बिहार NDA में खींचतान तेज! जीतन राम मांझी की 20 सीटों की डिमांड से बढ़ी टेंशन, क्या होगा नीतीश-भाजपा का जवाब?
Bihar Election 2025 NDA Seat Sharing (Jitan Ram Manjhi): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एनडीए खेमे में सीट बंटवारे की रस्साकशी तेज होती जा रही है। छोटे सहयोगी दल अब अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के मूड में हैं। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी इस बार महज 'साइलेंट पार्टनर' नहीं बनेगी। मांझी ने 20 सीटों की डिमांड पेश कर एनडीए के भीतर हलचल बढ़ा दी है।
मांझी की दलील -सीटें बढ़ें ताकि पार्टी को मिले राष्ट्रीय पहचान
मांझी का कहना है कि उनकी पार्टी ने पिछले चुनाव में 7 सीटों पर दमखम दिखाया और 4 पर जीत दर्ज की थी। इस बार जनाधार और समर्थन को देखते हुए सीटें बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि अगर उनकी पार्टी कम से कम 8 सीटें जीतती है, तो राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल कर सकती है। यही वजह है कि सीट बंटवारे में उनकी हिस्सेदारी पहले से कहीं ज्यादा होनी चाहिए।

जरूरत पड़ी तो लड़ेंगे अकेले - मांझी का इशारा
अपने राष्ट्रीय अधिवेशन में मांझी ने और भी सख्त लहजा अपनाया। उन्होंने कहा कि पैसा नहीं, लेकिन जनता का समर्थन उनके पास है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भीड़ जुटाना सबके बस की बात नहीं है -प्रधानमंत्री मोदी की गया रैली में जो भारी भीड़ उमड़ी थी, वह उनकी ताकत को दिखाता है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर एनडीए में उनकी बात नहीं सुनी गई तो 2015 की तरह 'अलग राह' चुनने में भी देर नहीं करेंगे।
मांझी ने उदाहरण देते हुए कांशीराम और मायावती का जिक्र किया और कहा कि शुरुआती दौर में भले ही वे ज्यादा सीटें न जीत पाए, लेकिन उनके वोट शेयर ने पार्टी को पहचान दिलाई और यही आगे चलकर उन्हें सत्ता तक ले गया। उन्होंने साफ कहा -"हम मेहनत करें और नाम कोई और ले जाए, यह अब नहीं चलेगा।"
NDA में बढ़ी बेचैनी, JDU ने बनाया फासला
मांझी के बयान के बाद गठबंधन के भीतर बेचैनी बढ़ी है। हालांकि, जेडीयू ने इस विवाद से दूरी बना ली है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने स्पष्ट किया कि बीजेपी और जेडीयू के बीच सीट बंटवारे का कोई झगड़ा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हम, एलजेपी और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम के साथ सीट तालमेल बीजेपी का आंतरिक मसला है, उसमें जेडीयू का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
क्यों अहम है मांझी का वोट बैंक?
गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, नवादा और रोहतास जैसे जिलों में मांझी का खासा प्रभाव है। मुसहर समुदाय समेत कई दलित-आदिवासी वोटर उनका पारंपरिक आधार माने जाते हैं। यही वजह है कि वे एनडीए में अपनी राजनीतिक कीमत और बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
Bihar Election 2025 NDA seat sharing: भाजपा-जेडीयू बराबर सीटों पर लड़ सकते हैं चुनाव
हालांकि बिहार चुनाव को लेकर NDA के भीतर सीट बंटवारे की चर्चाएं अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बीच इस बार लगभग बराबर-बराबर सीटों पर सहमति बनने जा रही है। माना जा रहा है कि 243 सीटों में से दोनों दल करीब 100 से 105 सीटों पर चुनाव मैदान में उतरेंगे। 2020 के चुनाव की बात करें तो उस वक्त जेडीयू ने 115 सीटों पर और बीजेपी ने 110 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि नतीजों में बीजेपी ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 74 सीटें जीती थीं, जबकि जेडीयू महज 43 सीटों पर ही सिमटकर रह गई थी।












Click it and Unblock the Notifications