Gopalganj Lok Sabha Seat: कभी कांग्रेस, कभी राजद तो कभी भाजपा ने जमाया क़ब्ज़ा, दिलचस्प है सियासी इतिहास
Gopalganj Lok Sabha Seat: देश भर में आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर 'NDA बनाम INDIA' की सियासत तेज़ हो गई है। क्षेत्रीय से लेकर राजनीतिक पार्टियों ने सियासी ज़मीन मज़बूत करने के लिए बूथ लेवल तक मेहनत शुरू कर दी है। वहीं बिहार में भी लोकसभा चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। इसी क्रम में लोकसभा सीटों को लेकर भी सियासी चर्चा तेज़ हो गई है।
चुनावी चर्चा के बीच आज हम आपको बिहार के गोपालगंज लोकसभा सीट का सियासी इतिहास और समीकरण बताने जा रहे हैं। गोपालगंज लोकसभा सीट का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है, यहा कभी कांग्रेस, कभी राजद तो कभी भाजपा ने पार्टी का परचम लहराया है।

सियासी जानकारों ने बताया कि इंदिरा गांधी के मर्डर के बाद कांग्रेस के लिए देश भर में साहनुभूति की लहर थी। इसके बाद गोपालगंज लोकसभा सीट से कांग्रेस जीत दर्ज नहीं कर पाई। यहां का एक और रिकॉर्ड रहा है कि 1980 के बाद कोई भी प्रत्याशी दोबारा से सांसद चुना नहीं गया है।
गोपालगंज लोकसभा सीट पर गुंडा, गन्ना और गंडक की सियासत ही हावी रही है। यही वजह है कि इस क्षेत्र से 3 मुख्यमंत्री बने लेकिन आज भी ग्रामीण विकास की आस में हैं। विकास के नाम पर लोगों को आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
गोपालगंज लोकसभा सीट के अंदर 6 विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिसमें गोपालगंज, बरौली, बैकुंठपुर, भोरे, कुचायकोट, हथुआ विधानसभा का नाम शामिल है। साल 2019 में NDA गठबंधन की तरह से जदयू उम्मीदवार को चुनावी मैदान में उतारा गया था।
2019 के लोकसभा चुनाव में डॉ. आलोक कुमार सुमन ने अपनी पार्टी जदयू के लिए जीत का परचम बुंलद किया था। गोपालगंज लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन ही हैं। इस बार इस सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है, क्योंकि NDA गठबंधन से अलग होकर नीतीश कुमार भाजपा के खिलाफ ही तीर चला रहे हैं।
गोपालगंज लोकसभा सीट के जातीय समीकरण की बात की जाए तो यहां ब्राह्मण, यादव, कुर्मी, मुस्लिम, भूमिहार, वैश्य, कुशवाहा और महादलित समुदाय के लोग रहते हैं। चुनावों में सभी समुदाय के लोगों का हौसला बुंलद रहता है। थोड़ी सी चूक से बाज़ी पलट जाती है। यही वजह है कि यहां स्थानीय मुद्दों चुनाव होता ही नहीं और फिर क्षेत्र के विकास पर कोई चर्चा ही नहीं होती।
गोपालगंज लोकसभा सांसदों की सूची
1952: सैयद महमूद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1957: सैयद महमूद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1962: द्वारिका नाथ तिवारी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1967: द्वारिका नाथ तिवारी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1971: द्वारिका नाथ तिवारी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1977: द्वारिका नाथ तिवारी, जनता पार्टी
1980: नगीना राय, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1984: काली प्रसाद पांडे, स्वतंत्र
1989: राज मंगल मिश्रा, जनता दल
1991: अब्दुल गफ़ूर, राष्ट्रीय जनता दल
1996: लाल बाबू प्रसाद यादव, राष्ट्रीय जनता दल
1998: अब्दुल गफ़ूर, समता पार्टी
1999: रघुनाथ झा, समता पार्टी
2004: अनिरुद्ध प्रसाद यादव, राष्ट्रीय जनता दल
2009: पूर्णमासी राम, जनता दल (यूनाइटेड)
2014: जनक राम, भारतीय जनता पार्टी
2019: डॉ.आलोक कुमार सुमन, जनता दल यूनाइटेड












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