मात्र 2 रुपए में इलाज करने वाले बिहार के डॉ. बी भट्टाचार्य नहीं रहे, 70 सालों तक दी मीठी दवा
पटना। बिहार में होम्योपैथी की चिकित्सा के पुरोधा डॉक्टर बी. भट्टाचार्य नहीं रहे। 97 वर्ष की आयु में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। वह 1950 से ही लोगों के रोग दूर करने में सक्रिय थे। उनकी मीठी-मीठी गोलियां एवं औषधियों की छोटी-छोटी पुड़िया मरीजों को ठीक कर देती थीं। जिसके लिए भट्टाचार्य मरीज से महज 2 रुपए फीस लेते थे। उनके पास बिहार-बंगाल, यूपी और पूर्वोत्तर भारतीय राज्यों से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए आते थे। हजारों लोग उनकी चिकित्सा से ठीक हुए।

नहीं रहे होम्योपैकिक चिकित्सा के पुरोधा भट्टाचार्य
अब डॉ. बी भट्टाचार्य के नाम का सिर्फ "डॉ.बी.भट्टाचार्य क्लीनिक" रह गया है। उन्होंने रविवार को सुबह साढ़े 7 बजे पटेल नगर स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। वह रोजाना बहुत से मरीजों को देखते थे, लेकिन अपनी बीमारी से नहीं निपट सके। वह काफी उम्रदराज भी हो गए थे। उनके निधन की खबर मिलते ही कई राज्यों के राजनेताओं ने भी शोक प्रकट किया। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने शोक जताया है।

सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक सक्रिय रहते थे
डॉ. भट्टाचार्य के एक शिष्य ने बताया कि, गुरु भट्टाचार्य अपनी जनसेवा का काम सुबह 5 बजे से शुरू कर देते थे, और रात 11 बजे तक मरीजों को देखते थे। वह 1950 से ही लोगों का उपचार करते आ रहे थे। यानी उन्होंने 70 साल से ज्यादा समय तक लोगों की देख-रेख की। बीमारियों पर अच्छी पकड़ की वजह से उनके पास बिहार के जिलों के साथ ही उत्तर प्रदेश, झारखंड और दिल्ली से मरीज इलाज कराने के लिए आते थे।

उनकी दवा से मानो चमत्कार हो जाता था!
होम्योपैथी के बड़े जानकार होने के साथ-साथ उनमें मनोवैज्ञानिक समझ भी थी। वह मरीजों से बात करके बीमारियों को पकड़ लेते थे। जिसकी वजह से लोगों को उनकी दवाएं फायदा करती थी। खास बात यह है कि, उनकी फीस महज 2 रुपए थी। उनके निधन पर सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद ने भी शाेक व्यक्त किया है। एक बुजुर्ग ने कहा- उनकी गोली से मानो चमत्कार हो जाता था।












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