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Bihar By Election: मोकामा सीट पर ‘छोटे सरकार’ का रहेगा वर्चस्व या खिलेगा कमल का फूल ?

भारतीय जनता पार्टी के लिए बिहार में सियासी ज़मीन मज़बूत करने के लिए उपचुनाव में जीत दर्ज करना नाक की लड़ाई बन चुकी है। इसलिए भाजपा उपचुनाव में जीत दर्ज करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। वहीं ललन सिंह और उनकी पत्नी ने...

Bihar By Election: बिहार सियासी फिज़ा बदलने के साथ ही प्रदेश की सियासत ने भी करवट बदल लिया और महागठबंधन की सरकार बनी। वहीं अब बिहार की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने जा रहा है। ऐसे में मोकामा विधानसभा सीट चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इस सीट पर अनंत सिंह का क़ब्ज़ा रहा है। एके-47 और हैंड ग्रेनेड मामले में सज़ा होने के बाद उनकी सदस्यता खत्म हुई और यहां उपचुनाव हो रहे हैं। महागठबंधन की तरफ़ से अनंत सिंह के वर्चस्व को देखते हुए अनंत सिंह की पत्नी ओर नीलम देवी को टिकट दिया गया है। वहीं भाजपा की तरफ़ से ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी को टिकट दिया गया है।

मोकामा सीट पर पहली बार BJP उम्मीदवार

मोकामा सीट पर पहली बार BJP उम्मीदवार

भारतीय जनता पार्टी के लिए बिहार में सियासी ज़मीन मज़बूत करने के लिए उपचुनाव में जीत दर्ज करना नाक की लड़ाई बन चुकी है। इसलिए भाजपा उपचुनाव में जीत दर्ज करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। वहीं ललन सिंह और उनकी पत्नी ने कहा कि वह लोगो बाबहुबली नहीं हैं, जनता का प्यार और भरोसा उनके साथ है। इस बार मोकोमा की जनता पीएम मोदी के नाम पर मोकामा से कमल का फूल खिलाएगी। वहीं तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि मोकामा में पहली बार भाजपा ने उम्मीदवार उतारा है, मोकामा के मतदाताओं के मूड को देखते हुए टिकट दिया है। भाजपा उम्मीदवार की ही जीत होगी। वहीं महागठंबधन के नेताओं का कहना है कि मोकामा से किसी भी पार्टी का उम्मीदवार मैदान में हो जीत सिर्फ महागठबंधन की होगी।

मोकामा सीट पर अनंत सिंह की अच्छी पकड़

मोकामा सीट पर अनंत सिंह की अच्छी पकड़

सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ है कि मोकामा विधानसभा सीट से अनंत सिंह की पत्नी ही जीत दर्ज करेंगी, क्योंकि अनंत सिंह ने अपने क्षेत्र में रॉबिनहुड वाली छवी बनाई है। जनता के बीच उनकी पकड़ अच्छी है, यह वजह है कि अनंत सिंह मोकामा से लगातार जीत दर्ज करते आ रहे थे। अनंत सिंह के नाम पर उनकी पत्नी बहुत ही आसानी से जीत दर्ज करने जा रही हैं। 1951 में मोकामा विधानसभा सीट घोषित हुई थी, 178 विधानसभा सीट मोकामा में करीब 1.40 लाख पुरुष वोटर हैं और 1.12 लाख महिला मतदाता है। मोकामा विधानसभा सीट का ज्यादातर हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र में और वहां भूमिहार समुदाय विनिंग फैक्टर माने जाते हैं। इस विधानसभी सीट पर सभी सियासी दल भूमिहार वोट बैंक पर क़ब्ज़ा जमाने के लिए इसी जाती के प्रत्याशी को टिकट देती आई है।

भूमिहार उम्मीदवारों के जीतने का रिकॉर्ड

भूमिहार उम्मीदवारों के जीतने का रिकॉर्ड

मोकामा विधानसभा का इतिहास रहा है कि यहां किसी भी दल का प्रत्याशी जीता लेकिन वह भूमिहार समुदाय से ही रहा है। 1990 से 2000 तक दिलीप सिंह (अनंत सिंह के भाई) मोकामा से विधायक रहे। लालू प्रसाद यादव की कैबिनेट में मोकामा विधायक दिलीप सिंह मंत्री भी रहे थे। वहीं 2000 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार बाहुबली सूरजभान सिंह जेल में रहते हुए चुनावी दंगल में क़दम रखा और नीतीश कुमार के समर्थन से चुनावी बाज़ी जीत ली।

निर्दलीय भी जीत दर्ज कर चुके हैं अनंत सिंह

निर्दलीय भी जीत दर्ज कर चुके हैं अनंत सिंह

2005 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी से अनंत सिंह प्रत्याशी बने और जीत दर्ज की। वही साल 2010 के विधानसभा चुनाव में भी अनंत सिंह ने जदयू की टिकट पर चुनावी ताल ठोकते हुए जीत दर्ज की। 2015 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह का नीतीश कुमार से अनबन हो गया। इसके बाद अनंत सिंह ने निर्दलीय ताल ठोक दी और जीत भी दर्ज की। 2015 में अनंत सिंह ने जीत दर्ज करते हुए नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के नीरज कुमार को शिकश्त दी थी।

मोकामा में क्यों हो रहा उपचुनाव ?

मोकामा में क्यों हो रहा उपचुनाव ?

अनंत सिंह ने 2020 के विधानसभा चुनाव में लालू यादव की पार्टी राजद की टिकट पर चुनावी बाज़ी खेली थी। जीत दर्ज करते हुए लगातार 5 बार मोकामा सीट से विधायक बने। मोकामा विधानसभा सीट का ज्यादातर हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में है। भूमिहार सुमदाय का यहां वर्चस्व है। अनंत कुमार सिंह भी भूमिहार जाति से हैं इसलिए उन्हें चुनावी फायदा मिलता रहा है। अनंत सिंह की विधायकी समाप्त होने की वजह से यहां उपचुनाव हो रहा है। मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह पर घर में एके-47 और हैंड ग्रेनेड रखने के मामले में कार्रवाई हुई। एमपी/एमएलए कोर्ट ने दोषी करार देते हुए 10 साल की सज़ा सुनाई है। दोषी क़रार होने के साथ अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता भी ख़त्म हो गई।

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