Bihar News: बिहार पुलिस द्वारा अपराध को जड़ से खत्म करने की तैयारी, 1 जुलाई से लागू होंगे नए कानून
Bihar Police: राज्य के 25 हजार पुलिस पदाधिकारी एक महीने में नये अपराधिक कानून, विधि विज्ञान और डीजिटल पुलिसिंग में प्रशिक्षित किए जाएंगे। राज्य स्तरीय तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का पहला दिन पुलिस महानिदेशक के संबोधन से ज्ञान भवन, पटना से हाइब्रिड मोड में हुआ।
इस प्रशिक्षण के माध्यम से पुलिस पदाधिकारियों को तीन नये अपराधिक कानून क्रमसः भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023, और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के विस्तृत जानकारी दी जायेगी। यह कानून दिनांक-1.7.2024 से प्रभावी होगें।

प्रशिक्षण के दौरान गंभीर अपराध के घटना स्थाल पर उपलब्ध विज्ञानिक साक्ष्य संकलन करने, घटना स्थल की वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी के लिए विधि-विज्ञान विशेषज्ञों द्वारा पुलिस पदाधिकारियों को जानकारी दी जायेगी। अपराध में मोबाइल फोम, सोशल मीडिया और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी ट्रेनिंग दी जाएगी।
पुलिस पदाधिकारियों को इलेक्ट्रॉनिक सबूत संग्रह कर कोर्ट में पेश करने की मानक संचालन प्रक्रिया की भी ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके साथ ही इन्वेस्टिगेशन में नेट पर मौजूद सबूत को ओपेन सोर्स इन्वेस्टिगेशन टूल्स के ज़रिए इकट्ठा और इस्तेमाल करने की भी ट्रेनिंग दी जाएगी।
डीजिटल पुलिसिंग की बुनियाद राष्ट्रीय ऑनलाइन प्लैटफॉर्म और CCTNS (Crime and Criminal Tracking Network and Systems), ICJS (Inter Operable Criminal Justice System) की व्यवस्था है। पिछले एक वर्ष में राज्य के प्रत्येक थाना में CCTNS को स्थापित कर दिया गया है।
अब जल्द ही CCTNS को ICJS से जोड़ा जायेगा जिससे सभी पुलिस पदाधिकारी न्यायलय, जेल, विधि-विज्ञान प्रयोगशाला से जूड़ जायेगें। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुलिस पदाधिकारियों को CCTNS/ICIS की उपयोग हेतु प्रशिक्षित किया जायगा, जिससे नागरीको को ऑनलाइन विभिन्न सेवाएं मिल सकेगी और अनुसंधान, न्यायलय, जेल आदि के कार्य भी ऑनलाइन हो सकेंगे।
ट्रेनिंग के बाद इस साल के अंत तक में बिहार के नागरीको को पुलिसिंग की नागरीक केन्द्रीत (Anytime, Anywhere Policing) सुविधा, CCTNS (Crime and Criminal Tracking Network and Systems) सुविधा। राज्य के प्रत्येक थाना में उपलब्ध रहेगी। जिसके माध्यम से विभिन्न नौ नागरीक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध होंगे।
संबंधित पुलिस स्टेशन में फोन, व्हाटसएप्प और ईमेल से शिकायत दर्ज करना, उसकी स्थिति, FIR की कॉपी हासिल करने के साथ ही नीचे दी गई सुविधाओं का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
• गिरफ्तार व्यक्तियों, अपराधियों की जानकारी प्राप्त करना; लापता एवं अपहरण व्यक्तियों की जानकारी प्राप्त करना
• चोरी अथवा बरामद वाहनों हथियारों एवं अन्य संपत्तियों की जानकारी
• विभिन्न प्रकार के NOCs के Issue/renew के लिए अनुरोध करना
• नौकरो, राजगार, पासपोर्ट, वरिष्ठ नागरिक पंजीकरण आदि के लिए अनुरोध करना
• जानकारी साझा करने और नागरिको को विभिन्न फॉर्म डाउनलोड करने की सुविधा
पीड़ित, शिकायतकर्ता अपराध स्थल के परे कहीं से भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। लेकिन ऑनलाइन प्राथमिकी दर्ज करने के 03 दिनों के अन्दर संबंधित थानें में आकर शिकायत पत्र पर हस्ताक्षर करना होगा। गंभीर महिला अपराध में शिकायत दर्ज करने से लेकर सारी कारवाई महिला पुलिस पदाधिकरी एवं महिला मेजिस्ट्रेट करेगी।
पीड़ित, शिकायतकर्ता को पुलिस पदाधिकारी द्वारा शिकायत, प्राथमिकी की प्रति उपलब्ध करायी जायेगी। 90 दिनों के अन्दर अनुसंधानकर्ता को जाँच की प्रगति रिपोर्ट से पीड़ित को अवगत कराना होगा। केस वापसी के समय पीड़ित,शिकायतकर्ता का पक्ष जानना ज़रूरी होगा।
ग़ौरतलब है कि 20 मिनट में राज्य में कहीं भी आपातकालीन Dial 112 से पुलिस से मद्द दी जा रही है। प्रत्येक जिले में मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट (Mobile Forensic Science Unit) विशेषज्ञों एवं उपकरणों के साथ तैनात रहेंगे।
टीम घटना स्थल पर तुंरत पहुंच कर फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी फिंगरप्रिंट और अन्य विज्ञानिक साक्ष्य संकलन करेंगे, जिससे न्याय व्यवस्था मज़बूत होंगे और दोषियों को सज़ा मिल सकेगी। इससे बयान के आधार पर गलत आरोप पर भी रोक लगेगी।
NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System) की राष्ट्रीय डाटाबेस में सभी गिरफ्तार व्यक्तियों के फिंगरप्रिंट मौजूद रहेंगे। अब बिहार में प्रत्येक जिला में यह लागू होगी। इसके बाद गिरफ्तार प्रत्येक व्यक्ति के अंगुली का निशान NAFIS डेटाबेस में दर्ज किया जायेगा।
इससे अपराधिक घटना स्थल पर मिलने वाले अंगुली के निशान का तुंरत पूरे देश में गिरफ्तार व्यक्तियों के फिंगरप्रिंट डेटाबेस से मिलान किया जा सकेगा। इससे अपराध के उदभेदन एवं अभियुक्तो को सजा दिलाने में आसानी होगी।
प्रत्येक पुलिस पदाधिकारी को स्मार्टफोन और लैपटॉप की सुविधा दी जा रही है। इनके इस्तेमाल के लिए ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इससे वह अपराधिक घटना स्थल की वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी, पीड़ित और गवाहो के बयान ऑडियो-वीडियो के ज़रिए दर्ज कर, तुरंत कोर्ट में पेश कर सकेंगे।
पुलिस पदाधिकारी लैपटॉप से किसी भी समय CCTNS, ICIS का उपयोग अनुसंधान, जाँच में कर सकेंगे जिससे कान्डों के पर्दाफाश और अनुसंधान की गुणवत्ता में इज़ाफा होगा। CCTNS/ICIS के माध्यम से न्यायलय से समन, वारंट आदि पुलिस पदाधिकरी को डिजीचली भेजे जा सकेंगे।
पुलिस पदाधिकारी द्वारा इसका तामिला प्रतिवेदन भी डीजिटल भेजा जा सकेगा। इससे न्याय प्रक्रिया में गती मिलेगी। CCTNS/ICIS के माध्यम से पुलिस पदाधिकरी जेल से छूटने वाले अपराधियो पर भी बैहतर निगरानी कर सकेगी।
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