गोपालगंजः चार बच्चियों के साथ घर के लिए हरियाणा से पैदल ही चल पड़ा युवक, चार दिन पहले निकला था परिवार

गोपालगंज। कोरोना के चलते लॉकडाउन का ऐलान है ऐसे में लोगों का रोजगार छिन गया, जिसके चलते लोगों के पास काम नहीं बचा है और लोग अपने घरों को वापस जा रहे हैं। इसी कड़ी में गोपालगंज में प्रतिदिन कुचायकोट के जलालपुर चेकपोस्ट पर हजारों लोग पहुंच रहे हैं। ये सभी लोग देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों से वापस लौटे हैं। हजारों की संख्या में लोग यहां लॉकडाउन के बाद से ही पहुंच रहे हैं।

चार बच्चियों के साथ निकला था युवक

चार बच्चियों के साथ निकला था युवक

इन्हीं में से एक परिवार है, जो हरियाणा से छपरा साइकिल के जरिए पहुंचा है, जो हरियाणा से अपने चार बच्चों को लेकर पैदल ही छपरा के लिए चला था। ये सभी लोग कुचायकोट के जलालपुर चेक पोस्ट पर पहुंचे हैं। छपरा के रहने वाले जयकुमार राम अपनी पत्नी सीमा और चार छोटे-छोटे बच्चों समेत अपने दूसरे साथियों के साथ हरियाणा से पैदल चले थे। जयकुमार राम के चार बच्चियां हैं, जिसमें रेखा, काजल, ज्योति और सुरभि शामिल हैं।

कैंप में परिवार को रखा गया

कैंप में परिवार को रखा गया

सभी बच्चियों की उम्र दो साल से लेकर 12 साल के बीच की है।पूरी यात्रा के दौरान भारी बैग लेकर एक दूसरे का हाथ पकड़कर निकले बच्चे कभी मां और कभी पिता की गोद में बैठकर यहां तक पहुंचे हैं। पिता जयकुमार राम के मुताबिक उनके साथ छपरा के अन्य 20 लोग शामिल हैं, जो काम बंद होने के बाद अपने घर वापस लौट रहे हैं। ये सभी लोग जलालपुर चेकपोस्ट स्थित बनाये गए कैंप में पहुंचे हैं। यहां गोपालगंज जिला प्रशासन द्वारा उन्हें खाना खिलाया गया और उनका रजिस्ट्रेशन कराया गया।

मकान मालिक ने घर से निकाला

मकान मालिक ने घर से निकाला

जयकुमार राम की पत्नी सीमा देवी के अनुसार लॉकडाउन लागू होने के बाद उन्हें काम से निकाल दिया गया था। काम नहीं मिलने पर उनके घर में खाने की समस्या हो गई। इस दौरान मकान मालिक भी किराये का दबाव बनाने लगे। जब उन्होंने किराया नहीं दिया तो मकान मालिक ने बाहर निकाल दिया। पैसे की कमी और बेघर होने के बाद घर वापस आने के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं था।

गांव वालों ने पुड़ी सब्जी खिलाया

गांव वालों ने पुड़ी सब्जी खिलाया

वो चार दिन पहले शाम को हरियाणा से पैदल ही चल पड़े। रास्ते में किसी वाहन ने लिफ्ट दिया लेकिन आगे चलकर उन्होंने भी उतार दिया। बच्चे पूरी यात्रा में दर्द से कराहते रहे लेकिन उनके पास पैदल चलने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। चार दिनों तक पैदल चलने के बाद 12 वर्षीय काजल भी अब बिहार में अपने गृह जिले में पहुंच गयी है। काजल ने बताया कि वो भी पैदल ही चलती रही। उसे रास्ते में गांव वालो ने पुड़ी सब्जी खिलाया था।

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