Bihar Election 2025: मतदान से 2 दिन पहले मुकेश सहनी का बड़ा दांव, गौड़ा-बौराम में 'त्याग' कर RJD को फुलसपोर्ट!
Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग (6 नवंबर) से महज दो दिन पहले, बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। चुनावी रणभूमि में उतरी विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने गौड़ा-बौराम विधानसभा क्षेत्र (दरभंगा) से अपने प्रत्याशी संतोष साहनी का नाम वापस ले लिया।
वीआईपी संस्थापक और पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने इस 'बड़े दिल' वाले फैसले को महागठबंधन की मजबूती का प्रतीक बताते हुए RJD प्रत्याशी मोहम्मद अफजल अली खान को खुला समर्थन दे दिया। यह कदम न सिर्फ सीट-शेयरिंग विवाद को सुलझाने का संकेत है, बल्कि NDA के वोट-कटावे के दांव को विफल करने की रणनीति भी है, जिससे महागठबंधन की सरकार बनाने की राह में एक और बाधा दूर हुई। साहनी का यह 'छोटा त्याग' बिहार की राजनीति में सामाजिक न्याय की पुरानी लड़ाई को नई ताकत दे रहा है, जहां निषाद-मल्लाह वोटबैंक की कुंजी मुकेश सहनी के पास है।

Mukesh Sahni Withdrawal Brother Name: RJD-VIP के बीच 'फ्रेंडली फाइट' का अंत, गौड़ा-बौराम पर RJD का कब्जा
गौड़ा-बौराम सीट (Gowda-Bowram Seat) पर शुरू से ही महागठबंधन में घमासान छिड़ा हुआ था। नामांकन के आखिरी दिन (17 अक्टूबर 2025) RJD ने अपने पुराने दांव पर अफजल अली खान (Afzal Ali Khan) को टिकट दिया, जबकि वीआईपी ने मुकेश सहनी के छोटे भाई संतोष सहनी (Younger Brother Santosh Sahni) को उतार दिया-जिसे सहनी खुद लड़ने वाले थे। यह 'फ्रेंडली फाइट' महागठबंधन के लिए खतरे की घंटी थी, क्योंकि 2020 में इसी सीट पर वीआईपी के स्वर्ण सिंह ने RJD के अफजल को हराया था। दरभंगा सहनी का गढ़ है, जहां निषाद समुदाय (2.5% वोट शेयर) का दबदबा है। RJD ने सीट छोड़ने से इनकार कर दिया था, लेकिन आखिरकार 23 अक्टूबर को केंद्रीय मध्यस्थ अशोक गहलोत (कांग्रेस) की मौजूदगी में सुलह हो गई। वीआईपी ने नाम वापस लिया, और अब अफजल अली खान महागठबंधन के आधिकारिक चेहरा बन गए।
यह फैसला महागठबंधन की एकजुटता का प्रमाण है-जिसमें RJD (143 सीटें), कांग्रेस (61), वामपंथी (30) और वीआईपी (15) शामिल हैं। पहले चरण की 121 सीटों में से कई पर ऐसे 'इंटरनल फाइट्स' थे, लेकिन वीआईपी और कांग्रेस के चार प्रत्याशियों (जैसे बाबूबढ़ी से वीआईपी की बिंदु गुलाब यादव) ने RJD के पक्ष में नाम वापस लेकर गठबंधन को मजबूत किया। मुकेश सहनी ने दरभंगा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'यह बड़ी लड़ाई है, छोटा त्याग मायने नहीं रखता। अगर दोनों मैदान में रहते, तो फायदा NDA को मिलता। विधायक नहीं, महागठबंधन की सरकार बनाना प्राथमिकता है।' उनका इशारा साफ था-लालू प्रसाद के सामाजिक न्याय के एजेंडे को मजबूत करने का।
Who Is Mukesh Sahni: डिप्टी CM का सपना, निषाद वोट का दांव
मुकेश सहनी-जिन्हें 'मल्लाह पुत्र' कहा जाता है-बिहार की राजनीति के मास्टर स्ट्रैटेजिस्ट हैं। 2015 में निषाद विकास संघ से शुरूआत, 2018 में वीआईपी की स्थापना, 2020 में NDA के साथ 4 सीटें जीतकर मंत्री बने, लेकिन 2022 में बर्खास्तगी के बाद महागठबंधन में लौटे। 2025 चुनाव में उन्होंने 15 सीटों पर दावा ठोका, जिसमें गौड़ा-बौराम, भभुआ, और गोपालपुर शामिल। नामांकन से ठीक पहले उन्होंने खुद चुनाव न लड़ने का ऐलान किया-भाई संतोष को उतारकर पूरे बिहार में कैंपेन पर फोकस करने के लिए।
अब डिप्टी CM का चेहरा घोषित सहनी का यह कदम NDA को झटका है। निषाद-मल्लाह वोट (पूर्वी बिहार में मजबूत) को एकजुट कर वे महागठबंधन को 2020 वाली हार से उबार सकते हैं। सहनी ने कार्यकर्ताओं से अपील की, 'अन्य क्षेत्रों में भी अगर फ्रेंडली फाइट है, तो बड़ा दिल दिखाएं। लालू की सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाएं।' RJD ने बदले में वीआईपी को डिप्टी CM का वादा किया, जो गठबंधन की मजबूती का संकेत है।
Bihar Chunav 2025 दांव-पेंच: NDA की रणनीति पर ब्रेक, महागठबंधन की एकजुटता का संदेश
यह फैसला बिहार चुनाव के दांव-पेंच को नया मोड़ देता है। NDA (बीजेपी-जेडीयू) ने 2020 में वीआईपी को साथ लेकर निषाद वोट काटे थे, लेकिन अब सहनी का महागठबंधन से चिपकना नीतीश-चुनावी गठजोड़ को चुनौती है। पहले चरण में दरभंगा जैसी सीटें NDA के लिए महत्वपूर्ण हैं, जहां मुस्लिम-यादव समीकरण RJD का दम है। वीआईपी का समर्थन अफजल खान की जीत पक्की कर सकता है, जो महागठबंधन को 121 में से मजबूत शुरुआत देगा। विपक्ष ने कहा, 'यह सहनी का मास्टरस्ट्रोक है-NDA के वोट-कटावे का इलाज।' वहीं, BJP ने इसे 'गठबंधन का ड्रामा' बताया।
14 नवंबर को रिजल्ट्स से पहले यह 'एकजुटता का संदेश' महागठबंधन को बूस्ट देगा। मुकेश सहनी की रणनीति साबित कर रही है-बिहार की राजनीति में छोटे दलों का दबदबा कम नहीं। क्या यह गठबंधन की जीत का टर्निंग पॉइंट बनेगा? वोटर्स का फैसला तय करेगा। बिहार के भाई-बहनों, वोट डालें-सामाजिक न्याय की लड़ाई जारी रखें!
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