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Bihar Politics: बजट में बिहार के लिए मखाना बोर्ड, चुनावी साल में कैसे साबित हो सकता है निर्णायक कदम?

Bihar: केंद्र सरकार ने अपने आम बजट में बिहार के लिए एक फूड प्रोसेसिंग संस्थान और मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा की है। यह फैसला न केवल बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि राज्य के किसानों और मखाना उत्पादन से जुड़े लोगों के लिए भी नए अवसर पैदा करेगा। खासतौर पर उत्तर बिहार के नदी किनारे बसे जिलों में, जहां मखाना उत्पादन मुख्य रूप से किया जाता है, वहां इस फैसले से स्थानीय लोगों की आय में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

इसके अलावा, यह कदम आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश भी देता है। मखाना उत्पादन से जुड़े मल्लाह समुदाय को इससे बड़ा लाभ मिलेगा, जो राज्य में एक प्रभावशाली वोट बैंक के रूप में जाना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घोषणा मल्लाहों और अन्य पिछड़ी जातियों को लुभाने की एक रणनीति हो सकती है, जिससे चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।

Bihar Makhana

मल्लाह समुदाय को मिलेगा लाभ

बिहार में मखाना उत्पादन करने वाले मल्लाह समुदाय को इस घोषणा से सीधा फायदा मिलेगा। मल्लाह, जो मछुआरों और नाविकों का समुदाय है, राज्य की राजनीति में किसी एक दल के प्रति स्थायी निष्ठा नहीं रखते। इस फैसले से उनके आर्थिक हालात में सुधार आने की उम्मीद है, जिससे वे राजनीतिक रूप से और प्रभावशाली हो सकते हैं।
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बिहार में मखाना उत्पादन का केंद्र

भारत में मखाना उत्पादन का करीब 90% हिस्सा बिहार से आता है। मुख्य रूप से, इसका उत्पादन उत्तर बिहार के नदी किनारे बसे जिलों में होता है, जिनमें सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल और किशनगंज जैसे इलाके शामिल हैं। मखाना की खेती और कटाई ज्यादातर मल्लाह समुदाय द्वारा की जाती है, जो राज्य के सबसे गरीब समुदायों में से एक हैं।

राजनीतिक समीकरणों पर असर

मल्लाह समुदाय बिहार की कुल जनसंख्या का लगभग 2.6% है, लेकिन नदी किनारे बसे होने के कारण उनकी राजनीतिक शक्ति उनकी संख्या से कहीं अधिक है। इस कारण, विभिन्न राजनीतिक दल उन्हें अपने पक्ष में करने की कोशिश करते रहे हैं।

जेपी आंदोलन के बाद से मल्लाह समुदाय आमतौर पर सामाजिक न्याय से जुड़े दलों का समर्थन करता रहा है। हालांकि, हाल के वर्षों में सभी प्रमुख राजनीतिक दल इस समुदाय को अपने पाले में करने के लिए प्रयासरत हैं। मल्लाह अन्य पिछड़ी जातियों पर भी प्रभाव डालते हैं, जिससे वे एक महत्वपूर्ण चुनावी समुदाय बन जाते हैं।

2020 विधानसभा चुनाव में मल्लाहों की भूमिका

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में, बीजेपी ने विकासशील इंसान पार्टी (VIP) को 11 सीटें दी थीं। इस पार्टी के प्रमुख, मुकेश सहनी खुद को "मल्लाह का बेटा" बताते हैं। इस गठबंधन के कारण बीजेपी को 110 सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ा, जबकि जदयू को 115 सीटें मिलीं।

VIP ने तीन सीटें जीतीं और अपने वोट बीजेपी को ट्रांसफर करने में सफल रही। इसका नतीजा यह हुआ कि बीजेपी ने 74 सीटें जीतीं, जबकि जदयू केवल 43 सीटों पर सिमट गई। इसके अलावा, लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) ने जदयू के खिलाफ उम्मीदवार खड़े किए, जिससे जदयू को और नुकसान हुआ।

बिहार की राजनीति में नया मोड़?

बिहार में मखाना उद्योग की बड़ी संभावनाएं हैं, और अगर इस क्षेत्र को सही बढ़ावा दिया गया, तो इससे न केवल मल्लाह समुदाय का जीवन स्तर सुधरेगा बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा। राजनीतिक दृष्टि से भी यह घोषणा मल्लाहों को साधने की एक रणनीति के रूप में देखी जा रही है, जो आगामी चुनावों में बड़ा प्रभाव डाल सकती है।
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