'ठाकुर' वाली कविता पर दिल्ली से बिहार तक मचा बवाल तो मनोज झा ने तोड़ी चुप्पी, कहा- 'मैंने तो पहले ही...'
संसद में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सांसद मनोज झा द्वारा कविता में 'ठाकुर' शब्द के इस्तेमाल ने दिल्ली से बिहार तक सियासी भूचाल ला दिया। कई नेताओं की नाराजगी सामने आने के बाद शनिवार को आरजेडी सांसद मनोज झा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि वह कविता ओमप्रकाश वाल्मीकि द्वारा लिखी गई थी। उस कविता को पढ़ने से पहले, मैंने एक डिस्क्लेमर दिया था कि यह किसी जाति से संबंधित नहीं है।
उन्होंने आगे यह भी कहा कि मैंने कहा था कि 'ठाकुर' मेरे अंदर भी हो सकता है... उस कविता का संदर्भ महिला आरक्षण बिल में पिछड़ों को शामिल करने को लेकर था। मैं देख रहा हूं कि उसके बाद लोग मुझे बेतुकी बातें कहने के लिए फोन कर रहे हैं। ये कॉल मुझे पिछले दिनों से आ रहे हैं। क्या है ठाकुर विवाद?

दरअसल, बीते दिन यानी शुक्रवार को संसद में आरजेडी सांसद मनोज झा ने संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान एक कविता पेश की। जिसमें उन्होंने 'ठाकुर' शब्द इस्तेमाल किया था। हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था। ठाकुद शब्द पर विवाद ऐसा बढा कि कई नेताओं की नाराजगी उजागर हुई। वहीं, कुछ नेताओं ने मनोज झा का समर्थन भी किया।
ठाकुरों के अपमान का लगा आरोप
वहीं, मनोज झा को कविता में ठाकुर शब्द के इस्तेमाल की भारी कीमत चुकानी पड रही है। आरजेडी के विधायक चेतन आनंद ने उनके बयान पर नाराजगी जताई है। साथ ही उनपर ठाकुरों के अपमान का भी आरोप लगा है। हालांकि, आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने झा का खुलकर समर्थन किया है।












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