Bihar में शिक्षा के नाम पर मज़ाक!, स्कूल भवन नहीं झोपड़ी में संचालित होती है कक्षाएं, जानिए पूरा मामला
Bihar में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के सरकार लाख दावे कर ले, लेकिन हक़ीक़त कुछ और ही है। ग्रामीणों की मदद से राम भरोसे सरकारी स्कूलों को संचालन हो रहा है। पश्चिम चंपारण के हरिहर गांव के स्कूल की तस्वीर कुछ ऐसी ही है।

Bihar में शिक्षा व्यवस्था पर आए दिन सवाल उठते रहे हैं, सरकार बेहतर शिक्षा के दावे तो ज़रूर करती हे लेकिन हक़ीक़त में साके दावे खोखले हैं। पश्चिम चम्पारण जिले के चनपटिया प्रखंड में स्थित सरकारी स्कूल की व्यवस्था भी राम भरोसे ही है। प्राथमिक विद्यालय में क्लास रूम नहीं है, खुले आसामान के नीचे बच्चे शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। स्कूल को देखने के बाद आप यक़ीन नहीं कर पाएंगे कि यह विद्यालय ही है। भवन और शौचालय की बात तो दूर है, स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए मेज़ तक नहीं है। बोरी के ऊपर बैठकर छात्र पढ़ाई करते हैं।
हरिहरपुर गांव के लोगों ने मिलकर स्कूल के लिए दो झोपड़ी तैयार की है। वहीं स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि भवन निर्माण के लिए कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई ठोस क़दम नहीं उठाया जाता है। साल 2013 में गांव के वार्ड नंबर 4 में राजकीय प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की गई थी। करीब 10 साल बीत चुके हैं लेकिन स्कूल की तस्वीर नहीं बदली है। पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई सिर्फ तीन शिक्षकों के भरोसे होती है। ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल की ज़मीन पर विवाद चल रहा था, जिस पर करीब डेढ़ साल पहले सरकार ने जीत दर्ज कर ली थी।
ग्रामीणों और शिक्षकों की मदद से स्कूल की ज़मीन के एक छोटे से भाग में 12 फीट की घास फूस की दो झोपड़ी बनवाई गई। एक झोपड़ी में बच्चों के लिए दोपहर का खाना तैयार किया जाता है। दूसरी झोपड़ी में करीब 60 बच्चे बैठकर कर तालीम हासिल करते हैं। इसके अलावा बचे हुए छात्र बाहर खुले आसमान के नीचे तालीम हासिल करते हैं। स्कूल में बहलहाली का यह आलम है कि ब्लैक बोर्ड का भी शिक्षकों ने खुद ही इंतज़ाम किया है। अचानक बारिश होने पर बच्चों के साथ-साथ उनकी किताब-कॉपी भी भींग जाती है।
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