'ग्रेट वाल ऑफ़ चाइना' की तरह बिहार के इस वॉल को भी मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान, तैयारी शुरू
बिहार में इन दिनों पर्यटन को बढ़ावा देने की क़वायद तेज़ हो चुकी है। इसी कड़ी में नालंदा जिले राजगीर स्थित साइक्लोपीयन वॉल को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल करने की तैयारी की जी रही है।
पटना, 18 अप्रैल 2022। बिहार में इन दिनों पर्यटन को बढ़ावा देने की क़वायद तेज़ हो चुकी है। इसी कड़ी में नालंदा जिले राजगीर स्थित साइक्लोपीयन वॉल को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल करने की तैयारी की जी रही है। बिहार सरकार ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को एक प्रस्ताव भेजा है। जिसमें साइक्लोपियन दीवार को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में शामिल करने की मांग की गई है। आपको बता दें कि यह वॉल राजगीर में 2,500 सौ साल से भी ज्यादा पुरानी है। ग़ौरतलब है कि साइक्लोपियन दीवार पत्थर की 40 किलोमीटर लंबी है।

विश्व विरासत में शामिल करने की कोशिश जारी
बुज़ुर्गों की मानें तो साइक्लोपियन दीवार को तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से पहले बनाया गया था। ताकि बाहरी दुश्मनों और आक्रमणकारियों से लोगों को बचाया जा सके। पीटीटाई से खास बातचीत के दौरान दीपक आनंद ने (निदेशक, पुरातत्व निदेशालय ) कहा कि साइक्लोपियन दीवार को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में शामिल करने की पूरी कोशिश की जा रही है। साइक्लोपीन दीवार के ऐतिहासिक महत्व और विशेषताओं पर ज़ोर देते हुए एएसआई को एक नया प्रस्ताव दिया गया है। उन्होंने कहा कि दुनिया में साइक्लोपियन चिनाई के सबसे पुराने दीवारों में से एक है। इसलिए यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में इसे शामिल किया जाना चाहिए।

आक्रमणकारियों से हिफ़ाज़त के लिए हुआ था निर्माण
इतिहासकारों का मानना है कि मौर्य साम्राज्य की विरासत के तौर पर इस दीवार को जाना जाता है। मौर्य वंश के शासकों ने राजधानी की बाहरी आक्रमणकारियों से हिफ़ाज़त के लिए इस दीवार को बनाया था। एक वक्त था जब राजगीर ( उस राजगृह नाम था) बहुत ही शक्तिशाली था। उस दौर में मगध की एक अलग ही पहचान हुआ करती थी। जिस वजह से यहां आक्रमण का खतरा बना रहता था। इसलिए ही उस वक्त के राजा राजा बिमबिसारा और उनके बेटे आजातशत्रु के शासनकाल में इस दीवार को राजगीर में बनाया गया था।

दीवार की आकृति का कोई तोड़ नहीं
40 किलोमीटर लंबी साइक्लोपियन दीवार में चूना पत्थर लगाए गए थे। उस वक्त चूना पत्थर की मज़बूती का लोग लोहा मानते थे। लेकिन वक़्त के साथ हालात बदलते चले गए अब इस दीवार के सिर्फ़ अवशेष ही बचे रह गए हैं। लेकिन आज के ज़माने में भी इस आकृति का कोई तोड़ नहीं हैं। अभी तो ज्यादातर निर्माण सिमेंट से किया जाता है। लेकिन इस वक़्त तो सीमेंट का नामो निशान नहीं था। उस वक़्त के चूना पत्थर को आज के ज़माने के सिमेंट भी मात नहीं दे सकते हैं। इसलिए उस दौर में निर्मांण के लिए चूना पत्थर का ही इस्तेमाल किया जाता था। उस वक्त दीवार बनाने में काफ़ी वक़्त लगता था और मजबूती बेमिसाल हुआ करती थी। काफ़ी वक्त लगने के बावजूद साइक्लोपियन दीवार 4 मीटर ऊंची और 40 किलोमीटर लंबी बनाया गया था। आज यह दीवार अपनी पहचान खोती जा रही है।
ये भी पढ़ें: बिहार: तालाब के नीचे मछली पालन और उसके ऊपर बिजली उत्पादन, जानिए FSP की खासियत
-
Election Report Card: 5 चुनावी राज्यों में बीजेपी का हिसाब-किताब: कहां बन रही सरकार, कहां बिगड़ रहे समीकरण? -
Alka Yagnik की हालत बिगड़ी? खतरनाक बीमारी ने किया ये हाल, छलका सिंगर का दर्द, कहा- दुआ मांगो -
Love Story: 38 साल से पति से अलग रहती हैं Alka Yagnik, क्यों अकेले जी रहीं जिंदगी? अब दर्दनाक हुई हालत -
Alka Yagnik Caste: क्या है सिंगर अलका याग्निक की जाति? खतरनाक बीमारी से जूझ रहीं गायिका मानती हैं कौन-सा धर्म? -
Rakesh Bedi Caste: धुरंधर में पाकिस्तान को उल्लू बनाने वाले 'Jameel' किस जाति से? ठगी का शिकार हुई पत्नी कौन? -
'इंटीमेट सीन के दौरान उसने पार की थीं सारी हदें', Monalisa का बड़ा बयान, सेट पर मचा था ऐसा हड़कंप -
IAS Tina Dabi Transfer: दो लव मैरिज-एक से तलाक, विवादों में घिरीं UPSC टॉपर टीना डाबी का कहां-क्यों ट्रांसफर? -
RBSE Topper: रिजल्ट से 10 दिन पहले थम गईं निकिता की सांसें, 12वीं की मार्कशीट में चमकता रह गया 93.88% -
LPG Price Today: युद्ध के बीच जनता पर फूटा महंगाई बम, सिलेंडर के दाम बढ़े, आपके शहर में कहां पहुंचा रेट? -
Leander Paes: तीन अभिनेत्रियों संग रहा लिवइन रिलेशन, बिना शादी के बने पिता, घरेलू हिंसा का लगा था आरोप -
Vaibhav Suryavanshi के पास सात समंदर पार से आया ऑफर! टैलेंट पर फिदा हुआ ये देश, कहा- हमारे लिए खेलो -
'16 की उम्र में क्लब के बाहर 20 रु. में खुद की CD बेची', Dhurandhar के इस बड़े स्टार का सच, यूं बदली किस्मत












Click it and Unblock the Notifications