Bihar News: "कान पकड़कर उठक- बैठक करवाएंगे", "अपने एजेंडा पर नचाते रहेंगे", ये क्या बोल गए लालू यादव
Bihar News: देश में आजादी के बाद पहली बार मोदी सरकार जातिगत जनगणना कराएगी। बिहार चुनाव से पहले केंद्र के इस बड़े फैसले ने सभी राजनीतिक पार्टियों को चौंका दिया है। इसी बीच बिहार के पूर्व सीएम लालू यादव ने बीजेपी और आरएसएस पर तंज कसते हुए कहा है- कहा था ना कि "कान पकड़कर उठक- बैठक इन संघियों से जातिगत जनगणना करवाएंगे।" आइए जानते हैं कि लालू यादव की राजनीति और जातिगत जनगणना एक दूसरे से कैसे मेल खाती है...
राजद नेता लालू यादव का एक पोस्ट भी सोशल मीडिया पर काफी ट्रेंड कर रहा है जिसमे उन्होंने कहा है कि इन RSS-BJP वालों कान पकड़- उठक- बैठक करा इनसे जातिगत जनगणना करवाएंगे। इनका क्या औकात है जो ये जातिगत जनगणना नहीं कराएंगे? इनको इतना मजबूर करेंगे कि इन्हें जातिगत जनगणना करना ही पड़ेगा।

राजद नेता लालू यादव ने बिहार विधानसभा 2025 चुनाव से पहले बड़ी बात कहते हुए ऐलान कर दिया है कि बिहार ही देश को राजनीतिक दिशा देता है। फिर कह रहा हूँ- अब पिछड़ों और अतिपिछड़ों के लिए सीटें आरक्षित होंगी
लालू यादव ने X पर किया पोस्ट
लालू यादव ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा- हम क्या बोले थे? 1990 में मंडल कमीशन लागू करवाने के बाद, हमने सारा ध्यान जाति जनगणना पर लगाया, बिना डरे झुके संघियों की आँख में आँख डाल ललकारा, बारंबार केंद्र सरकार नकारती रही लेकिन आखिरकार उन्हें झुकना पड़ा। हम समझौतावादी नहीं बल्कि कट्टर समाजवादी है। जो कहते है उसे पूरा करते और कराते है।
अभी बहुत कुछ बाक़ी है। हम इन्हें अपने एजेंडा पर नचाते रहेंगे: लालू यादव
पूर्व सीएम लालू यादव ने कहा कि मेरे जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते दिल्ली में हमारी संयुक्त मोर्चा की सरकार ने 1996-97 में कैबिनेट से 2001 की जनगणना में जातिगत जनगणना कराने का निर्णय लिया था जिस पर बाद में NDA की वाजपेयी सरकार ने अमल नहीं किया। 2011 की जनगणना में फिर जातिगत गणना के लिए हमने संसद में जोरदार माँग उठाई। मैंने, स्व॰ मुलायम सिंह जी, स्व॰ शरद यादव जी ने इस माँग को लेकर कई दिन संसद ठप्प किया और बाद में प्रधानमंत्री स्व॰ मनमोहन सिंह जी के सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण कराने के आश्वासन के बाद ही संसद चलने दिया। देश में सर्वप्रथम जातिगत सर्वे भी हमारी 17 महीने की महागठबंधन सरकार में बिहार में ही हुआ।
जिसे हम समाजवादी जैसे आरक्षण, जातिगणना, समानता, बंधुत्व, धर्मनिरपेक्षता इत्यादि 30 साल पहले सोचते है उसे दूसरे लोग दशकों बाद फॉलो करते है। जातिगत जनगणना की माँग करने पर हमें जातिवादी कहने वालों को करारा जवाब मिला। अभी बहुत कुछ बाक़ी है। हम इन्हें अपने एजेंडा पर नचाते रहेंगे।
लाालू यादव की राजनीति
लालू प्रसाद यादव की जातिगत राजनीति और मंडल आयोग (Mandal Commission) का मामला भारत की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ है, विशेष रूप से उत्तर भारत में। इसने भारतीय राजनीति में सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों और दलितों के लिए आरक्षण की मांग को एक नया मोड़ दिया था। लालू प्रसाद यादव, जो खुद यादव जाति से हैं (OBC), ने मंडल आयोग लागू होने के बाद इसे एक राजनीतिक आंदोलन में बदल दिया। मंडल आयोग ने OBC के लिए आरक्षण की नींव रखी। लालू यादव ने इसे एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप देकर जाति आधारित राजनीति को मजबूत किया।
लालू यादव की भूमिका और जातिगत राजनीति
- "सामाजिक न्याय" का एजेंडा: उन्होंने खुद को गरीब, पिछड़े, दलित वर्गों की आवाज के रूप में पेश किया।
- राजनैतिक गठजोड़: उन्होंने MY समीकरण (Muslim-Yadav) के जरिए एक मजबूत वोट बैंक खड़ा किया।
- ऊंची जातियों की राजनीति को चुनौती दी और कहा कि सदियों से शोषित वर्गों को अब सत्ता में भागीदारी मिलनी चाहिए।
- "मंडल बनाम कमंडल": मंडल आयोग (OBC आरक्षण) बनाम कमंडल (राम मंदिर आंदोलन) की राजनीति ने बिहार और उत्तर भारत की दिशा बदल दी।
लालू यादव को इसका राजनीतिक लाभ मिला
- लालू यादव ने 1990 में बिहार के मुख्यमंत्री बने और लगातार OBC वोट बैंक को अपने पक्ष में रखा।
- उन्होंने खुद को "गरीबों का मसीहा" बताया और सामाजिक न्याय की राजनीति को मुख्यधारा में लाया।
- उनके बाद नीतीश कुमार, मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, और अन्य नेताओं ने इसी जातिगत समीकरण की राजनीति को अपनाया।












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