अंजना ओम कश्यप को कोर्ट ने किया राहत देने से इनकार, मानहानि केस में खान सर को मिला बड़ा मौका!
Anjana Om Kashyap vs Khan Sir: टीवी टूडे ग्रुप-टीवी एंकर अंजना ओम कश्यप और चर्चित शिक्षक खान सर समेत 7 अन्य लोगों के बीच चल रहे 2 करोड़ रुपये के मानहानि विवाद की सुनवाई बुधवार, 17 जून को दिल्ली हाईकोर्ट में हुई। अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क का आरोप है कि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ मानहानिकारक टिप्पणियां, वीडियो और पोस्ट प्रसारित किए गए, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
इसी मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने फिलहाल किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने विवादित सामग्री हटाने की मांग पर भी तत्काल आदेश पारित नहीं किया और कहा कि कई प्रतिवादियों की ओर से अभी जवाब दाखिल किया जाना बाकी है। ऐसे में सभी पक्षों का पक्ष सुने बिना कोई अंतरिम आदेश देना उचित नहीं होगा। मामले की अगली सुनवाई अब 2 जुलाई को होगी।

अदालत ने क्यों नहीं दिया कोई अंतरिम आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस मधु जैन की बेंच के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि कुछ प्रतिवादियों ने अभी तक अंतरिम राहत संबंधी आवेदन पर अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। ऐसे में सभी पक्षों के जवाब और दलीलें सामने आए बिना किसी प्रकार का अंतरिम आदेश जारी करना उचित नहीं होगा।
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कोर्ट ने प्रतिवादी संख्या 1, 7, 10 और 11 को जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। मामले को अगली सुनवाई के लिए 2 जुलाई तक स्थगित कर दिया गया है।
किन लोगों के खिलाफ दायर किया गया है मुकदमा
अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क ने यह मानहानि मुकदमा खान सर के नाम से प्रसिद्ध शिक्षक फैसल खान सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ दायर किया है। मुकदमे में अभिनव शर्मा, बबीता त्यागी, अरविंद भदौरिया, मनीष यादव और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) के कुछ यूजर्स को भी प्रतिवादी बनाया गया है। वादी पक्ष का आरोप है कि इन लोगों से जुड़ी टिप्पणियों, पोस्ट और वीडियो के जरिए उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया गया।
सुनवाई के दौरान क्या दलीलें दी गईं
कुछ प्रतिवादियों की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि मामले में ऐसी कोई तत्काल स्थिति नहीं है, जिसके लिए तुरंत हस्तक्षेप की आवश्यकता हो। उनका कहना था कि सभी पक्षों के जवाब दाखिल होने के बाद ही मामले पर विस्तार से सुनवाई की जानी चाहिए। प्रतिवादियों की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि अलग-अलग लोगों द्वारा अलग-अलग मंचों पर की गई टिप्पणियां और पोस्ट हैं, इसलिए सभी को एक ही मुकदमे में शामिल करना उचित नहीं माना जा सकता। कुछ वकीलों ने यह भी कहा कि वादी पक्ष के पास अन्य कानूनी विकल्प भी उपलब्ध हैं।
अंजना ओम कश्यप की ओर से क्या कहा गया
अंजना ओम कश्यप की ओर से पेश वकील ने अदालत में कहा कि कुछ प्रतिवादियों ने उनके खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया है। उन्होंने दावा किया कि केवल पत्रकार को ही नहीं, बल्कि उनके बच्चे को भी निशाना बनाया गया। वादी पक्ष के अनुसार, सोशल मीडिया पर मौजूद कुछ सामग्री में उनके बच्चे के स्कूल का नाम तक सार्वजनिक किया गया है। वकील ने अदालत से कहा कि यदि विवादित पोस्ट और वीडियो हटाने का निर्देश दिया जाता है तो इससे किसी पक्ष को कोई नुकसान नहीं होगा। हालांकि अदालत ने फिलहाल इस मांग पर कोई आदेश जारी नहीं किया।
किन टिप्पणियों को लेकर है विवाद
याचिका में कहा गया है कि सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म पर अंजना ओम कश्यप को लेकर कई कथित मानहानिकारक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इनमें "बिकाऊ पत्रकार", "चाटुकार", "दलाली" और "फेक न्यूज की दुकान" जैसे शब्द शामिल बताए गए हैं। वादी पक्ष ने अदालत से इन टिप्पणियों और उनसे जुड़े वीडियो व पोस्ट को हटाने का निर्देश देने की मांग की है।
2 करोड़ रुपये हर्जाने की भी मांग
अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क ने अदालत से कथित मानहानिकारक सामग्री हटाने के अलावा 2 करोड़ रुपये के हर्जाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि विवादित पोस्ट और वीडियो के कारण उनकी प्रतिष्ठा और पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचा है।
पहले भी नहीं मिली थी राहत
यह पहला मौका नहीं है जब अदालत ने मामले में तत्काल राहत देने से इनकार किया हो। इससे पहले 8 जून को भी हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए किसी प्रकार का अंतरिम आदेश पारित नहीं किया था। अब सभी पक्षों के जवाब दाखिल होने के बाद 2 जुलाई को मामले की अगली सुनवाई होगी, जहां अदालत इस विवाद से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर आगे विचार करेगी।
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