Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

बीजेपी को जब पता था नीतीश गठबंधन तोड़ देंगे, फिर रोकने की क्यों नहीं हुई कोशिश ? जानिए

पटना, 9 अगस्त: भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व को नीतीश कुमार के फैसले का पूरा अंदाजा था, लेकिन फिर भी उन्हें गठबंधन में बने रखने की कोई कोशिश नहीं की गई है। हालांकि, ऐसी खबरें आई थीं, लेकिन पार्टी सूत्रों का अब कहना है कि पार्टी नेतृत्व ने नीतीश के हर ऐक्शन को आराम से हो जाने दिया। इसके पीछे पार्टी की भविष्य की रणनीति मानी जा रही है। कुल मिलाकर भारतीय जनता पार्टी चाहती थी कि नीतीश एकबार फिर से पलटें और उनके इस कदम से उनकी छवि को और बट्टा लगे, जिसके लिए वह अब काफी मशहूर हो चुके हैं!

नीतीश की 'विश्वसनीयता' पर सवाल

नीतीश की 'विश्वसनीयता' पर सवाल

नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के बड़े नेता दो दिनों से चीख-चीख कर भाजपा पर गंभीर आरोप लगा रहे थे। केंद्रीय कैबिनेट में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया था। मीडिया की ओर से कहा जा रहा था कि बस एनडीए में टूट की औपचारिकता बाकी रह गई है। नीतीश कुमार और सोनिया गांधी के बीच फोन पर डील होने की खबरें आ रही थीं। लेकिन, भारतीय जनता पार्टी शीर्ष स्तर पर अपने पुराने सहयोगी को रोकने की कोशिश करते जरा भी नजर नहीं आई। इसके पीछे बीजेपी नेताओं की सोची-समझी रणनीति सामने आ रही है। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसकी वजह ये है कि भाजपा का साथ छोड़ने का नीतीश का कदम 'विश्वासघात' माना जाएगा और बार-बार पलटने की वजह से उनकी 'विश्वसनीयता खत्म' हो चुकी है।

2024 के लिए नीतीश को बेहतर विकल्प मानती है बीजेपी!

2024 के लिए नीतीश को बेहतर विकल्प मानती है बीजेपी!

भाजपा सूत्रों का यह भी कहना है कि बीजेपी के बड़े नेताओं ने नीतीश कुमार से कोई संपर्क नहीं किया। जबकि, उन्हें सबकुछ पता था, लेकिन उन्हें रोकने की कोई कोशिश ही नहीं की गई। भाजपा सूत्र का कहना है कि ऐसा इस वजह से हुआ, क्योंकि बीजेपी को पक्का यकीन है कि नीतीश कुमार प्रधानमंत्री बनने का मंसूबा पाले बैठे हैं और इसलिए पार्टी (भाजपा) उन्हें 2024 के आम चुनाव में विपक्ष के अगुवा के तौर पर बेहतर विकल्प के रूप में देख रही है।

भाजपा ने तो गठबंधन धर्म का पालन किया है -गिरिराज

भाजपा ने तो गठबंधन धर्म का पालन किया है -गिरिराज

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में कहा भी है कि प्रधानमंत्री पद की रेस में शामिल होने से उन्हें कौन रोक सकता है? वे बोले कि भाजपा ने तो गठबंधन धर्म का पालन किया है और उसकी मर्यादा को निभाया है। जब हमारे एमएलए उनसे कहीं ज्यादा थे, तब भी उन्हें सीएम बनाया और उन्हें खरीद-फरोख्त दिख रहा है। मतलब, भाजपा सूत्र और गिरिराज सिंह जैसे बड़े नेता की बातों में समानता देखी जा सकती है।

राजद के साथ महागठबंधन सरकार चलाने की चुनौती

राजद के साथ महागठबंधन सरकार चलाने की चुनौती

अब नीतीश कुमार को लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल समेत 9 और दलों के साथ महागठबंधन की सरकार चलानी है। यह वही आरजेडी है, जिसके तत्कालीन उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के केस लगने के बाद 2017 में वे वापस पलट कर बीजेपी के साथ आ गए थे। आरजेडी बिहार विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी है और उसके और उसके सहयोगियों को साथ लेकर चलना नीतीश के लिए कम बड़ी चुनौती नहीं होगी।

आरसीपी सिंह के अगले कदम का इंतजार

आरसीपी सिंह के अगले कदम का इंतजार

ऊपर से आरसीपी सिंह जैसे नेता का जिन हालातों में जेडीयू से तलाक हुआ है, वह नीतीश के लिए कहीं से राह आसान नहीं करने वाला। आरसीपी सिंह ना सिर्फ मुख्यमंत्री के गृह जिले के हैं, बल्कि वह भी उसी कुर्मी जाति से हैं, जिससे नीतीश हैं। दोनों का गांव भी मुश्किल से 15-20 किलोमीटर के अंतर (नीतीश-कल्याण बिगहा-हरनौत, आरसीपी- मुस्तफापुर-अस्थावां) पर है। आरसीपी सिंह आज भी अपनी जमीन से जुड़े हैं और उनकी छवि ईमानदार रिटायर्ड आईएएस की है। लेकिन, जदयू ने उनपर भ्रष्टाचार के जो गंभीर आरोप लगाए हैं, उसका जवाब आने का भी बिहार का राजनीतिक तबका बेसब्री से इंतजार कर रहा है। पीएम मोदी के पूर्व सहयोगी आरसीपी सिंह के अगले कदम पर भी भाजपा नेताओं की नजर बनी हुई है।

भाजपा ने लंबी रणनीति पर लगाया है दांव ?

भाजपा ने लंबी रणनीति पर लगाया है दांव ?

लिहाजा भाजपा सूत्रों ने कहा है कि बीजेपी अभी से राज्य के सभी 243 विधानसभाओं पर फोकस करेगी। 2024 के आम चुनाव में पार्टी की कोशिश एकजुट लोक जनशक्ति पार्टी और बाकी जाति-आधारित छोटी पार्टियों के साथ मिलकर लड़ने की रहेगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि 2015 के बिहार विधानसभा चुनावों के नतीजे से यही पता चलता है कि प्रदेश में तीन ही प्रमुख दल हैं- आरजेडी, जेडीयू और बीजेपी। इनमें से जो दो पार्टियां मिल जाएंगी, उसी की जीत पक्की होगी। लेकिन,भाजपा सूत्रों का मानना है कि नीतीश कुमार के कमजोर होने की स्थिति में राज्य की राजनीति आने वाले वर्षों में दो ध्रुवीय हो सकती है; और शायद भाजपा इसी आधार पर अपनी रणनीति बनाकर काम करना चाहती है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+