बिहार: लॉकडाउन में नेताओं की आवाजाही बैन, BJP को नहीं आया पसंद, कहा- सरकार का ये तानाशाही कदम

बिहार: लॉकडाउन में नेताओं की आवाजाही बैन, BJP को नहीं आया पसंद, कहा- सरकार का ये तानाशाही कदम

पटना, 28 मई: बिहार में कोरोना लॉकडाउन के दौरान मंत्रियों और विधायकों के आवाजाही पर नीतीश सरकार ने प्रतिबंध लगा दी है। बिहार में लॉकडाउन 1 जून को खत्म हो रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस फैसले से बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता, विधायक और सांसद नाराज हैं। भाजपा के विधायक और सांसदों ने लॉकडाउन के कारण अपने निर्वाचन क्षेत्रों में मंत्रियों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने के राज्य सरकार के फैसले पर अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। बिहार सरकार ने 23 मई 2021 को एक पत्र जारी कर लॉकडाउन के नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए मंत्रियों, विधायकों और सांसदों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी।

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बीजेपी नेताओं ने पार्टी की वर्चुअल बैठक में जताया विरोध

बीजेपी विधायकों, सांसदों और मंत्रियों ने बुधवार (26 मई) को पार्टी की वर्चुअल बैठक में इस मामले को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के सात साल पूरे होने पर 30 मई को होने वाले सेवा दिवस की तैयारियों की निगरानी के लिए बीजेपी ने एक बैठक बुलाई थी। बैठक में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल मौजूद थे। इसी बैठक में बिहार बीजेपी के नेताओं ने नीतीश सरकार के खिलाफ अपना विरोध प्रक्रट किया है।

BJP विधायक बोले-यह लोकतंत्र की हत्या जैसा है

बीजेपी विधायक ने बैठक में कहा, ''यह लोकतंत्र की हत्या जैसा है। अगर कोई विधायक या सांसद कोरोना महामारी के इस समय में अपने लोगों के साथ रहने के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्रों में नहीं जा सकते हैं, तो वह जन प्रतिनिधि होने का दावा कैसे कर सकते हैं?''

एक अन्य विधायक ने आवाजाही प्रतिबंधित होने पर हैरानी जताते हुए कहा, "क्या इस तरह का फैसला लेने से पहले सरकार ने बीजेपी कोटे के दोनों उपमुख्यमंत्रियों से सलाह-मशविरा किया था।"

नाराज नेताओं ने इस फैसले को तानाशाही बताया

नाराज विधायकों और सांसदों ने कहा कि उनके क्षेत्रों के जिलाधिकारी उन्हें फोन पर कह रहे थे कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों या अस्पतालों या सामुदायिक रसोई में न जाएं। इसका क्या मतलब समझा जाए। एक अन्य विधायक ने कहा, 'यह सरकार का तानाशाही कदम है।' भाजपा के एक विधायक और पूर्व मंत्री ने कहा कि निर्णय लेने से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगियों से भी सलाह नहीं ली गई।

हाईकमान इस मामले को नहीं बनाना चाहती है मुद्दा

सूत्रों के हवाले से 'द हिंदू' ने लिखा है, राज्य के शीर्ष पार्टी नेतृत्व ने विरोध करने वाले विधायकों और सांसदों को सूचित किया कि केंद्रीय नेतृत्व को इसके बारे में जानकारी दी गई है और उन्हें इसे मुद्दा नहीं बनाने के लिए कहा है। उन्हें लॉकडाउन के नियमों का पालन करने के लिए कहा गया था क्योंकि यह केवल कुछ और दिनों तक चलेगा।

बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि इस मामले को तूल देने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि ये कोरोना को रोकने के लिए किया गया उपाय है।

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