बिहार में कांग्रेस और राजद फिर आमने-सामने, जानिए अब क्यों उभरा मतभेद ?
पटना, 31 जनवरी: बिहार में विधानसभा उपचुनावों के दौरान आरजेडी और कांग्रेस के बीच जो तल्खी बढ़ी थी, उसमें में कोई कमी नहीं आई है। बल्कि, बीजेपी के खिलाफ सहयोगी की तरह काम करने वाली दोनों पार्टियों में ताजा मतभेद पैदा हो गया है। असल में बिहार में दो दर्जन विधान परिषद की सीटों पर चुनाव होने वाले हैं। लेकिन, राजद नेता कांग्रेस को भाव देने के लिए तैयार नहीं हैं। उपचुनावों के दौरान कांग्रेस ने जो तल्खी दिखाई थी, उसके सुर नरम जरूर पड़े हैं, लेकिन राजद के तेवर देखकर उसके हौसले टूटते जा रहे हैं। दूसरी तरफ इन चुनावों को लेकर सत्ताधारी गठबंधन में भी सबकुछ ठीक नहीं है और वीआईपी ने तो जैसे बगावत का बिगूल फूंक दिया है।

उपचुनावों में टूट गई थी दशकों की दोस्ती
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक बिहार में लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के बीच एक ताजा विवाद शुरू हो गया है। इस बार मसला है बिहार विधान परिषद का जिसके लिए दो महीने बाद चुनाव होने हैं। दोनों पार्टियां दशकों से साथ-साथ थीं, लेकिन पिछले साल अक्टूबर में जब बिहार में विधानसभा की दो सीटों पर उपचुनाव होने वाले थे तो राजद ने एकतरफा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया, जिससे कांग्रेस भड़क गई। तब कांग्रेस ने कह दिया कि बहुत हुआ अब 2024 में लोकसभा और 2025 में राज्य विधानसभा चुनाव में भी वह अकेले अपने ही दम पर लड़ेगी। लेकिन, जब दोनों विधानसभा चुनावों में नीतीश कुमार की जेडीयू जीत गई तो फिर से राजद-कांग्रेस गठबंधन की अटकलें शुरू हो गईं थी।

कांग्रेस से दूरी बनाए रखना चाहते हैं तेजस्वी
लेकिन, हाल ही में राजद के नेता तेजस्वी यादव ने साफ संकेत दिए हैं कि कांग्रेस से दूरी ही बनाए रखना चाहते हैं, जो कि विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन को लेकर उसपर तंज कसने का कोई मौका नहीं छोड़ते। 2020 के आखिर में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में पांच दलों वाला महागठबंधन 110 सीटें जीतकर बहुमत से 12 सीटें पीछे रह गया था। गठबंधन के इस खराब प्रदर्शन का ठीकरा कांग्रेस पर फूटा, जो कि 70 सीटों पर लड़कर सिर्फ 19 सीटें ही जीत पाई। अब जब तेजस्वी से विधान परिषद चुनावों के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि आरजेडी 'अपने दम पर' लड़ेगा। उन्होंने लेफ्ट पार्टियों को साथ रखने की बात तो कही, लेकिन जब कांग्रेस के बारे में पूछ लिया गया तो दो टूक कह दिया कि 'हम यह साफ कर चुके हैं कि हम उनको राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन करते हैं। इससे ज्यादा क्या कह सकते हैं।'

राजद की वजह से ज्यादा नुकसान हुआ-कांग्रेस
कांग्रेस उन हालातों को कोस रही है, जिसमें अगली पीढ़ी में सोनिया गांधी और लालू यादव वाली आपसी समझदारी का अभाव है। पार्टी के एमएलसी और मीडिया पैनलिस्ट प्रेम चंद्र मिश्रा ने तंज भरे अंदाज में कहा कि, 'तेजस्वी यादव एक बड़े नेता हैं। उन्हें हमें बताना चाहिए कि वह बिहार में किसकी मदद करना चाहते हैं।' उनके मुताबिक, 'कांग्रेस को आरजेडी से गठबंधन की वजह से ही ज्यादा नुकसान हुआ। लेकिन, उसने अपनी चुनावी संभावनाओं की जगह बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए के वैचारिक विरोध को ज्यादा महत्त्व दिया। तेजस्वी यादव ऐलान कर सकते हैं कि वह 2024 का लोकसभा चुनाव अपने दम पर लड़ना चाहते हैं, अगर वह अपनी संभावनाओं के बारे में इतने आश्वस्त हैं। '

एनडीए में भी शुरू है विवाद
2019 के लोकसभा चुनाव में एनडीए ने बिहार की 40 में 39 सीटें जीती थी और राजद को शून्य बटे सन्नाटा हाथ लगा था। लेकिन, उसके साथ गठबंधन में कांग्रेस ने एक सीट पर अपना गोटी फिट कर ली थी। हालांकि, विधान परिषद चुनाव में बिहार में सत्ताधारी एनडीए के घटक दलों में भी गतिरोध दिख रहा है। विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के नेता और प्रदेश के मंत्री मुकेश सहनी 'अपमानित' महसूस करने लगे हैं। उन्होंने कहा है कि एनडीए फॉर्मूला के तहत बीजेपी 12 सीटों पर और जेडीयू 11 सीटों पर लड़ रही है और एक सीट एलजेपी के केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस वाली पार्टी के लिए छोड़ा गया है, 'इससे लगता है कि वे हमारे लिए ज्यादा नहीं सोचते हैं।' उन्होंने चुनौती देते हुए कह दिया है कि 'लेकिन मैं दिखाऊंगा कि निषाद समुदाय सक्षम है। वीआईपी सभी 24 सीटों पर लड़ेगी।'












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