Bihar Voter List: बिहार वोटर लिस्ट पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला-अब बिना दस्तावेज भी होगा नामांकन!
Bihar Voter List Revision 2025: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत चल रही वोटर लिस्ट रिवीजन प्रक्रिया को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है। आयोग ने अब स्पष्ट किया है कि जरूरी दस्तावेजों के बिना भी मतदाता सूची में नामांकन संभव होगा, बशर्ते स्थानीय स्तर पर जांच के आधार पर पुष्टि की जा सके। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की ओर से बाद में दस्तावेज जमा करने की भी बात कही गई है।
चुनाव आयोग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए कहा है कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता अनिवार्य दस्तावेज जमा किए बिना भी मतदाता सूची में अपना नाम सत्यापित करवा सकते हैं। अगर दस्तावेज नहीं दिए गए तो निर्वाचन पंजीयक अधिकारी स्थानीय स्तर पर जांच के आधार पर सत्यापन करेंगे। ये जानकारी बिहार मुख्य निर्वाचन कार्यालय ने विज्ञापन के जरिए दी है। बिहार के सभी स्थानीय समाचार पत्रों के पहले पन्ने पर 6 जुलाई 2025 को प्रकाशित विज्ञापन में इसके बारे में बताया गया है।

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने लोगों से कहा है कि अगर उनके (वोटर) पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, तो वे बिना जरूरी दस्तावेजों के ही मतदाता फॉर्म भरकर जमा कर दें। बूथ-स्तरीय अधिकारियों (BLO) को सभी भरे हुए, हस्ताक्षरित फॉर्म अपलोड करने के लिए कहा गया है, जबकि दस्तावेज बाद में जमा किए जा सकते हैं। हालांकि चुनाव आयोग (ईसी) ने कोई नया आदेश जारी नहीं किया है।
बिहार वोटर वेरिफिकेशन क्या था विवाद?
बिहार में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले किए जा रहे बिहार वोटर वेरिफिकेशन (SIR) प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग ने 11 दस्तावेजों में से कम से कम एक दस्तावेज देना अनिवार्य कर दिया था, जिससे लाखों लोगों के नाम कटने की आशंका जताई जा रही थी।
विपक्षी दलों ने इस फैसले को "साजिश" करार दिया और कहा कि इससे करोड़ों गरीब और वंचित मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट से गायब हो सकता है।
RJD नेता तेजस्वी यादव ने कहा, "भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, केवल 2-3% लोगों के पास ही ये दस्तावेज हैं। ये संविधान से मिला वोट देने का अधिकार छीनने की कोशिश है।"
चुनाव आयोग ने कौन-कौन से दस्तावेज मांगे गए थे?
- जन्म प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट
- सरकारी कर्मचारियों के लिए पहचान पत्र या पेंशन ऑर्डर
- स्थायी निवास प्रमाण पत्र
- जाति प्रमाण पत्र
- परिवार रजिस्टर
- भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र
- (आधार कार्ड, पैन कार्ड को इस सूची में शामिल नहीं किया गया था।)
अब क्या कहा चुनाव आयोग ने?
अब आयोग ने अपने नए पोस्टर और निर्देशों में कहा है:
- अगर आपके पास दस्तावेज या फोटो उपलब्ध नहीं हैं, तो सिर्फ नामांकन फॉर्म भरें और बूथ लेवल अधिकारी (BLO) को दें। पोस्टर में कहा गया है, ''अगर आवश्यक दस्तावेज और फोटो उपलब्ध नहीं हैं, तो बस गणना प्रपत्र भरें और बूथ लेवल अधिकारी को उपलब्ध कराएं।"
- इसमें अहम रूप से कहा गया है कि, "अगर आप जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने में असमर्थ हैं, तो निर्वाचन निबंधन अधिकारी (ईआरओ) स्थानीय जांच या अन्य दस्तावेजों के साक्ष्य के आधार पर फैसले ले सकते हैं।"
- स्थानीय जांच के आधार पर भी नामांकन स्वीकार किया जा सकता है।
- चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा कि ईआरओ मौके पर जाएंगे और उन मतदाताओं से मिलेंगे जिन्होंने दस्तावेज जमा नहीं किए हैं। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि फॉर्म भरने वाला व्यक्ति 18 वर्ष का है, उनके निवास अवधि के बारे में जानकारी लेंगे, क्षेत्र में रहने वाले लोगों से बात करेंगे और उपलब्ध साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों के आधार पर फैसला लेंगे।
- ERO (Electoral Registration Officer) खुद मौके पर जाकर जांच करेंगे -जैसे आवेदक की उम्र, इलाके में निवास अवधि, पड़ोसियों से पूछताछ, और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला लेंगे।
DM को दिए गए निर्देशों में CEO कार्यालय ने क्या कहा?
जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) को दिए गए निर्देशों में सीईओ कार्यालय ने कहा है,
''सभी डीएम बिना दस्तावेजों के फॉर्म जमा करें, यह भी सुनिश्चित करें कि अधिकतम फॉर्म जमा किए जाएं ताकि हम ड्राफ्ट प्रकाशन पर अधिकतम संख्या में मतदाताओं को शामिल कर सकें। बाद में दस्तावेज जमा किए जा सकते हैं और बीएलओ डैशबोर्ड (विकसित किया जा रहा है) के माध्यम से अपलोड किए जा सकते हैं। जो भी फॉर्म बांटते हैं बस गणना फॉर्म भरकर हस्ताक्षर के साथ अपलोड करें। बीएलओ को पहले से ही अपने 90% मतदाताओं के बारे में पता है, उन लोगों को छोड़कर जो मर चुके हैं और स्थायी रूप से पलायन कर चुके हैं, सभी फॉर्म अपलोड करें।"

अब तक कितने लोगों ने फॉर्म भरे?
- अब तक बिहार में 1.21 करोड़ लोगों ने नामांकन फॉर्म भरे हैं।
- इनमें से 23.9 लाख फॉर्म अपलोड भी हो चुके हैं।
- फॉर्म भरने की आखिरी तारीख 25 जुलाई तय की गई है।
- चुनाव आयोग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि 2003 के विशेष गहन पुनरीक्षण में सूचीबद्ध 4.96 करोड़ मतदाताओं - जो कुल मतदाताओं का 60 प्रतिशत है - को कोई सहायक दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं है।
- चुनाव निकाय ने यह भी कहा है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है और "प्रत्येक पात्र नागरिक मतदाता सूची का हिस्सा होगा"।












Click it and Unblock the Notifications