Bihar Chunav 2025: सम्मानजनक सीटें और मुद्दों पर कांग्रेस का दांव,‘छोटे भाई’ से ‘समान साझेदार’ बनने की जंग
Bihar Chunav 2025: बिहार की राजनीति एक बार फिर चुनावी रंग में रंगने लगी है। एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों ही अपने-अपने पत्ते खोल रहे हैं। लंबे अरसे तक बैकफुट पर रहने के बाद कांग्रेस पार्टी अब फ्रंटफुट पर खेलती हुई नज़र आ रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के हालिया बयान न केवल कार्यकर्ताओं में जोश भरने वाले हैं, बल्कि यह संकेत भी देते हैं कि कांग्रेस अब 'छोटे भाई' की भूमिका से बाहर निकलकर अपने लिए सम्मानजनक जगह तलाश रही है।

कांग्रेस की नई रणनीति
कांग्रेस ने इस बार मुद्दों की राजनीति को केंद्र में रखा है। 'वोट चोरी' का आरोप, राहुल गांधी की 'वोटर अधिकार यात्रा', और आमजन से जुड़े स्वास्थ्य, शिक्षा व पेंशन जैसे सवाल पार्टी के एजेंडे में हैं। राजेश राम ने स्पष्ट कहा है कि जनता अब विकल्प के रूप में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की तरफ देख रही है। खास बात यह है कि कांग्रेस इस बार सीटों के लिए झगड़ालू रवैया अपनाने के बजाय "सम्मानजनक साझेदारी" पर भरोसा दिखा रही है।
जनाधार और वोट बैंक
कांग्रेस का दावा है कि उसका पारंपरिक वोट बैंक - दलित, अल्पसंख्यक और सवर्ण - अब पार्टी की तरफ लौट रहा है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की सक्रियता से कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा देखी जा रही है। गांधी मैदान में जुटी भीड़ ने भी इस दावे को मजबूती दी कि कांग्रेस को अब 'कमज़ोर खिलाड़ी' कहना सही नहीं होगा।
गठबंधन की चुनौती और मुख्यमंत्री का चेहरा
इंडिया गठबंधन के भीतर सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री का चेहरा है। राजद तेजस्वी यादव को आगे कर रहा है, लेकिन कांग्रेस ने इस पर चुप्पी साध ली है। राजेश राम का साफ कहना है कि यह मुद्दा चुनाव के बाद तय होगा। यानी कांग्रेस अभी रणनीतिक तौर पर मुख्यमंत्री के चेहरे की लड़ाई से दूर रहना चाहती है और अपनी ताकत बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।
बदलते समीकरण का असर
यदि कांग्रेस अपने पुराने वोट बैंक को एकजुट करने में सफल रहती है, तो वह बिहार की राजनीति में 'निर्णायक' भूमिका निभा सकती है। एनडीए जहां नीतीश कुमार और बीजेपी के भरोसे चुनाव में उतर रही है, वहीं इंडिया गठबंधन के भीतर कांग्रेस अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। यह भी स्पष्ट है कि कांग्रेस अब केवल सहयोगी दल नहीं, बल्कि "समान साझेदार" के रूप में पहचान चाहती है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 कांग्रेस के लिए एक बड़ा इम्तिहान है।
दशकों तक हाशिये पर रहने के बाद पार्टी अब "वापसी" की उम्मीद में है। राहुल गांधी की सक्रियता और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम का आत्मविश्वास इस बात का संकेत है कि कांग्रेस इस बार चुनाव में महज़ 'संख्या पूरी करने वाली पार्टी' नहीं बनेगी। लेकिन अंतिम तस्वीर सीटों के बंटवारे, मुख्यमंत्री के चेहरे और जनता के मूड से ही साफ होगी। बिहार की सियासत का नया समीकरण तय करेगा कि कांग्रेस की यह कोशिश "वापसी" कहलाएगी या "नए संघर्ष की शुरुआत"।












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