Bihar SIR: 1 सितंबर के बाद भी चलेंगे वोटर क्लेम-ऑब्जेक्शन, वोटर लिस्ट पर सुप्रीम कोर्ट फैसला, 5 बड़ी बातें
Bihar SIR Supreme Court hearing Update: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची (Electoral Roll) को लेकर बड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। आज अदालत ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और एआईएमआईएम (AIMIM) की याचिकाओं पर सुनवाई की, जिसमें दोनों दलों ने मतदाता सूची में क्लेम और ऑब्जेक्शन दाखिल करने की डेडलाइन बढ़ाने की मांग की थी।
बिहार में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) मामले में सोमवार (01 सितंबर) को सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग (ECI) ने कोर्ट को बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची पर क्लेम और ऑब्जेक्शन 1 सितंबर की डेडलाइन के बाद भी दाखिल किए जा सकते हैं और ऐसे सभी आवेदन नामांकन की आखिरी तारीख तक स्वीकार किए जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बयान को रिकॉर्ड किया और स्पष्ट किया कि वह फिलहाल 1 सितंबर की डेडलाइन बढ़ाने का कोई आदेश पारित नहीं करेगा। सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने की, जो राजनीतिक दलों की ओर से डेडलाइन बढ़ाने की मांग वाली याचिकाओं पर विचार कर रही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा, 5 बड़ी बातें
🔹 1. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिहार लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (BLSA) की चेयरपर्सन सभी जिलों में पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLVs) को सक्रिय करें। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (BLSA) को आदेश दिया कि वह राज्य की सभी जिला कानूनी सेवा प्राधिकरणों (DLSA) को निर्देश जारी करे। इसके तहत, पैरा लीगल वॉलंटियर्स को नियुक्त या अधिसूचित किया जाएगा ताकि वे मतदाताओं और राजनीतिक दलों को ऑनलाइन माध्यम से दावे, आपत्तियां और सुधार दर्ज कराने में मदद कर सकें।
🔹 2. इन वॉलंटियर्स का काम होगा मतदाताओं और राजनीतिक दलों को ऑनलाइन क्लेम, ऑब्जेक्शन और करेक्शन दाखिल करने में मदद करना।
🔹 3. चुनाव आयोग (ECI) ने अदालत को बताया कि 1 सितंबर की डेडलाइन के बाद भी दाखिल क्लेम और ऑब्जेक्शन स्वीकार किए जाएंगे और इन्हें फाइनल वोटर लिस्ट में शामिल कर लिया जाएगा।
🔹 4. इसके साथ ही अदालत ने कहा कि हर वॉलंटियर एक गोपनीय रिपोर्ट तैयार करेगा और उसे संबंधित जिले के जिला एवं सत्र न्यायाधीश (DLSA के चेयरमैन) को सौंपेगा। इन रिपोर्टों से मिली जानकारी को राज्य स्तर पर स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी द्वारा संकलित किया जाएगा।
🔹 5. सुप्रीम कोर्ट में बेंच ने चुनाव आयोग की इस बात को दर्ज किया कि 1 सितंबर के बाद भी क्लेम/ऑब्जेक्शन दाखिल किए जा सकते हैं।
यह प्रक्रिया मतदाता सूची फाइनल होने के बाद भी जारी रहेगी। नामांकन की आखिरी तारीख तक हुए सभी बदलाव अंतिम मतदाता सूची में शामिल कर दिए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी (ECI की ओर से) ने कहा कि राजनीतिक दलों की तरफ से अधिकतर ऑब्जेक्शन (नाम हटाने के लिए) आ रहे हैं, न कि क्लेम (नाम जोड़ने के लिए)। इसे उन्होंने "बहुत अजीब" बताया।
द्विवेदी ने बताया कि 7.24 करोड़ मतदाताओं में से 99.5% ने अपने फॉर्म जमा कर दिए हैं। ड्राफ्ट में जिन 65 लाख मतदाताओं को बाहर किया गया था, उनमें से केवल 33,326 व्यक्तियों और 25 राजनीतिक दावों ने ही नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया।
याचिकाकर्ताओं की दलीलें
- एडवोकेट प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि ECI अधिकारी अपने ही मैनुअल का पालन नहीं कर रहे।
- एडवोकेट निजाम पाशा ने कहा कि BLOs (ब्लॉक लेवल ऑफिसर) फॉर्म स्वीकार करने से मना कर रहे हैं।
- सीनियर एडवोकेट शुऐब आलम (RJD की ओर से) ने कहा कि कोर्ट ने 22 अगस्त को आधार के जरिए नाम जोड़ने की अनुमति दी थी, लेकिन अंतिम तारीख से पहले सिर्फ 9 दिन ही बचे थे।
- अब तक 1,34,738 ऑब्जेक्शन हटाने के लिए दाखिल हुए हैं।
क्यों मांगी गई थी डेडलाइन बढ़ाने की मांग?
- RJD और AIMIM ने दलील दी कि बड़ी संख्या में नाम कटने और नए क्लेम आने की वजह से लोगों को पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
- सिर्फ पिछले हफ्ते में ही 1 लाख से ज्यादा क्लेम दाखिल हुए। इनमें से 33,349 आवेदन तो सिर्फ दो दिनों में ही दाखिल किए गए।
- याचिका में कहा गया कि अगर डेडलाइन 1 सितंबर को ही खत्म हो गई तो कई सही मतदाता वोट देने के अधिकार से वंचित हो जाएंगे।
अगली सुनवाई कब होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर 2025 को तय की है। सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में वोटर लिस्ट से जुड़े क्लेम और ऑब्जेक्शन 1 सितंबर के बाद भी लिए जाएंगे, और इन्हें अंतिम मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा। लेकिन डेडलाइन बढ़ाने पर अभी कोई आदेश नहीं दिया गया है।
पिछली कार्यवाही का बैकग्राउंड
- 14 अगस्त: सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि 65 लाख बाहर किए गए मतदाताओं के नाम कारण सहित बिहार CEO और जिला निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाएं।
- 22 अगस्त: कोर्ट ने आदेश दिया कि इन 65 लाख लोग ऑनलाइन आधार कार्ड के साथ नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकें।
- 28 जुलाई - 6 अगस्त: कोर्ट और ECI के बीच कई दौर की बहस हुई जिसमें 'एन मास एक्सक्लूज़न' पर सवाल उठे और कोर्ट ने कहा कि "एन मास एक्सक्लूज़न की बजाय एन मास इंक्लूज़न होना चाहिए।"
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