Bihar Politics: ‘तू डाल-डाल मैं पात-पात’, महागठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं, इन बातों से मिल रहे संकेत
Bihar Politics: बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया है। एनडीए ने पुष्टि की है कि नीतीश कुमार उनके प्रचार अभियान की अगुआई करेंगे। इस बीच, महागठबंधन में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर अंदरूनी बहस चल रही है।
कांग्रेस पार्टी ने तेजस्वी यादव की उम्मीदवारी पर सवाल उठाए हैं, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) उनके नेतृत्व पर जोर दे रहा है। कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा ने कहा, "मैं कह रहा हूं कि इस बार सरकार महागठबंधन की बनेगी। अगर आरजेडी को सबसे ज़्यादा सीटें मिलती हैं तो तेजस्वी मुख्यमंत्री बनेंगे। लेकिन इसका फ़ैसला राहुल गांधी और सोनिया गांधी करेंगे।"

राजनीतिक गतिशीलता और नेतृत्व पर बहस: यह बयान नेतृत्व के फ़ैसलों को लेकर गठबंधन के भीतर अनिश्चितता को उजागर करता है। आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता मनोज झा ने कांग्रेस के रुख का जवाब देते हुए 2025 के चुनावों के लिए तेजस्वी यादव के नेतृत्व की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि बिहार के मतदाता पार्टी से जुड़े लोगों की बजाय विकास के लिए प्रतिबद्ध नेता को चुनने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
मनोज झा ने बिहार की प्रगति के लिए तेजस्वी के समर्पण पर जोर दिया और उनकी नेतृत्व क्षमता पर भरोसा जताया। वहीं जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने आरजेडी और कांग्रेस दोनों की आलोचना करते हुए कहा कि आगामी चुनावों में उन्हें बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
नीतीश और तेजस्वी की तुलना: राजीव रंजन उन्होंने नीतीश कुमार की तुलना में तेजस्वी यादव के राजनीतिक कद को कमतर आंकते हुए उन्हें अनुभवहीन बताया। रंजन ने जोर देकर कहा कि उनका मुख्य मुकाबला मौजूदा विरोधियों के बजाय पिछले चुनाव परिणामों से है।
भाजपा नेता ने भी किया तीखा प्रहार: भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने भी नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच चल रही बहस पर अपनी राय रखी। उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा कि नीतीश कुमार 2025 में भी नेतृत्व करते रहेंगे। हुसैन ने सभी को लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव को पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचाने में नीतीश कुमार की भूमिका की याद दिलाई।
शहनवाज़ हुसैन ने अजीत शर्मा के बयान पर आगे टिप्पणी करते हुए सवाल किया कि क्या आरजेडी कांग्रेस की इस स्थिति से सहमत है कि नेतृत्व के फैसले सोनिया गांधी और राहुल गांधी से प्रभावित होते हैं। उन्होंने आगामी चुनावों में सामूहिक रूप से 25 से अधिक सीटें हासिल करने की उनकी क्षमता पर संदेह व्यक्त किया।
बिहार में राजनीतिक परिदृश्य गतिशील बना हुआ है क्योंकि पार्टियां चुनावी सफलता के लिए रणनीति बना रही हैं। एनडीए नीतीश कुमार के पीछे मजबूती से खड़ी है, वहीं महागठबंधन को अपने नेतृत्व के चयन को लेकर आंतरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जैसे-जैसे चुनाव का दिन नजदीक आता जाएगा, ये बहसें तेज होती जाएंगी, जिससे बिहार की भविष्य की राजनीतिक दिशा तय होगी।
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