Bihar Political Families: किस्मत या खानदान? बिहार के 17 परिवार जिनका राजनीति पर अब भी राज, कोई CM, कोई मंत्री
Bihar Political Families: बिहार की राजनीति की सबसे दिलचस्प तस्वीरों में से एक है परिवारवाद का असर। यहां अक्सर देखा जाता है कि राजनीति केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसका पूरा परिवार सियासत में सक्रिय हो जाता है। पिता के बाद बेटा, मां के बाद बेटी और भाई के बाद भतीजा तक चुनावी मैदान में उतरता है। यही वजह है कि आज भी बिहार की सियासत में कई ऐसे राजनीतिक घराने हैं, जिनका दशकों से दबदबा बना हुआ है।
वनइंडिया की खास सीरीज "खानदानी नेता" के तहत इस लेख में हम बात कर रहे हैं उन 17 परिवारों की, जिन्होंने बिहार की राजनीति में अपना दबदबा कायम रखा है। कोई मुख्यमंत्री बना, कोई केंद्रीय मंत्री, तो किसी ने सांसद और विधायक बनकर अपने खानदान की सियासी विरासत को आगे बढ़ाया।

बिहार की राजनीति में ये 17 परिवार सक्रिय
1. लालू परिवार: बिहार की सबसे बड़ी सियासी ताकत
बात बिहार की राजनीति और परिवारवाद की हो और लालू प्रसाद यादव का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। लालू के परिवार का लगभग हर सदस्य राजनीति में सक्रिय है। उनकी पत्नी राबड़ी देवी खुद मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। बड़े बेटे तेज प्रताप यादव विधायक हैं, छोटे बेटे तेजस्वी यादव नेता प्रतिपक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं। बेटी मीसा भारती राज्यसभा सांसद हैं और दूसरी बेटी रोहिणी आचार्य भी सारण से चुनाव लड़ चुकी हैं।
2. पासवान परिवार: दलित राजनीति का बड़ा चेहरा
दूसरा बड़ा नाम है दिवंगत रामविलास पासवान का। उन्होंने दलित राजनीति में ऐसा मुकाम बनाया कि आज उनका बेटा चिराग पासवान केंद्र की राजनीति में एनडीए का बड़ा चेहरा हैं। वहीं भाई पशुपति कुमार पारस भी लंबे समय तक सांसद और मंत्री रहे। भतीजे प्रिंस राज ने भी सियासी पारी खेली है।
3. मांझी परिवार: दलित समाज की राजनीति
पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी भी परिवारवाद की मिसाल हैं। उनके बेटे संतोष सुमन मंत्री हैं, बहू दीपा मांझी सक्रिय राजनीति में हैं और समधन ज्योति देवी भी चुनाव लड़ चुकी हैं।
4. चौधरी परिवार: कोसी की राजनीति पर पकड़
शकुनी चौधरी लंबे समय तक मंत्री रहे। आज उनके बेटे सम्राट चौधरी भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और अब डिप्टी सीएम पद तक पहुंच चुके हैं। उनकी पत्नी पार्वती देवी भी विधायक रह चुकी हैं।
5. सिन्हा परिवार: आज़ादी से राजनीति तक
डॉ. अनुग्रह नारायण सिन्हा, जो बिहार के पहले उपमुख्यमंत्री रहे, उनके परिवार ने भी राजनीति में गहरी पकड़ बनाई। उनके बेटे सत्येंद्र नारायण सिन्हा मुख्यमंत्री बने। बहू किशोरी सिन्हा राजनीति में सक्रिय रहीं और पौत्र निखिल कुमार राज्यपाल व सांसद रह चुके हैं।
6. जगजीवन राम परिवार: दलित राजनीति का राष्ट्रीय चेहरा
उपप्रधानमंत्री रहे बाबू जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार लोकसभा अध्यक्ष तक बनीं। उनके नाती अंशुल अविजीत भी राजनीति में हाथ आजमा रहे हैं।
7. मिश्रा परिवार: ब्राह्मण राजनीति की ताकत
पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा का परिवार भी राजनीति में सक्रिय रहा। उनके बेटे नीतीश मिश्रा मंत्री बने और पौत्र ऋषि मिश्रा विधायक रहे।
8. यादव परिवार: पिछड़े वर्ग की पकड़
रामलखन सिंह यादव का परिवार भी राजनीति में मजबूत रहा। उनके पौत्र जयवर्धन यादव आज राजनीति में सक्रिय चेहरा हैं।
9. ठाकुर परिवार: समाजवादी आंदोलन की धरोहर
पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर का परिवार भी राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके बेटे रामनाथ ठाकुर वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं।
10. आजाद परिवार: खेल से राजनीति तक
भागवत झा आजाद के बेटे कीर्ति आजाद क्रिकेटर से राजनेता बने और सांसद बने। वहीं राजवर्धन आजाद एमएलसी हैं।
11. तिवारी परिवार: राजनीति में लगातार उपस्थिति
रामानंद तिवारी के बेटे शिवानंद तिवारी लंबे समय तक मंत्री रहे और पौत्र राहुल तिवारी विधायक बने।
12. मेहता परिवार: वित्त मंत्री से लेकर विधायक तक
तुलसीदास मेहता के बेटे आलोक मेहता मंत्री बने, जबकि बेटी सुहेली मेहता भी चुनाव मैदान में उतरीं।
13. जतदानंद सिंह परिवार: लालू के करीबी
पूर्व मंत्री जतदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह वर्तमान में सांसद हैं, जबकि अजीत सिंह भी प्रत्याशी रहे।
14. तस्लीमुद्दीन परिवार: सीमांचल की राजनीति
पूर्व केंद्रीय मंत्री तस्लीमुद्दीन के बेटे सरफराज आलम सांसद बने, जबकि दूसरे बेटे शाहनवाज आलम मंत्री रहे।
15. जायसवाल परिवार: भाजपा से जुड़ा परिवार
पूर्व सांसद मदन प्रसाद जायसवाल के बेटे डॉ. संजय जायसवाल भाजपा सांसद रहे हैं और प्रदेश अध्यक्ष भी रहे।
16. आनंद मोहन परिवार: बाहुबली से सियासी ताकत तक
बाहुबली नेता आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद सांसद रहीं। उनके बेटे चेतन आनंद राजद से विधायक बने।
17. सिंह परिवार: राजनीति और खेल का संगम
पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी श्रेयसी सिंह राजनीति में उतरीं और अब विधायक हैं।
बिहार में परिवारवाद का सच
इन 17 परिवारों की कहानी यह बताने के लिए काफी है कि बिहार की राजनीति में परिवारवाद का दबदबा कितना गहरा है। यहां नेता केवल खुद तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पूरी पीढ़ी राजनीति में उतरती है। यही वजह है कि जनता के सामने अक्सर वही चेहरे बार-बार लौटकर आते हैं। बिहार चुनाव 2025 के संदर्भ में यह सवाल फिर उठ रहा है कि क्या वोटर पुराने खानदानी नेताओं को ही चुनेंगे, या नई राजनीतिक ताकतों को मौका देंगे?












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