Bihar Election 2025: बिहार में दो चरण में चुनाव से भाजपा को क्‍यों होगा नुकसान? प्रशांत किशोर ने समझाई वजह

Bihar Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का सोमवार, 6 अक्टूबर 2025 को ऐलान हो गया है। चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव की तारीखों की घोषणा करते हुए ऐलान किया कि राज्‍य में दो चरणों में 8 और 11 नवंबर को मतदान होगा।

बिहार चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर ने एक प्रेस कान्‍फ्रेंस की, जिसमें उन्‍होंने बिहार के लोगों से राज्‍य के हित के लिए वोट करने की अपील की। इसके साथ ही उन्‍होंने समझाया कि बिहार में दो चरणों में चुनाव होने से भाजपा को क्‍यों नुकसान होगा?

Bihar Assembly Election 2025

प्रेस कान्‍फ्रेंस की शुरूआत में प्रशांत किशोर ने कहा यह केवल चुनाव तिथियों की घोषणा नहीं है, बल्कि बिहार के बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की शुरुआत है। उन्होंने कहा, इस बार बिहार के लोग जाति, धर्म, स्थानीय मुद्दों या बड़े नेताओं जैसे मोदी, नीतीश, लालू और प्रशांत किशोर के नाम पर नहीं, बल्कि अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए वोट करेंगे। बिहार के वोटर अपने बच्चों की शिक्षा और रोजगार के अवसरों को ध्यान में रखकर मतदान करेंगे।

'हम इतना वोट काटेंगे कि उनकी हालत खराब हो जाएगी'

प्रशांत किशोर ने कहा नीतीश अगला चूड़ा-दही अन्ने मार्ग में नहीं खा पाएंगे। उन्‍होंने दावा किया कि हम इतना वोट काटेंगे कि एनडीए गठबंधन की हालत खराब हो जाएगी। वो हमारे उम्मीदवारों से हैरान हो जाएंगे

प्रशांत ने बताया- क्‍यों कई चरणों में चुनाव करवाने का पैटर्न रहा?

प्रशांत किशोर ने अतीत के चुनावी पैटर्न का जिक्र करते हुए बताया, "पहले बिहार में चार या पांच चरणों में चुनाव होते थे। पिछली बार (2020 में) यह तीन चरणों में संपन्न हुआ था।" उन्होंने बताया "कई चरणों में चुनाव कराने के पीछे यह धारणा थी कि उस समय प्रधानमंत्री मोदी का प्रभाव अधिक होता था। भाजपा के लोग अधिक चरणों में चुनाव इसलिए करवाते थे ताकि मोदी जी ज्यादा से ज्यादा चुनावी सभाएं कर सकें और प्रचार कर सकें।"

बिहार में दो चरण में चुनाव से भाजपा को क्‍यों होगा नुकसान?

किशोर ने आगे कहा, "मैंने भी उस दल के साथ काम किया है, इसलिए हम जानते हैं कि आठ-आठ और नौ-नौ चरणों में चुनाव इसलिए कराए जाते थे ताकि मोदी जी की अधिक से अधिक सभाएं हो सकें।"

प्रशांत किशोर ने दावा किया कि अब भाजपा ने भी यह मान लिया है कि प्रधानमंत्री कितनी भी सभाएं कर लें, उससे चुनाव परिणामों में खास बदलाव नहीं आएगा। उनके अनुसार, "इससे अच्छा है कि दो ही चरण में चुनाव कराकर इसे खत्म किया जाए। न नीतीश जी प्रचार कर सकते हैं और न मोदी के आने से कुछ होने वाला है।" अब यह सवाल उठता है कि क्या कम प्रचार से बिहार चुनाव में बीजेपी को नुकसान होगा?

बिहार में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला है

जन सुराज के सूत्रधार ने इस बात पर जोर दिया कि बिहार में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला है। लोग महागठबंधन और एनडीए के उम्मीदवारों के बारे में जानकारी लेने के साथ-साथ जन सुराज के उम्मीदवार का भी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि "लोगों को अपना चुनाव करना है और उन्होंने यह तय कर लिया है कि बदलाव लाना है।" उन्होंने कहा, "जीत या हार जन सुराज या प्रशांत किशोर की नहीं होनी है, बल्कि यह बिहार के लोगों की सोच की जीत या हार होगी।"

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