माले नेता दीपांकर भट्टाचार्य के आरोपों को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने किया खारिज
दरभंगा। विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद बिहार में सरकार बनाने की कवायद चल रही है। इसके बीच महागठबंधन में हार के कारणों की समीक्षा भी हो रही है। महागठबंधन में शामिल कई दलों ने कांग्रेस पर हार की बड़ी वजह बनने का ठीकरा फोड़ दिया है। भाकपा माले नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस को 70 सीटें देना महागठबंधन की हार की बड़ी वजह बनी।

माले नेता दीपांकर भट्टाचार्य के इस बयान को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ मदन मोहन झा ने खारिज कर दिया है। बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ मदन मोहन झा ने दरभंगा में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि महागठबंधन के सभी दलों को मिल कर सभी 243 सीटों की जिम्मेवारी लेनी चाहिए न कि कांग्रेस की 70 सीटों और राजद की 143 सीटों की बात होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा के चुनाव की मतगणना के दिन दोपहर बाद तीन बजे तक सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन उसके बाद सत्ता के सत्ताधारी दल के समर्थक अधिकारियों ने जबरन एनडीए के प्रत्याशियों को जिताया। कांग्रेस ने कई जगहों पर विरोध किया तब कुछ जगह महागठबंधन के प्रत्याशी जीत सके।
उन्होंने सत्ताधारी एनडीए पर जनमत के अपहरण का भी आरोप लगाया। मदन मोहन झा ने हम के नेता जीतन राम मांझी के उस बयान को भी खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कांग्रेस के विधायकों को जदयू में शामिल होने का ऑफर दिया था।
मदन मोहन झा ने कहा कि जीतन राम मांझी उनके सीनियर नेता हैं लेकिन वह कब क्या बोल जाते हैं और मीडिया के लोग उनसे क्या बोलवा लेते हैं उनको खुद भी नहीं पता चलता है। बता दें कि सीपीआई एमएल के महासचिव ने दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि कांग्रेस 70 सीटें संभाल नहीं पाई। कांग्रेस का स्ट्राइक रेट जिस तरीके से खराब रहा, उससे यह साफ होता है कांग्रेस के जगह पर उनकी कुछ सीटें वामदल और राजद को मिली होती, तो हम ज्यादा जीते थे। हालांकि अब तो हार की समीक्षा हो रही है।












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