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Land For Job Scam: लैंड फॉर जॉब स्कैम में लालू फैमिली दोषी हुई तो क्या होगी सजा? केस-आरोप की पूरी टाइमलाइन

Land For Job Scam Case: लैंड फॉर जॉब स्कैम एक बार फिर सुर्खियों में है। 9 जनवरी कोलैंड फॉर जॉब केस में कोर्ट ने लालू परिवार समेत 41 आरोपियों पर आरोप तय कर ट्रायल का रास्ता साफ कर दिया है, जबकि 52 लोगों को बरी कर राहत दी गई है।राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज विशाल गोग्ने ने कहा कि लालू यादव और उनके परिवार ने संगठित आपराधिक नेटवर्क की तरह काम करते हुए सुनियोजित साजिश को अंजाम दिया।

इस केस में अगर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव दोषी पाए जाते हैं, तो उनके सामने लंबी कानूनी सजा का खतरा खड़ा हो सकता है। सवाल यही है कि ये लैंड फॉर जॉब स्कैम केस है, इसमें लालू फैमिली पर किन धाराओं में केस दर्ज है और उनमें कितनी सजा का प्रावधान है। आइए इसे समझते हैं।

Land For Job Scam Case

लैंड फॉर जॉब स्कैम है क्या? (What is Land For Job Scam Case)

लैंड फॉर जॉब स्कैम मामला साल 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस दौरान रेलवे में ग्रुप-D की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। ये जमीनें लालू परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम पर ली गईं। कई मामलों में जमीन बाजार भाव से बेहद कम कीमत पर या गिफ्ट के रूप में ट्रांसफर कराई गई।

सीबीआई का कहना है कि इन नौकरियों के लिए न तो कोई विज्ञापन निकाला गया और न ही सामान्य भर्ती प्रक्रिया अपनाई गई। कुछ उम्मीदवारों को तो आवेदन देने के कुछ ही दिनों के भीतर नौकरी मिल गई। बाद में वही उम्मीदवार या उनके रिश्तेदार अपनी जमीन लालू परिवार को सौंपते नजर आए।

🟡 लैंड फॉर जॉब स्कैम केस की जांच कैसे शुरू हुई?

इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहे हैं। सितंबर 2021 में CBI ने प्रारंभिक जांच शुरू की थी। मई 2023 में FIR दर्ज की गई। फिर छापेमारी, दस्तावेजों की जांच और गवाहों के बयान लिए गए। जांच में जमीन की रजिस्ट्री, नकद लेन-देन और रेलवे की नियुक्तियों का पूरा पैटर्न सामने आया। इसके बाद सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की और अब मामला अदालत में है।

🟡 लैंड फॉर जॉब स्कैम केस में किन धाराओं में केस दर्ज हुआ है?

सीबीआई ने इस केस में आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की कई गंभीर धाराएं लगाई हैं। ये धाराएं सीधे तौर पर साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़ी हैं।

आईपीसी की धाराएं

▪️120B (आपराधिक साजिश) - अगर दो या उससे ज्यादा लोग मिलकर अपराध की योजना बनाते हैं।

▪️420 (धोखाधड़ी) - किसी को धोखा देकर गलत फायदा उठाना।

▪️467 - कीमती दस्तावेज की जालसाजी।

▪️468 - धोखाधड़ी के इरादे से जालसाजी।

▪️471 - फर्जी दस्तावेज को असली बताकर इस्तेमाल करना।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988

▪️धारा 11 और 12 - अवैध लाभ लेना या दिलवाना।

▪️धारा 13 - पद का दुरुपयोग कर गलत फायदा लेना।

▪️धारा 8 और 9 - सरकारी काम के बदले रिश्वत से जुड़े प्रावधान।

🟡 इन धाराओं में कितनी सजा हो सकती है?

अब सबसे अहम सवाल, सजा कितनी होगी।

▪️IPC 120B (साजिश)
सजा उस अपराध पर निर्भर करती है जिसकी साजिश रची गई। इसमें कई साल की जेल संभव है।

▪️IPC 420 (धोखाधड़ी)
अधिकतम 7 साल की जेल और जुर्माना।

▪️IPC 467 (गंभीर जालसाजी)
यह बेहद गंभीर धारा है। इसमें आजन्म कारावास या 10 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।

▪️IPC 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी)
अधिकतम 7 साल की जेल और जुर्माना।

▪️IPC 471 (फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल)
वही सजा जो फर्जी दस्तावेज बनाने पर होती है, यानी कई साल की जेल।

▪️ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं
इनमें आमतौर पर 3 साल से 7 साल तक की जेल, जुर्माना और कुछ मामलों में संपत्ति जब्ती का प्रावधान है।

अगर कोर्ट यह मान ले कि ये सारे अपराध आपस में जुड़े हैं और एक बड़ी साजिश के तहत किए गए हैं, तो सजाएं साथ-साथ या अलग-अलग चल सकती हैं। इससे कुल सजा काफी लंबी हो सकती है।

🟡 क्या सभी को एक जैसी सजा मिलेगी?

