए कार्यकर्ता सम्मेलन को लेकर अनंत सिंह लगातार सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं। उन्होंने पोस्टरों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू अध्यक्ष ललन सिंह की तस्वीरें लगाकर यह साफ संदेश दिया है कि वे जदयू से टिकट की दावेदारी ठोकने के मूड में हैं।

Mokama Chunav 2025 Anant Singh vs Neeraj Kumar

जेल से बाहर आने के बाद अनंत सिंह नीतीश कुमार और ललन सिंह से मुलाकात कर चुके हैं, जिससे उनके राजनीतिक इरादों पर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

नीरज कुमार बोले- पहले JDU में शामिल तो हो अनंत सिंह

जदयू के वरिष्ठ नेता और एमएलसी नीरज कुमार ने अनंत सिंह की इस सक्रियता पर तंज कसा है। उन्होंने कहा, ''पहले जदयू में शामिल तो हों, सदस्यता लें, तभी उम्मीदवारी संभव है। बिना जन्म के लालन-पालन कैसे हो सकता है।'' नीरज कुमार ने यह तक कह दिया कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को टिकट देना पार्टी की छवि के लिए घातक हो सकता है।

JDU की दुविधा और टिकट का सवाल

मोकामा में टिकट बंटवारे को लेकर जदयू के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। अगर पार्टी अनंत सिंह को मौका देती है तो नीरज कुमार जैसे पुराने और वफादार नेताओं की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। वहीं नीरज कुमार को टिकट देने की स्थिति में अनंत सिंह के समर्थकों का विरोध झेलना तय है।

इतना तो साफ है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में मोकामा की सीट सबसे दिलचस्प मुकाबलों में से एक होगी। एक तरफ अनंत सिंह अपनी बाहुबली छवि और जनाधार पर भरोसा कर मैदान में उतर रहे हैं, तो दूसरी तरफ जदयू के भीतर से ही उनकी राह में रोड़े अटकाए जा रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि एनडीए और जदयू का अंतिम फैसला क्या होता है और मोकामा का सियासी समीकरण किस करवट बैठता है।

मोकामा का सियासी इतिहास

मोकामा सीट लंबे समय तक अनंत सिंह का गढ़ रही है। कई बार विधायक बने अनंत सिंह की पकड़ यहां काफी मजबूत रही है। हालांकि, जेल जाने के बाद यह सीट जदयू के पास चली गई। इसके बाद अनंत सिंह ने आरजेडी का दामन थामा और अपनी पत्नी नीलम देवी को चुनाव मैदान में उतारकर जीत भी दर्ज करवाई। अब खुद चुनाव लड़ने का ऐलान कर उन्होंने जदयू के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।

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