Saran Lok Sabha Seat: कांग्रेस और राजद का रहा वर्चस्व, अब खिला है BJP का कमल, जानिए इतिहास
Saran Lok Sabha Seat Profile And History: बिहार में लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर राजनीतिक पार्टियों ने रणनीतियां बनानी शुरू कर दी हैं। प्रदेश की सभी 40 लोकसभा सीटों पर चुनावी मंथन भी जारी है। बिहार में हो रही चुनावी चर्चा के बीच आज हम आपको बिहार की सारण लोकसभा सीट का इतिहास और समीकरण बताने जा रहे हैं।
बिहार की सारण लोकसभा सीट का इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है, शुरुआती दौर से लेकर 1977 तक सारण लोकसभा सीट पर कांग्रेस का हाथ मज़बूत रहा, 1977 के बाद लालू यादव की पार्टी राजद ने कांग्रेस के किले में सेंधमारी की। आपको बता दें कि सारण लोकसभा सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया। इससे पहले इसे छपरा लोकसभा सीट के नाम से लोग जानते थे।

सियासी जानकारों की मानें तो उस दौरान के समीकरण को देखते हुए लग रहा था कि सारण सीट पर अब राजद का ही झंडा बुलंद होता रहेगा, लेकिन सियासी फ़िज़ा ऐसी बदली कि राजद के हाथों से भी यह सीट निकल गई। मौजूदा समय में इस सीट पर लगातार भाजपा का कमल खिलता रहा है।
आपको बता दें कि प्रदेश के 6 सीएम सारण ज़िले से ही बने हैं, इस वजह से भी इस लोकसभा सीट का सियासी महत्व काफी ज़्यादा है। 1967 के दशक में कांग्रेस पार्टी का वर्चस्व था, 1977 में जेपी आंदोलन की वजह से इस सीट पर राजद का परचम बुलंद हुआ।
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के किले को 1996 में भाजपा प्रत्याशी राजीव प्रताप रूडी ने ध्वस्त किया। उन्होंने चार बार इस लोकसभा सीट से जीत दर्ज की। चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव को सज़ा होने के बाद उनकी सांसदी चली गई।
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव यहां से चार बार सांसद की कुर्सी पर क़ब्ज़ा जमा चुके हैं। इस दौरान दो बार उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता राजीव प्रताप रूडी को सियासी शिकस्त दी थी। चारा घोटाले में जिस वक्त लालू यादव को सज़ा हुई थी, वह सारण लोकसभा सीट से सांसद थे। सज़ा के बाद सदस्यता छिन गई थी।
सारण लोकसभा सीट से मौजूदा वक्त में भाजपा के दिग्गज नेता राजीव प्रताप रूडी सांसद हैं। 3 बार चुनाव में तीज का परचम लहराने के बाद उन्होंने चंद्रिका राय (लालू के समधी) को सियासी मात दी थी। पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने पूर्व सीएम राबड़ी देवी को सियासी मात दी थी।
1957 में सबसे पहले प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने जीत का परचम लहराया था। इसके बाद 1962 से 1971 तक लगातार कांग्रेस प्रत्याशी रामशेखर सिंह ने तीन बार जीत दर्ज कर पार्टी का परचम लहराया। सारण जिला में यूं तो 10 विधानसभा सीट है, लेकि लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत छह विधानसभा सीटें शामिल हैं।
सारण लोकसभा सीट से जब सांसदों की तकदीर का फैसला सोनपुर, परसा, गड़खा, मढौरा, अमनौर और छपरा सदर विधानसभा सीटों के मतदाता करते हैं। आपको बता दें कि अमनौर और छपरा सदर सीट पर भाजपा का कब्ज़ा है। वहीं सोनपुर, परसा, गड़खा, मढौरा, अमनौर पर राजद का झंडा बुलंद है।
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