Khan Sir के अस्पताल से क्यों हटवाई गई टाइल्स? वजह जान कर आप भी हो जाएंगे हैरान!

Khan Sir: टीचर्स डे पर जब पूरा देश अपने शिक्षकों को सम्मान दे रहा है, उसी समय पटना के मशहूर शिक्षक खान सर ने समाज को एक अनोखा तोहफा दिया है। लाखों छात्रों को अपनी अनोखी शैली से पढ़ाने वाले खान सर अब शिक्षा से आगे बढ़कर स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी कदम रख चुके हैं। वे एक ऐसा विशाल अस्पताल बना रहे हैं जहां इलाज का खर्च सरकारी अस्पतालों से भी कम होगा।

खास बात यह है कि यहां मरीजों को "पेशेंट" नहीं बल्कि "मेहमान" कहा जाएगा। खान सर का मानना है कि बीमार व्यक्ति को शब्दों से भी हिम्मत और आत्मविश्वास मिलना चाहिए, इसलिए उन्होंने अस्पताल का माहौल भी पूरी तरह अलग बनाने का फैसला लिया है। खान सर ने हॉस्पिटल बनने के दौरान का एक किस्सा बताया है जिसमें उनके द्वारा लगवाई गई महंगी टाइल्स को फ्लोर से हटवा दिया गया।

Khan Sir

ब्लड बैंक से लेकर कैंसर हॉस्पिटल तक सुविधाएं

इस अस्पताल में खून जांच के लिए ब्लड बैंक, डायलिसिस सेंटर और कैंसर मरीजों के लिए अलग सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। खान सर ने सोशल मीडिया पर अपने वीडियो शेयर कर अस्पताल के निर्माण की झलक दिखाई है। हाल ही में उन्होंने एक वीडियो में दर्जनों डायलिसिस मशीनें भी दिखाईं, जिससे पता चलता है कि निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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टाइल्स हटवाने पर हुए हैरान

निर्माण के दौरान एक ऐसा वाकया हुआ जिसने खान सर को भी चौंका दिया। उन्होंने ऑपरेशन थिएटर में महंगे और चमकदार मार्बल जैसे टाइल्स लगवाए थे, लेकिन निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारियों ने उन्हें तुरंत हटाने का आदेश दिया। शुरुआत में खान सर को यह बात समझ नहीं आई, लेकिन बाद में जब कारण पता चला तो वे और भी हैरान रह गए।

क्यों हटानी पड़ी टाइल्स?

दरअसल, ऑपरेशन थिएटर में टाइल्स लगाना सुरक्षित नहीं माना जाता क्योंकि टाइल्स के बीच की दरारों में बैक्टीरिया, वायरस और फंगस आसानी से छिप सकते हैं। ये सूक्ष्म जीव इतने छोटे होते हैं कि हजारों एक सरसों के दाने में समा जाते हैं। यही वजह थी कि अधिकारियों ने टाइल्स को हटाकर उनकी जगह स्पेशल मैट लगाने की सलाह दी। अब पूरे ऑपरेशन थिएटर में बिना जोड़ वाले OT मैट बिछाए गए हैं, जो मार्बल जैसे ही दिखते हैं लेकिन संक्रमण का खतरा नहीं रहने देते।

मरीज नहीं, मेहमान कहलाएंगे

खान सर ने बताया कि उनके अस्पताल में किसी बीमार को "पेशेंट" या "केस" कहकर नहीं पुकारा जाएगा। उनकी जगह उन्हें "मेहमान" कहा जाएगा। उनका मानना है कि जब कोई व्यक्ति बीमार होता है तो वह पहले से ही परेशान रहता है। ऐसे में उसे पेशेंट कहने से उसका आत्मविश्वास और गिर जाता है। इसलिए उनके अस्पताल में हर शख्स का स्वागत मेहमान की तरह किया जाएगा।
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