Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Bihar Election 2025: मतदान के बाद पार्टी कार्यालयों में सियासी सन्नाटा, अब निगाहें 14 नवंबर के नतीजों पर

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दोनों चरणों का मतदान अब संपन्न हो चुका है। अब पूरे राज्य की निगाहें 14 नवंबर को आने वाले मतगणना और नतीजों पर टिकी हैं। चुनाव प्रचार की गहमागहमी, नारों की गूंज और रोड शो की भीड़भाड़ के बीच जो माहौल कई महीनों से पूरे बिहार में देखने को मिल रहा था, वह अब ठहर गया है।

जहां पहले नेताओं की आवाजें चौक-चौराहों तक गूंज रही थीं, वहीं अब राजनीतिक गलियारों में एक गहरी शांति और इंतजार का माहौल है। गुरुवार, 13 नवंबर की सुबह पटना की सड़कों पर रौनक अब नदारद थी, जो पिछले कई हफ्तों से लगातार बनी हुई थी।

bihar-election-2025-silence-in-party-offices-after-voting

चुनावी शोर के बाद सन्नाटा थम गया है और पार्टी कार्यालयों के बाहर एक अलग सी खामोशी दिखाई दे रही है। कांग्रेस, राजद, जदयू और भाजपा - चारों प्रमुख दलों के प्रदेश कार्यालयों का नजारा इस बार बदला-बदला था। राजनीतिक पार्टियों के दफ्तरों में न तो रणनीतिक बैठकों की भागदौड़ थी, न ही समर्थकों की भीड़। जिन गलियारों में कल तक नारे और भाषणों की आवाज़ें गूंजती थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है।

चाय की दुकानों पर एक्जिट पोल की चर्चा

पटना की गलियों और नुक्कड़ों पर स्थित चाय की दुकानों पर अब नेताओं की बयानबाज़ी की चर्चा नहीं, बल्कि मतदान प्रतिशत और एक्जिट पोल के आंकड़े चर्चा का विषय बने हुए हैं। लोग अपने-अपने अंदाज़ में नतीजों का अनुमान लगा रहे हैं कहीं लोग नीतीश कुमार की वापसी की बात कर रहे हैं तो कहीं तेजस्वी यादव की संभावनाओं पर चर्चा गर्म है। कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय सदाकत आश्रम में भी यही नज़ारा दिख रहा है।

जदयू और भाजपा कार्यालयों में भी शांति

जदयू के प्रदेश कार्यालय में नेताओं का आना-जाना सीमित रहा। कुछ कार्यकर्ता कार्यालय परिसर के बाहर कुर्सियां डालकर धूप सेंकते नजर आए। उनके चेहरे पर थकान के साथ-साथ प्रतीक्षा की झलक साफ देखी जा सकती थी। वहीं, भाजपा मुख्यालय में भी इस बार की चहल-पहल काफी कम थी। नेता अब सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर चल रही राजनीतिक चर्चाओं पर नज़र रखे हुए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सन्नाटा सिर्फ चुनावी थकान नहीं, बल्कि बड़ी तैयारी से पहले का ठहराव है। हर पार्टी जानती है कि 14 नवंबर की सुबह जब ईवीएम के बटन खुलेंगे, तो बिहार की सियासत की तस्वीर बदल सकती है। जिस दल ने मतदाताओं का भरोसा जीता होगा, वहां जश्न का माहौल होगा, जबकि जिनके सपने टूटेंगे, उनके कार्यालयों में और गहरा सन्नाटा पसरेगा। हर पार्टी इस समय अपने-अपने समीकरणों और बूथ-स्तर के आंकड़ों की समीक्षा में जुटी है।

अब बचे हैं बस कुछ घंटे

बिहार में इस बार का चुनाव सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और भविष्य की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। तेजस्वी यादव की अगुवाई में महागठबंधन, नीतीश कुमार और भाजपा के साथ एनडीए, और कांग्रेस के अलग तेवर - सभी दलों ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया था।

जब 14 नवंबर को मतगणना शुरू होगी और यह तय होगा कि बिहार की राजनीति किस करवट बैठेगी। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह वही वक्त है जब हर पार्टी "अगले झटके या जश्न से पहले की सांस" ले रही है। नेता और कार्यकर्ता सब चुपचाप अपनी-अपनी उम्मीदों को मन में समेटे हुए हैं। बिहार की जनता ने अपना फैसला ईवीएम में कैद कर दिया है - अब बस इंतज़ार है उस पल का जब मशीनों के अंदर से निकलेगा राज्य का अगला राजनीतिक भविष्य।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+