'52 जुमा और होली 1 दिन आता है...',विवाद के बीच Holi को लेकर बड़ा अपडेट, बिहार में इस दिन होगा रंगों का त्योहार
Bihar Mein Holi Kab Hai: होली के जश्न ने अब सियासी रंग ले लिया है। 52 जुमा और 1 दिन होली आता है इस बयान ने पर नेताओं ने लफ्ज़ों की दहलीज़ को लांग दिया है। नेताओं के जुबानी जंग के बीच बिहार में होली की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति दूर हो गई है।
देश के विभिन्न राज्यों में कुछ इलाकों में होली 14 मार्च को मनाई जा रही है, तो कुछ इलाकों में 15 मार्च को। हालांकि, बिहार में होली 15 मार्च को मनाई जाएगी। यह उदया तिथि के आधार पर त्योहार मनाने की परंपरा के अनुरूप है। शिव मंदिर के पंडित अभिषेक मिश्रा के मुताबिक, बिहार में होली आमतौर पर बनारस के मुकाबले एक दिन बाद मनाई जाती है।

पंडित अभिषेक मिश्रा ने बताया कि चैत्र प्रतिपदा 14 मार्च को दोपहर 12:26 बजे से शुरू हो रही है, जिसके चलते विद्वानों ने 15 मार्च को होली मनाने का फैसला किया है। "मिथिला पंचांग के अनुसार होली 15 मार्च को ही पड़ रही है। हालांकि, काशी पंचांग बनारस में होली 14 मार्च को मनाई जा रही है।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, बिहार में होली नए साल के आगमन का प्रतीक है और यह गिले-शिकवे दूर करने वाला और प्रेम और सौहार्द बढ़ाने वाला त्योहार है।" - पंडित अभिषेक मिश्रा, पुजारी, पटना शिव मंदिर। पटना महावीर मंदिर के ज्योतिषाचार्य आचार्य मुक्ति कुमार झा ने होलिका दहन और होली उत्सव के समय के बारे में जानकारी साझा की।
ज्योतिषाचार्य आचार्य मुक्ति कुमार झा ने बताया कि होलिका दहन फाल्गुन की पूर्णिमा को होता है, जबकि होली चैत्र मास की कृष्ण पक्ष प्रतिपदा को सूर्योदय के समय के अनुसार मनाई जाती है। इस साल होलिका दहन 13 मार्च को है क्योंकि पूर्णिमा 14 मार्च की मध्यरात्रि के बाद समाप्त हो रही है।
मुक्ति कुमार झा ने आगे बताया कि उदया तिथि के कारण बिहार में होली 15 मार्च को मनाई जाएगी। यह त्यौहार नए साल की शुरुआत का प्रतीक है और इसे विभिन्न क्षेत्रों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। बिहार में कई जगहों पर लोग दो दिन के उत्सव का आनंद ले रहे हैं, 14 और 15 मार्च को दोनों दिन मनाए जा रहे हैं।
यह दोहरा उत्सव समुदायों को इस प्रिय त्योहार से जुड़े जीवंत रंगों और उल्लासपूर्ण भावना में भाग लेने का अवसर देता है। मिथिला पंचांग के अनुसार इस साल होली 15 मार्च को है। अलग-अलग क्षेत्रों में उत्सव की तिथियों में भिन्नता के बावजूद, इस त्यौहार का सार एकता और आनंद है।
होली सिर्फ़ वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक ही नहीं है, बल्कि यह लोगों के बीच प्रेम और सद्भाव की याद भी दिलाता है। जब समुदाय रंगों और संगीत के साथ जश्न मनाने के लिए एक साथ आते हैं, तो वे एकजुटता और नवीनीकरण की भावना को अपनाते हैं।
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