Bihar Chunav 2025: '10 हज़ार आ गया है, 2 लाख और आएगा', ‘फर्जी ड्यूटी’ पर मचा बवाल, मनीष कश्यप का वीडियो वायरल

Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के दौरान चनपटिया विधानसभा के एक बूथ पर को उस वक्त हलचल मच गई जब मनीष कश्यप मतदान केंद्र पर पहुंचे। उन्होंने वहाँ मौजूद जीविका दीदियों से सवाल किया कि "आपको यहाँ किसने बैठाया है? आपकी ड्यूटी किसने लगाई है?" इस सवाल के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

अधिकारी से बात और खुलासा
जानकारी के मुताबिक, जीविका दीदी ने मनीष कश्यप के सवाल पर अपने वरिष्ठ अधिकारी को फोन लगाया। जब मनीष कश्यप ने अधिकारी से बात की तो उन्होंने साफ कहा कि इन महिलाओं को केवल "मतदाताओं की मदद" के लिए रखा गया है, ताकि उन्हें वोट देने में कोई परेशानी न हो। उन्होंने यह भी माना कि ये कोई "आधिकारिक ड्यूटी" नहीं है।

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मनीष कश्यप ने बूथ से हटाया, लगाए गंभीर आरोप
अधिकारी की बात सुनने के बाद मनीष कश्यप ने जीविका दीदियों से कहा कि "दीदी आपकी कोई ड्यूटी नहीं लगी है, आप जाइए" और उन्हें बूथ से बाहर जाने को कहा। इसके बाद मनीष कश्यप ने मीडिया के सामने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ जीविका दीदियों को यह सिखाया गया था कि वे महिला मतदाताओं से कहें, "10 हजार रुपये आ गए हैं, 2 लाख भी आएंगे, कमल पर बटन दबाइए।"

जीविका पक्ष ने किया आरोपों से इनकार
मनीष का दावा है कि ऐसे कई बूथों पर इस तरह की गतिविधि की जा रही थी, जिसे उन्होंने रंगे हाथों पकड़ा है। दूसरी ओर, जीविका से जुड़ी महिला कार्यकर्ताओं ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि वे सिर्फ मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने और उन्हें कतार व्यवस्था में सहयोग देने के लिए मौजूद थीं। किसी भी राजनीतिक दल के प्रचार या मतदाता को प्रभावित करने का कार्य उन्होंने नहीं किया।

स्थानीय प्रशासन और आयोग से जांच की मांग
घटना के बाद स्थानीय मतदाताओं और पर्यवेक्षकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है। कई लोगों का कहना है कि अगर जीविका दीदियों की तैनाती का कोई आधिकारिक आदेश नहीं था, तो यह चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन माना जा सकता है। मतदाताओं ने चुनाव आयोग और जिला प्रशासन से इस घटना की त्वरित जांच और स्पष्ट रिपोर्ट जारी करने की मांग की है।

चुनावी निष्पक्षता पर सवाल
चनपटिया के इस बूथ पर हुई घटना ने मतदान केंद्रों पर निगरानी और निष्पक्षता की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएँ अगर समय रहते नहीं रोकी गईं तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की साख पर असर डाल सकती हैं। फिलहाल मनीष कश्यप के समर्थकों ने प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग की है, उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही स्थिति पर स्पष्टता आ जाएगी।

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