Bihar Politics: ‘तेजस्वी ही...’ अब महागठबंधन के अंदर दरार!, अपनी पार्टी के ही बयान के ख़िलाफ़ हुए विधायक
Bihar Politics: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन की तैयारियों के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है। हर पार्टी अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए रणनीति बना रही है। कांग्रेस की कोशिश है कि वह एक मजबूत मोर्चा बनाए, जो राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से कमज़ोर न दिखे। इसी के चलते पार्टी नेतृत्व ने कई अहम फैसले लिए हैं।
हाल ही में गठबंधन के भीतर मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर विवाद छिड़ गया। हालांकि पहले तेजस्वी यादव को गठबंधन का चेहरा माना जा रहा था, लेकिन कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लवरु के बयान ने विवाद को और हवा दे दी है। उन्होंने सुझाव दिया कि सीएम उम्मीदवार पर फिर से विचार किया जाएगा, जिससे गठबंधन के सदस्यों में बेचैनी पैदा हो गई है।

सतह पर आंतरिक मतभेद: अल्लावरु के बयान का विरोध उनकी अपनी पार्टी के भीतर से ही सामने आया है। कांग्रेस विधायक मुन्ना तिवारी ने अपनी असहमति जताते हुए कहा, "यह पहले ही तय हो चुका है कि तेजस्वी यादव ही महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा हैं। इसमें किसी को कोई भ्रम नहीं होना चाहिए।" यह बिहार कांग्रेस के नेताओं और उनके राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच संभावित दरार का संकेत है।
इस स्थिति से यह सवाल उठता है कि क्या बिहार कांग्रेस के कई नेता अपने आलाकमान के रुख से असहज हैं। महागठबंधन नेताओं के बीच आम सहमति स्पष्ट थी: अगर वे सरकार बनाते हैं, तो तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री के तौर पर नेतृत्व करेंगे।
राष्ट्रीय नेताओं के साथ बैठक: दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी की राज्य के नेताओं के साथ बैठक हुई। बैठक के बाद कृष्णा अल्लवरु ने कहा, "हम भाजपा और उसके सहयोगियों का मिलकर सामना करेंगे।" बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि चर्चा संगठनात्मक प्रयासों और चुनाव अभियानों को मजबूत करने पर केंद्रित थी।
इन चर्चाओं के बावजूद, तेजस्वी की उम्मीदवारी पर पुनर्विचार करने के बारे में अल्लावरु की टिप्पणियों ने गठबंधन के भीतर आंतरिक संघर्ष को जन्म दिया है। कई कांग्रेस सदस्य इन असहमतियों को एकता के लिए हानिकारक मानते हैं।
आरजेडी की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं: दिलचस्प बात यह है कि अल्लावरु के बयान पर आरजेडी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह चुप्पी बिहार में सामने आ रहे राजनीतिक परिदृश्य में जटिलता की एक और परत जोड़ती है।
महागठबंधन को आगे भी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि वह भाजपा जैसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ चुनाव की तैयारी करते हुए आंतरिक कलह से निपट रहा है। इन आंतरिक बहसों के नतीजे उनकी चुनावी रणनीति और आगे की एकता को काफी प्रभावित कर सकते हैं।












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