झारखंड रोपवे हादसे के बाद बिहार सरकार अलर्ट, सेफ्टी रिपोर्ट में हुआ हैरतअंगेज़ ख़ुलासा
झारखंड रोपवे हादसा के बाद बिहार सरकार भी अलर्ट मोड में आ गई है। देवघर में हुए रोपवे हादसा के बाद अब पर्यटन विभाग भी सैलानियों की सुरक्षा को लेकर अलर्ट नज़र आ रहा है।
पटना, 13 अप्रैल 2022। झारखंड रोपवे हादसा के बाद बिहार सरकार भी अलर्ट मोड में आ गई है। देवघर में हुए रोपवे हादसा के बाद अब पर्यटन विभाग भी सैलानियों की सुरक्षा को लेकर अलर्ट नज़र आ रहा है। बिहार के राजगीर को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल की संज्ञा दी जाती है और यहां दूर-दूर से सैलानी आते हैं। इन्हीं सब को देखते हुए राजगीर में पर्यटन विभाग के कर्मियों ने रोपवे का मुआयना किया। किस तरह से रोप वे संचालित हो रहा है, सैलानियों की सुरक्षा के मद्देनज़र कितनी कितनी सावधानी बरती जा रही इन सब पहलुओ का जायजा लिया।

हादसे से सैलानी के दिलों में बैठ गया है डर
राजगीर पर्यटन विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि 8 शीटर और सिंगल शीटर रोपवे को सुरक्षा के मद्देनज़र हर रोज़ चेक किया जाता है। जिसके बाद ही सैलानियों के लिए रोपवे को खोलते हैं। देवघर (झारखंड) में हुआ हादसा दुर्भाग्यपूर्ण है। चूंकि वहां हादसा हो गया है इससे यहां भी सैलानी के दिलों में डर बैठ गया है। यही वजह है कि अब सैलानियों की सुरक्षा को देखते हुए पर्यटन विभाग के सभी कर्मी अलर्ट है। हमलोग खुद आश्वस्त होने के बाद ही सैलानियों की सुरक्षा का खयाल करते हुए ही रोपवे खोलते हैं।

पर्यटन विकास निगम को भी सौंपी गई थी रिपोर्ट
झारखंड रोपवे हादसा मामले में अभी तक सही रिपोर्ट का ख़ुलासा नहीं हो पाया है। क्योंकि रिपोर्ट में रोप फिटनेस सही बताया जा रहा है और रोपवे में 24 खामियां बताई गई है। 17 मार्च को जांच के लिए सिंफर की तीन सदस्यीय टीम (देवाशीष बसाक, एस बाघमारे और मृत्युंजय कुमार सिंह) त्रिकूट पहाड़ गई थी। 22 मार्च को फिटनेस रिपोर्ट में रोपवे को सही बताया गया था। अब जब यह हादसा हो गया तो जांच करने गए वैज्ञानिक देवाशीष बसाक ने कहा कि सिंफर सिर्फ रोप की टेस्टिंग करता है। रोप की टेस्टिंग में कुछ भी खराब नहीं था। उन्होंने कहा कि हादसा होने के बाद रोपवे संचालन मैनेजर ने कॉल पर बताया था कि रोप में कोई दिक्कत नहीं थी अगर रोप टूट जाता तो बड़ी घटना हो सकती थी। इसलिए सिंफर की टेस्टिंग रिपोर्ट बिलकुल सही है।

एजेंसी ने बताई थी 24 खामियां
सरकार समर्थित एजेंसी ने तीन हफ्ते पहले ही रोपवे का सेफ्टी ऑडिट किया था। उस वक़्त 1,770 मीटर लंबे इस रोप वे में एजेंसी ने 24 खामियां बताई थीं। जिसमें बताया गया था कि लोहे की रस्सी और उसके जोड़ों पर नजर रखने की जरूरत है। रस्सी सात साल से ज़्यादा पुरानी है इसलिए रस्सी को साफ और जंग से सुरक्षित रखने की जरूरत है। इसके साथ ही कहा गया था कि किसी भी तरह की असामान्यता नज़र आने पर रस्सी को तुरंत बदल दिया जाए। इस रिपोर्ट को सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च (धनबाद) ने तैयार किया था। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान के तहत यह संस्था काम करती है। रोपवे सुरक्षा ऑडिट पिछले चार सालों से सीआईएसएफआर कर रहा है।

स्टील की रस्सी के फिसलने से हुआ हादसा
राज्य के पर्यटन विकास निगम को भी नवीनतम रिपोर्ट सौंपी गई थी। ग़ौरतलब है कि हादसा जिस वजह से हुआ उस बाबत कोई भी अलर्ट जारी नहीं किया गया था। डिटेचेबल ग्रिप मोनोकेबल पैसेंजर रोपवे की वर्तमान स्थिति पर रिपोर्ट 17 मार्च को एक क्षेत्र के दौरे पर आधारित थी। मुख्य वैज्ञानिक डी बसाक की मानें तो समस्या रस्सी के आसपास की संरचना में थी लेकिन हमारा सर्वे स्टील के रोपवे तक ही सीमित रह गया। दामोदर रोपवे और इंफ्रा लिमिटेड कंपनी (कोलकाता) इस रोपवे को संचालित कर रही है। महेश मोहता (महाप्रबंधक, वाणिज्यिक) का कहना है कि, रोज़ाना के रखरखाव का काम रोज़ाना के कामों का हिस्सा है, स्टील की रस्सी के फिसलने की वजह से हादसा हुआ है। आपको बता दें कि देवघर रोपवे हादसे में पिछले तीन दिनों में तीन लोगों की मौत हो चुकी है।
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