Bihar Chunav 2025: RJD का गढ़ BJP का नया टारगेट, क्यों मोदी का फोकस भोजपुरी इलाकों पर? 100 सीटों पर सबकी नजरें
Bihar Election 2025: : बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। हालांकि आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम का ऐलान अभी नहीं हुआ है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से पहले ही सबसे बड़े चेहरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद मैदान में उतारकर संकेत दे दिया है कि इस बार चुनावी रणनीति कहीं ज्यादा आक्रामक होगी - और फोकस में है 'भोजपुरी बेल्ट'।
भोजपुरी बेल्ट में अगली लड़ाई केवल वोट की नहीं, वर्चस्व की भी होगी। RJD ने जहां इस क्षेत्र को अपना आधार बना रखा है, वहीं BJP इस बार इसे 'पलटने' के मूड में है। 2025 का चुनाव यह तय कर सकता है कि क्या 'भाजपा बनाम RJD' की लड़ाई में भोजपुरी बेल्ट निर्णायक मोड़ लेगा? क्या पीएम मोदी की 'डबल इंजन' विकास राजनीति RJD के सामाजिक समीकरणों पर भारी पड़ेगी? जवाब तो आने वाले महीनों में मिलेंगे -लेकिन इसकी शुरुआत हो चुकी है।

काराकाट से सीवान तक-मोदी की दो रैलियां, तीन हफ्ते का गैप
पीएम मोदी तीन हफ्ते के बीच बिहार के भोजपुरी बेल्ट में दो रैलियां कर चुके हैं। पीएम मोदी आज शुक्रवार 20 जून सीवान पहुंचे, यहां उन्होंने पीएम आवास योजना के तहत 6,600 से अधिक बन चुके घरों की सौगात दीं। इसके अलावा कई विकास परियोजनाओं का की सौगात दी। इससे पहले 29 मई को पीएम मोदी ने काराकाट लोकसभा सीट के बिक्रमगंज में करोड़ों की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया था। अब पीएम मोदी का एक के बाद एक बिहार का दौरा भोजपुरी इलाकों में होना कोई संयोग नहीं है। दोनों स्थानों का भाषा, जातीय संरचना और राजनीतिक मूड के लिहाज से गहरा महत्व है।
क्या है भोजपुरी बेल्ट? 100 सीटों पर है इनका प्रभाव
बिहार का भोजपुरी भाषी क्षेत्र, जिसे आमतौर पर भोजपुरी बेल्ट कहा जाता है, 10 प्रमुख जिलों को समेटे हुए है, सारण, सीवान, गोपालगंज, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, पूर्वी और पश्चिम चंपारण।
इन जिलों में कुल मिलाकर लगभग 73 विधानसभा सीटें हैं। इसके अलावा, मुजफ्फरपुर और कटिहार जैसे जिलों के कुछ हिस्सों में भी भोजपुरी भाषी आबादी निर्णायक भूमिका में होती है। यानी कुल मिलाकर, बिहार की करीब 100 सीटों पर भोजपुरी मतदाताओं का सीधा प्रभाव है।
बिहार के भोजपुरी बेल्ट के 10 जिलों में विधानसभा सीटों का ब्योरा कुछ इस तरह है:
- सीवान में 8 सीटें
- सारण में 10 सीटें
- गोपालगंज में 6 सीटें
- भोजपुर में 7 सीटें
- बक्सर और कैमूर में 4-4 सीटें
- रोहतास में 7 सीटें
- औरंगाबाद में 6 सीटें
- पश्चिम चंपारण में 9 सीटें
- पूर्वी चंपारण में 12 सीटें
भोजपुरी बेल्ट के इन 10 जिलों में कुल 73 विधानसभा सीटें हैं। इसके अलावा मुजफ्फरपुर और कटिहार जैसे कुछ अन्य जिलों के हिस्सों में भी भोजपुरी बोली जाती है। इन जगहों की मिलाकर करीब 25 और सीटें ऐसी हैं, जहां भोजपुरी बोलने वाले मतदाता चुनाव नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं। इस तरह देखा जाए तो पूरे बिहार की लगभग 100 विधानसभा सीटों पर भोजपुरी भाषी वोटरों का असर होता है, जो किसी भी दल की जीत-हार तय कर सकते हैं।
पिछली बार बीजेपी को लगा था बड़ा झटका
2020 के विधानसभा चुनावों में यह क्षेत्र महागठबंधन (RJD के नेतृत्व में) के पक्ष में चला गया था। इन 73 सीटों में से 45 सीटें विपक्ष के खाते में गई थीं, जबकि एनडीए सिर्फ 27 पर सिमट गया था। इतना ही नहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा -बक्सर, आरा, काराकाट, औरंगाबाद जैसी पारंपरिक सीटें हाथ से निकल गईं।
भोजपुरी बेल्ट में लगातार दो चुनावी हार ने बीजेपी को सतर्क कर दिया है। राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए की कमान संभाल रही बीजेपी ने इस बार अपनी रणनीति पहले से तेज कर दी है। पार्टी ने चुनावी कार्यक्रम की घोषणा से काफी पहले ही भोजपुरी बेल्ट के मतदाताओं को साधने की कोशिश शुरू कर दी है।
चाहे होली से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मॉरिशस दौरे के दौरान भोजपुरी भाषा में जनता को संबोधित करना, या फिर तीन हफ्तों के भीतर क्षेत्र में उनकी दूसरी रैली करना-ये तमाम कदम बीजेपी की उसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका मकसद है भोजपुरी इलाके में अपनी पकड़ दोबारा मजबूत करना।
तो क्या अब समीकरण बदलेंगे?
पीएम मोदी की बार-बार भोजपुरी क्षेत्र में रैलियां यह साफ संकेत दे रही हैं कि बीजेपी इस बार भोजपुरी बेल्ट को किसी भी हाल में आरजेडी के कब्जे में नहीं छोड़ना चाहती।
इसके पीछे कई वजहें हैं:
- RJD का पारंपरिक गढ़ तोड़ना
- अगर बीजेपी यहां सेंध लगाती है, तो वह RJD की नींव को कमजोर करेगी।
- जातीय समीकरणों का पुनर्गठन
- यादव, कुशवाहा, भूमिहार, राजपूत और दलित वोटरों को अलग-अलग सामाजिक समीकरणों के ज़रिए साधने की कोशिश हो रही है।
- विकास बनाम वंशवाद की कहानी
- पीएम मोदी के भाषणों में यह पैटर्न दिख रहा है कि वो विकास को RJD के 'पारिवारिक राज' के मुकाबले रख रहे हैं। आज भी सीवान में पीएम मोदी ने कहा कि 'भाजपा सबका साथ और सबका विकास की बात करती है। लेकिन ये RJD और कांग्रेस सिर्फ परिवार का साथ और परिवार के विकास की बात करते हैं।'
- मोदी फैक्टर की ब्रांडिंग फिर से
- 2020 में राज्य के चुनावी नेतृत्व में नीतीश कुमार थे, लेकिन इस बार बीजेपी पीएम मोदी की लोकप्रियता को सीधे भुनाना चाहती है।
आगे की रणनीति क्या हो सकती है?
- बड़े नेताओं की सीधी मौजूदगी भोजपुरी बेल्ट में केंद्र सरकार के मंत्रियों और सीएम फेस को बार-बार भेजा जाएगा।
- विकास परियोजनाओं की झड़ी -सड़क, रेल, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में घोषणाएं की जा सकती हैं।
- स्थानीय नेताओं की पहचान -बीजेपी हर जिले में मजबूत स्थानीय नेतृत्व को उभारना चाहेगी।









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