यह पूरी तरह अदालत के फैसले पर निर्भर करता है। कोर्ट यह देखेगी कि किस आरोपी की भूमिका कितनी थी। किसने फैसला लिया, किसने फायदा उठाया और किसने सिर्फ सहयोग किया। इसी आधार पर सजा तय होगी।

अभी कोर्ट यह तय कर रही है कि किन धाराओं में औपचारिक रूप से आरोप तय होंगे। इसके बाद ट्रायल चलेगा, गवाहों की सुनवाई होगी और सबूतों की जांच होगी। दोष सिद्ध होने पर सजा तय की जाएगी।

संक्षेप में कहें तो अगर लैंड फॉर जॉब स्कैम में लालू परिवार दोषी पाया गया, तो यह मामला सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी तौर पर भी बेहद गंभीर साबित हो सकता है। इसमें लंबी जेल, भारी जुर्माना और राजनीतिक भविष्य पर गहरा असर पड़ सकता है।

🟡 Land For Job Scam Case को लेकर पूछे गए सबसे ज्यादा सवाल और उसके जवाब?

• कौन जांच कर रहा है?
इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। आरोप पूर्व रेल मंत्री और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार और अन्य लोगों पर हैं।

• मुख्य आरोप क्या है?
CBI का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच, जब लालू यादव रेल मंत्री थे, तब रेलवे में ग्रुप-D की नौकरियां जमीन के बदले दी गईं। उम्मीदवारों या उनके रिश्तेदारों से जमीन गिफ्ट में या सस्ते दामों पर ली गई।

• मामला शुरू कैसे हुआ?
सितंबर 2021 में CBI ने प्रारंभिक जांच शुरू की। मई 2023 में FIR दर्ज की गई। इसमें IPC की धारा 120B और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई गईं।

• CBI का दावा क्या है?
- बिना किसी विज्ञापन के नियुक्तियां हुईं
- आवेदन के 3 दिन के भीतर नौकरी दी गई
- बाद में इन्हें पक्का भी कर दिया गया
- जमीनें राबड़ी देवी और बेटियों मीसा भारती, हेमा यादव के नाम ली गईं
- करीब 1,05,292 वर्गफुट जमीन ली गई

• भूमिका किसकी बताई गई?
CBI के मुताबिक, लालू यादव के OSD रहे भोला यादव ने आवेदन जमा कराए और जमीन सौदों में अहम भूमिका निभाई। जुलाई 2023 में उन्हें गिरफ्तार किया गया।

• चार्जशीट में कौन-कौन?
CBI ने लालू यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, रेलवे के दो पूर्व अधिकारी, 7 उम्मीदवारों समेत 16 लोगों को चार्जशीट किया।

• कोर्ट में क्या हुआ?
फरवरी 2024 में दिल्ली कोर्ट ने सभी आरोपियों को समन जारी किया और IPC 120B, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत संज्ञान लिया।

• ED की कार्रवाई क्या है?
ED मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच कर रही है। तेजस्वी यादव के दिल्ली आवास पर भी छापेमारी हो चुकी है।

• आरोपियों का पक्ष क्या है?
लालू परिवार का कहना है कि जमीन खरीदी गई थी, कोई मुफ्त सौदा नहीं हुआ और यह पूरा मामला राजनीतिक बदले की कार्रवाई है।

🟡 Land For Job Scam Case Timeline: लैंड फॉर जॉब स्कैम टाइमलाइन

  • 2005-06: रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव पर आरोप है कि उन्होंने रांची और पुरी में स्थित IRCTC के होटलों का आवंटन कुछ कारोबारियों को किया। इसके बदले पटना की करीब 3 एकड़ की कीमती जमीन बाजार भाव से बेहद कम कीमत पर DMCL कंपनी को ट्रांसफर की गई।
  • 25 फरवरी 2005: कोच्चर की कंपनी ने करीब 1.93 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन सिर्फ 1.47 करोड़ रुपये में ट्रांसफर की। बाद में जांच एजेंसियों ने इसे सर्कुलर और अंडरवैल्यूड ट्रांजैक्शन करार दिया।
  • 2010-2014: लालू परिवार से जुड़ी बेनामी संपत्ति, जो लारा प्रोजेक्ट्स के नाम पर थी, उसे मात्र 65 लाख रुपये में बेच दिया गया, जबकि उस संपत्ति की बाजार कीमत लगभग 94 करोड़ रुपये आंकी गई।
  • 7 जुलाई 2017: CBI ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की। इसके बाद दिल्ली और पटना सहित 12 ठिकानों पर छापेमारी की गई।
  • 16 अप्रैल 2018: CBI ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ औपचारिक रूप से चार्जशीट दाखिल की।
  • अभी क्या है स्थिति: ये मामला अभी कोर्ट में है। फिलहाल लालू परिवार समेत सभी 9 आरोपी बेल पर हैं। अक्टूबर 2024 में दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी को 1-1 लाख के निजी मुचलके पर बेल दी थी। कोर्ट ने सभी को पासपोर्ट सरेंडर करने के भी निर्देश दिए थे। मामले पर अभी आरोप तय नहीं हुए हैं। दिसंबर 2025 में कोर्ट इस मामले पर आरोप तय कर सकता है।
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