Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ‘K Factor’ की चर्चा, Congress के लिए नफ़ा या नुकसान
K Factor, Bihar Politics: महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में मिली हार के बाद कांग्रेस बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है। बिहार में आरजेडी के साथ गठबंधन कांग्रेस पार्टी की रणनीति रही है, लेकिन इस साझेदारी से हमेशा कामयाबी नहीं मिली है।
सुर्खियां बटोर रहे कन्हैया: लोकसभा चुनाव में आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन का प्रदर्शन उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन से भी खराब रहा। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले 'के फैक्टर' की चर्चा तेज़ हो चुकी है। बेगूसराय के युवा नेता कन्हैया कुमार इन दिनों सुर्खियां बटोर रहे हैं।

2019 में वे सीपीआई के टिकट पर बेगूसराय से लोकसभा के लिए चुनाव लड़ा था। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। इसके बाद से ही वह पार्टी की सियासी ज़मीन मज़बूत करने में जुटे हुए हैं। हाल ही में उन्होंने पार्टी का आधार मजबूत करने के लिए बिहार दौरा किया और 'पलायन रोको, रोजगार दो' का नारा बुलंद करते हुए पदयात्रा की घोषणा की।
आंतरिक संघर्ष और नेतृत्व संबंधी चिंताए: बिहार में कांग्रेस को नेतृत्व की अस्पष्टता और पुरानी शिकायतों के कारण आंतरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कृष्णा और कन्हैया (के फ़ैक्टर) ने पार्टी के भीतर बहस छेड़ दी है। कृष्णा अल्लावरु को नया प्रभारी नियुक्त किए जाने से पार्टी सदस्यों में असंतोष पैदा हो गया है।
न्हैया की प्रमुखता ने इन तनावों को और बढ़ा दिया है। उनकी पदयात्रा के समय को लेकर कांग्रेस के कुछ मुस्लिम नेताओं ने आलोचना की है। वे सवाल उठा रहे हैं कि यह रमज़ान के समय क्यों है, बहुत से मुसलमान रोज़ा रखते हैं। समय का खयाल रखना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह यात्रा बड़ी मुस्लिम आबादी वाले जिलों से होकर गुज़रेगी।
आरजेडी के साथ गठबंधन तनाव: हाल ही में हुए घटनाक्रम से कांग्रेस की सहयोगी पार्टी आरजेडी भी अनभिज्ञ नहीं रही। कन्हैया के पटना दौरे के दौरान उनके समर्थकों ने उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनाने की मांग की। यह बात आरजेडी को पसंद नहीं आई और इससे उनके गठबंधन में तनाव पैदा हो सकता है।
आरजेडी के एक वरिष्ठ नेता ने कांग्रेस पर सहयोगियों को दरकिनार करने और उनका उचित सम्मान न करने की चिंता जताई। नेता ने कहा कि दिल्ली की राजनीति अलग है, लेकिन बिहार में गठबंधनों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। कन्हैया कुमार के बिहार में सक्रिय होने पर बिहार कांग्रेस नेताओं में नाराज़गी है।
रणनीति बैठक स्थगित: बिहार कांग्रेस नेताओं का मानना है कि उन्हें अवसर नहीं देकर दरकिनार किया जा रहा है। संभावित विवादों के कारण ही दिल्ली में होने वाली रणनीति बैठक स्थगित कर दी गई। इसी क्रम में मुस्लिम वोट बैंक कांग्रेस और आरजेडी दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। दोनों पार्टी के कई नेताओं ने रमजान के दौरान पदयात्रा पर असहमति जताई है।
नेताओं का कहना है 30 मार्च के बाद तक पदयात्रा स्थगित रखें तो बेहतर होगा। ईद के बाद इसकी शुरुआत की जाए तो सियासी माइलेज ले सकते हैं। नेताओं और पार्टियों के बीच जटिल गतिशीलता के कारण बिहार की राजनीति को संभालना चुनौतीपूर्ण है। आगामी चुनावों के लिए कांग्रेस की तैयारी के दौरान आंतरिक मुद्दों और गठबंधनों को संतुलित करना बहुत ज़रूरी है।












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