'भाजपाई को बिहार का CM नहीं बनने दूंगा!', किस बाहुबली नेता ने दी खुलेआम धमकी, नीतीश की राजनीति पर भी फोड़ा बम
Bihar Election 2025: बिहार के बाहुबली नेता और पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने सोशल मीडिया पर बड़ा दावा किया है। Y+ पर्सनल सिक्योरिटी हटने पर आगबबूला हुए पप्पू यादव ने कहा है कि वो बिहार में किसी भी कीमत पर 'भाजपाई को मुख्यमंत्री नहीं बनने देंगे।
पप्पू यादव ने कहा है कि उनकी जान को खतरा है और उनके सुरक्षा कवर को जानबूझकर हटाया गया। उन्होंने सीधे तौर पर कहा है कि वह "भाजपाई" को किसी भी कीमत पर बिहार का मुख्यमंत्री बनने नहीं देंगे और अगर कुछ हुआ तो जिम्मेदार वही लोग होंगे जिनका नाम उन्होंने लिया -जिनमें JDU के कुछ शीर्ष नेता और अफसर शामिल हैं।

Y+ सुरक्षा हटने का आरोप और मौत की साजिश का दावा
पप्पू यादव का कहना है कि उन्हें हाल ही में Y+ सुरक्षा दी गई थी, जो महज एक महीने के भीतर वापस ले ली गई। उन्होंने सोशल पोस्ट में आरोप लगाया कि यह कवर हटाना किसी साजिश का हिस्सा है और दो बड़े नेताओं व दो अफसरों ने मिलकर उनकी हत्या की साजिश रची है। पप्पू की तीखी टिप्पणी में संजय झा का नाम भी सामने आया -उन पर यह आरोप है कि उन्होंने अपनी पार्टी बेचकर सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनवाने की साजिश रची है।
पप्पू यादव बोले- सीमाांचल में BJP का बेड़ा गर्क होगा!
पप्पू यादव ने कहा, ''नीतीश जी के बेटे निशांत जी की सियासी संभावना का सौदा कर सम्राट के लिए सत्ता की सीढ़ी बना रहा है। उसे पता है मैं भाजपाई को किसी भी कीमत पर बिहार का मुख्यमंत्री नहीं बनने दूंगा तो मेरी जान का सौदा कर रहा है। मेरे रहते सीमांचल कोसी और मिथिला में BJP का बेड़ा गर्क हो जाएगा, इसलिए दो बड़ा पॉलिटिशियन और दो बड़ा ऑफिसर मिलकर मेरी मौत का षड्यंत्र रच रहा है।''
पप्पू का राजनीतिक असर - सीमांचल और कोसी की ताकत
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पप्पू यादव का प्रभाव सीमांचल‑कोसी बेल्ट पर बहुत मायने रखता है। कई रिपोर्टों का अनुमान है कि वह 7-10 विधानसभा सीटों पर निर्णायक प्रभाव डाल सकते हैं। यही वजह है कि उनकी बातों को लोकल दल और बड़े गठबंधन भी हल्के में नहीं ले रहे। वे छह बार सांसद रह चुके हैं और पूर्णिया पर उनकी पैठ स्पष्ट है।
नीतीश की संभावनाओं पर पप्पू की टिप्पणी
पप्पू यादव ने यह भी कहा कि वे चाहते हैं कि नीतीश कुमार मजबूत रहें, लेकिन उन्होंने राजनीति के लेन‑देन और संभावित सौदों पर भी सवाल उठाए हैं। खासकर तब जब पार्टी या परिवार के भीतर भविष्य को लेकर चर्चाएं चल रही हों। पप्पू ने विधानसभा चुनाव 2025 के संदर्भ में कहा है कि राज्य की राजनीति में पटरी बदली हुई है और जो लोग सत्ता के पीछे निजी सौदे कर रहे हैं, वे लोकतंत्र के लिए खतरनाक हैं।
अल्टीमेटम या राजनीतिक चाल?
पप्पू के तीखे शब्दों ने राजनीतिक गलियारे में हलचल पैदा कर दी है। RJD और अन्य महागठबंधन के नेताओं ने पप्पू की कुछ बातों पर आपत्ति जताई और गठबंधन में एकता बनाए रखने की कोशिश भी की है। वहीं, केंद्र और राज्य की सुरक्षा मशीनरी से जुड़े कदमों पर भी सवाल खड़े हुए हैं -क्या सुरक्षा हटाना प्रक्रियागत था या राजनीतिक दबाव की नुमाइंदगी? इस पर जांच और खुलासा मांगने की आवाज तेज है।
क्या यह बयान 2025 के बिहार चुनाव को प्रभावित कर पाएगा?
पप्पू यादव की धमकी-या चेतावनी-एक सियासी संकेत भी है, अगर सीमांचल‑कोसी में उनकी पकड़ बनी रहती है तो कुछ सीटों पर भाजपा की राह कठिन हो सकती है। लेकिन वोट बैंक और गठबंधन समीकरण बहुत नाज़ुक हैं, एक व्यक्तिगत बयान तुरंत बड़े बदलाव का कारण नहीं बन सकता। चुनावी नतीजा तय करेगा कि पप्पू के बयान कितने असरदार साबित होते हैं।












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