Sand Art Tribute To Sharda Sinha: छठ गीतों से मिली पहचान, इस पर्व में ही गई जान, अब सिर्फ यादें हैं- मधुरेंद्र
Tribute To Sharda Sinha: बिहार की कोकिला शारदा सिन्हा को लोगो ने नम आंखों से गुरुवार को आखिरी विदाई दी। राजकीय सम्मान के साथ राजधानी पटना के गुलाबी घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। छठ पर्व के गीतों से अलग पहचान रखने वाली शारदा सिन्हा का छठ पर्व के दौरान ही निधन से लोगों में काफी मायूसी है।
शारदा सिन्हा की गीतों को याद करते हुए लोग उन्हें भींगी आखों से श्रद्धांजलि दे रहे हैं। वहीं अंतर्राष्ट्रीय रेत कलाकार मधुरेंद्र ने भी अनोखे अंदाज़ में उन्हें श्रद्धांजलि दी। पटना के कंगन घाट पर रेत कलाकार मधुरेंद्र ने 'स्वर कोकिला' शारदा सिन्हा की रेत से प्रतिमा बनाई। मधुरेंद्र की अनोखे अंदाज़ में दी गई श्रद्धांजलि को लोगों ने खूब सराहा, नम आंखों से शारदा सिन्हा को याद किया।

वन इंडिया हिंदी से बात करते हुए अंतर्राष्ट्रीय कलाकार मधुरेंद्र ने कहा कि छठ के दौरान शारदा सिन्हा के निधन से कई लोग दुखी हैं। अपने छठ गीतों के लिए मशहूर शारदा सिन्हा ने इस त्योहार के दौरान अंतिम विदाई ली। छठ गीतों से ही उन्होंने स्थानीय भाषा को देशभर में एक अलग पहचान दिलाई थी।
छठ पर्व बिहार ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में आस्था के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। शारदा सिन्हा के छठ गीत आज भी हर घर में गूंजते हैं। उनके गीतों के बिना छठ का त्यौहार अधूरा लगता है। उनके निधन से बिहार के लोगों को गहरा दुख पहुंचा है, वह यहां की बेटी और बहू दोनों थीं।
अपने अंतिम क्षणों में भी शारदा सिन्हा ने संगीत नहीं छोड़ा। उनकी मृत्यु के बाद एक वीडियो सामने आया जिसमें वह अपनी कमज़ोर हालत के बावजूद गाने की कोशिश करती नज़र आईं। उनकी आवाज़ में आकर्षण बरकरार रहा, उन्होंने जो दर्द सहा, उसे भुला दिया। हालांकि वह खामोशी के कगार पर थीं, लेकिन संगीत के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ।












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